अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर ने 196 किलो वजनी मरीज की सफल सर्जरी की है। संस्थान में पहली बार सुपर सुपर ओबेस मरीज पर लैप्रोस्कोपिक वन-एनास्टोमोसिस गैस्ट्रिक बायपास (OAGB) सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। फलोदी (राजस्थान) के रहने वाले युवक का वजन सर्जरी के समय 196 किलो था। वहीं बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 67.4 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर था। किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर से ज्यादा BMI वाले रोगियों को सुपर सुपर ओबेस माना जाता है। ऐसे मामलों में सर्जरी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरी होती है, लेकिन एम्स की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने पारदर्शी योजना और समन्वय के साथ यह महत्वपूर्ण ऑपरेशन तीन घंटे में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। पेट का आकार छोटा कर सर्जरी की बता दें कि OAGB एक न्यूनतम इनवेसिव बेरियाट्रिक सर्जरी है, जिसमें पेट का आकार छोटा कर कैलोरी अवशोषण कम किया जाता है। अत्यधिक BMI और मेटाबोलिक जटिलताओं वाले मरीजों में यह बेहतर परिणाम देने वाली प्रक्रिया मानी जाती है। मरीज का प्रीऑपरेटिव मूल्यांकन और ऑप्टिमाइजेशन डॉ. महेंद्र लोढ़ा के निर्देशन में किया गया था। चौथे दिन डिस्चार्ज किया ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी सुचारू रही। उसे ऑपरेशन के दिन ही चलाया गया, दूसरे दिन ओरल लिक्विड शुरू किए गए और चौथे दिन स्थिर हालत में उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। सामान्य शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन शर्मा और सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. वैभव कुमार वार्ण्णेय ने टीम को बधाई दी। संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी ने भी टीम को बधाई दी। ये रहे टीम में शामिल ऑपरेशन टीम में डॉ. लोकेश अग्रवाल, डॉ. महेंद्र लोढ़ा, डॉ. सुभाष सोनी, डॉ. प्रशांत, डॉ. साहिल, डॉ. पवित्रन और डॉ. अक्षांत शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. शिल्पा गोयल, डॉ. निखिल कोठारी, डॉ. नम्रता और डॉ. पूजा ने किया।
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