‘एक्सीडेंट के बाद पापा को अगर पास के हॉस्पिटल में ले जाते तो शायद वो जिंदा होते। पहले जो कुछ हुआ, वो तो महज हादसा था। उसके बाद जो किया गया, वो मर्डर है। उन्हें जानबूझकर इलाज के लिए इतनी दूर ले जाया गया। पास में ले जाते और समय पर इलाज मिलता तो उसके बा
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दिल्ली में BMW कार हादसे में पिता नवजोत को खो चुके नवनूर को अब भी यह अफसोस है कि पिता को सही वक्त पर इलाज नहीं मिल सका। उनकी मां भी घायल हैं और वेकेंटेश्वर अस्पताल में भर्ती हैं। हादसा 14 सितंबर की दोपहर दिल्ली के कैंट मेट्रो स्टेशन के पास हुआ। एक BMW कार ने डिवाइडर से टकराकर बाइक को टक्कर मारी।
बाइक पर वित्त मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह (52) और उनकी पत्नी संदीप कौर सवार थे। नवजोत की हादसे में मौत हो गई, जबकि पत्नी घायल हैं। हादसे के बाद 15 सितंबर को BMW कार चला रही महिला गगनप्रीत को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, 27 सितंबर को पटियाला कोर्ट से उसे सशर्त जमानत भी मिल गई।
जमानत के पीछे घटनास्थल से मिले CCTV फुटेज को अहम माना जा रहा है। उससे पता चला है कि हादसे के दो सेकेंड बाद ही घटनास्थल पर एक सरकारी एंबुलेंस भी आई थी। इसमें मौजूद पैरामेडिकल स्टाफ घायलों तक भी गया था, लेकिन बिना प्राइमरी ट्रीटमेंट किए ही लौट गया। कोर्ट में एंबुलेंस स्टाफ का भी बयान दर्ज किया गया है।
एंबुलेंस स्टाफ ने कोई मेडिकल हेल्प क्यों नहीं की? घटना के बाद आरोपी गगनप्रीत क्या कर रही थी और घायलों को हॉस्पिटल ले जाने में देरी क्यों हुई? इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने एंबुलेंस स्टाफ के बयान खंगाले। कोर्ट के ऑर्डर, दोनों पक्षों के वकीलों के तर्क जाने और नवजोत सिंह के बेटे नवनूर से बात की।
हादसे के बाद सरकारी एंबुलेंस आई, लेकिन बिना मदद किए निकल गई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने 27 सितंबर को इस केस में आरोपी महिला गगनप्रीत मक्कड़ को सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट की ऑर्डर कॉपी में हादसे के 2 सेकेंड बाद ही सरकारी एंबुलेंस के घटनास्थल पर पहुंचने का जिक्र है, जो बिना मदद किए 40 सेकेंड बाद ही लौट गई। बचाव पक्ष ने इसी को लेकर दलील दी कि जब कोई मदद नहीं मिली तो घबराहट में आरोपी गगनप्रीत ने घायलों की जान बचाने की नीयत से जो समझ में आया, वो किया।
इस केस में एंबुलेंस में सवार पैरामेडिकल स्टाफ का बयान भी लिया गया। उनसे पूछा गया कि उन्होंने घायलों की मदद क्यों नहीं की। इस पर स्टाफ ने जवाब दिया, ‘वहां हमने मदद की पेशकश की थी, लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। घायलों ने भी कोई मदद नहीं मांगी। BMW चला रही आरोपी महिला क्या कर रही थी। इस पर स्टाफ ने बताया कि जब वे पहुंचे थे, तब महिला कार से बच्चों को निकालने में व्यस्त थी।
एंबुलेंस स्टाफ के फैसले पर कोर्ट ने माना कि ऐसा लगता है कि इन्होंने तुरंत मौके से निकल जाने का फैसला इसलिए किया, ताकि इन्हें कोई मदद के लिए न बुला ले। CCTV से ये भी पता चला है कि हादसे के करीब 7 मिनट बाद तक घायलों को मदद नहीं मिली। इसके बाद इन्हें अस्पताल ले जाया गया। कोर्ट ने आगे कहा कि CCTV रिकॉर्ड देखते हुए फैसला जमानत के पक्ष में जाता है।

1:37 बजे एक्सीडेंट हुआ, 2:16 बजे अस्पताल पहुंच सके घायल दिल्ली के BMW केस में कोर्ट ने पहली बार CCTV की ऑफिशियल डिटेल निकलवाई। कोर्ट ने फुटेज भी सीज कर लिया है, इसलिए वो सामने नहीं लाया जा सका। कोर्ट में सामने आई CCTV की डिटेल के मुताबिक, हादसा 14 सितंबर की दोपहर ठीक 1:37:20 बजे हुआ। BMW कार पहले डिवाइडर से टकराई और पलटते हुए बाइक से टकराई। उसी वक्त DTC बस निकल रही थी। बाइक बस के आगे आई और टक्कर हो गई।
CCTV से ये साफ हो गया है कि कार ने बाइक को पीछे से टक्कर नहीं मारी। बल्कि डिवाइडर से टकराकर पलटने के बाद वो किनारे के हिस्से से बाइक में टकराई थी। जबकि FIR में दावा किया गया था कि कार ने पीछे से टक्कर मारी। हादसे में बाइक चला रहे नवजोत सिंह तुरंत बेहोश हो गए। उनकी पत्नी संदीप कौर घायल हुईं, लेकिन होश में थीं। BMW कार महिला गगनप्रीत मक्कड़ चला रही थी। कार में उसके पति और दो बच्चे भी थे।
हादसे के करीब 7 मिनट बाद गगनप्रीत ही घायल पति-पत्नी को अस्पताल लेकर गई। वो दोपहर 2:16 बजे जीटीबी के न्यूलाइफ हॉस्पिटल पहुंचे। अस्पताल पहुंचने से पहले ही नवजोत की मौत हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने में करीब 39 मिनट लगे। अगर इसमें मदद न मिलने वाले 7 मिनट कम भी कर दें, तब भी कुल 32 मिनट लगे। अभियोजन पक्ष ने इसी 32 मिनट और आरोपी गगनप्रीत के इरादे को लेकर सवाल उठाए हैं।

ट्रॉमा सेंटर के बजाय नर्सिंग अस्पताल ले गई, इरादा इलाज नहीं खुद को बचाना कोर्ट डॉक्यूमेंट के मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने कहा कि जिस एरिया में ये हादसा हुआ। वहां 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ही गाड़ी चलाने की परमिशन है। जिस तरह से हादसा हुआ उससे साफ है कि कार की स्पीड 100-110 किमी प्रति घंटे रही होगी। इसी वजह से कार पर कंट्रोल नहीं रहा और हादसा हो गया।
हमने केस को लेकर अभियोजन पक्ष (प्रॉसीक्यूशन) के वकील अतुल कुमार से बात की। वो कहते हैं, ‘हमने कोर्ट में कहा था कि आरोपी गगनप्रीत ने सबूत भी मिटाने की कोशिश की है। इसलिए जमानत नहीं मिलनी चाहिए। घायल को बचाने के नाम पर 20 किमी दूर के अस्पताल में ले जाया गया। ऐसा क्यों किया गया, इसके पीछे क्या मंशा थी। हमारे नजरिए से तो ये आरोपी महिला ने सिर्फ और सिर्फ अपने फायदे के लिए किया, न कि घायलों की जान बचाने के लिए।‘

2-3 मिनट की दूरी पर आर्मी बेस अस्पताल, फिर दूर क्यों ले गई अतुल आगे कहते हैं, ‘ये एक्सीडेंट करीब डेढ़ बजे हुआ। 2 से 3 मिनट की दूरी पर आर्मी बेस हॉस्पिटल था। जिस रूट से आरोपी घायलों को जीटीबी नगर ले गई, उस रास्ते में भी आर्मी अस्पताल पड़ता है, लेकिन वहां नहीं ले गई। इसके अलावा 10-12 मिनट की दूरी पर एम्स ट्रॉमा सेंटर है। सफदरजंग अस्पताल का भी ट्रॉमा सेंटर है।‘
‘अगर सीरियस एक्सीडेंट हुआ है तो हर किसी को पता है कि इसमें 1-1 सेकेंड कीमती होता है। इसलिए जितना नजदीक हो सके वहां के अस्पताल में ले जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जीटीबी नगर का न्यूलाइफ अस्पताल एक तरह से नर्सिंग होम है। जहां सिर्फ लेबर रूम और ICU सुविधा है। ऐसे में गंभीर रूप से घायल ट्रॉमा मरीज को नर्सिंग हॉस्पिटल में ले जाना ही सवालों के घेरे में है।‘
अतुल आगे कहते हैं, ‘घायल के इलाज के लिए गोल्डन आवर का एक-एक सेकेंड कीमती होता है। ऐसे में आधे घंटे से ज्यादा का वक्त सिर्फ सड़क पर सफर में गुजारा गया। ऐसा सिर्फ इसलिए किया गया, क्योंकि वो अस्पताल आरोपी महिला के रिलेटिव का है। आरोपी गगनप्रीत ने अस्पताल में मेडिकल रिकॉर्ड में गड़बड़ी भी कराई।‘

अब बचाव पक्ष के वकील की बात… हादसे के बाद गगनप्रीत खुद सदमे में थी, फिर भी घायलों की मदद की इसके बाद हमने बचाव पक्ष के वकील प्रदीप राणा से बात की। वो कहते हैं, ‘हादसे में गगनप्रीत भी घायल हुईं, लेकिन फिर भी उन्होंने भागने की कोशिश नहीं की। इसलिए उनका इरादा गलत नहीं माना जा सकता। घटना के बाद आरोपी ने खुद अपनी पहचान बताई। पति और दो नाबालिग बच्चों को छोड़कर घायलों को खुद अस्पताल लेकर गई और उनकी जान बचाने की कोशिश की।’
‘जहां तक कार की तेज रफ्तार (100 से ज्यादा स्पीड) की बात कही गई है तो CCTV फुटेज और दूसरे किसी सबूत से इस बात की पुष्टि नहीं हुई है। हादसे में बाइक दूसरे वाहन से भी टकराई है। इसलिए सिर्फ इसमें खराब ड्राइविंग का आरोप नहीं लगा सकते।’
वे आगे कहते हैं, ‘घटनास्थल पर घायलों को कोई मदद नहीं मिली। इसलिए गगनप्रीत खुद उन्हें अपने साथ ले गईं। इसमें कोई गलत इरादा नहीं था। घायलों को अस्पताल में ले जाते वक्त आरोपी खुद ट्रॉमा और शॉकिंग हालत में थी इसलिए उसे ICU में भर्ती होना पड़ा।

दोस्तों संग बर्थडे मनाकर लौटा तो गुरुद्वारे जा चुके थे मम्मी-पापा इसके बाद हम दिल्ली के वेकेंटेश्वर अस्पताल में नवजोत सिंह के बेटे नवनूर से भी मिले। अभी वो घायल मां का इलाज करा रहे हैं। हमने उनकी मौजूदा स्थिति को देखते हुए उनसे कैमरे पर बात नहीं की।
वे कहते हैं, ‘इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अगस्त में मुझे नई जॉब मिली थी। 16 सितंबर को मेरा बर्थडे था, लेकिन वर्किंग डे होने के चलते 13 सितंबर यानी शनिवार को ही मैं दोस्तों के साथ बर्थडे सेलिब्रेट करने चला गया था। रात में दोस्त के घर ही रुका था।‘
‘अगले दिन 14 सितंबर को करीब 12 बजे के आसपास घर लौटा। तब तक मम्मी-पापा गुरुद्वारे जा चुके थे। वो अक्सर गुरुद्वारे जाते थे। वैसे तो पापा 3-4 किमी के अंदर ही बाइक से जाते थे, लेकिन उस दिन गुरुद्वारे भी बाइक से चले गए और मम्मी को भी साथ ले गए।‘
कुछ ही देर बाद मुझे एक पड़ोसी का फोन आया। उन्होंने बताया कि मम्मी ने किसी राहगीर के फोन से कॉल करके बताया है कि उनका एक्सीडेंट हो गया है। मम्मी-पापा दोनों घायल हैं। उन्हें जीटीबी नगर के न्यूलाइफ अस्पताल ले जा रहे हैं। शुरू में नहीं लगा था कि कोई बड़ा एक्सीडेंट होगा। मैं तुरंत दोस्त को फोन कर अस्पताल के लिए निकला।

16 सितंबर को नवजोत सिंह का अंतिम संस्कार हुआ। इसी दिन उनके बेटे नवनूर का जन्मदिन था।
अस्पताल में मां का इलाज नहीं हो रहा था, आरोपी ICU में एडमिट मुझसे पहले मेरे मामा न्यूलाइफ अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने बताया कि कई बार कहने पर अस्पताल में डॉक्टर देखने आए। तब मेरे मामा को दवा की पर्ची दी गई। उन्हें दवा लेने के लिए भी अस्पताल से बाहर जाना पड़ा। आप सोच सकते हैं कि उनका इलाज कैसे किया जा रहा था।
जब मैं वहां पहुंचा तो रिसेप्शन के सामने ही मम्मी को स्ट्रेचर पर लिटाया था। थोड़ी ही दूरी पर पर्दे के पीछे पापा थे, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। मैं हिम्मत जुटाकर उन्हें देखने गया, लेकिन इस हालत में देख नहीं सका। इसी बात का अफसोस है कि आखिरी दिन मेरी पापा से मुलाकात नहीं हो पाई।

ये तस्वीर हादसे के बाद अस्पताल की है, जहां एक स्ट्रेचर पर नवजोत का शव, दूसरे पर घायल पत्नी संदीप कौर हैं।
पापा के मौत की खबर से मैं टूट गया। दोस्तों ने हिम्मत दी, बोले- अब मां को बचाना है। हमें पता चला कि आरोपी महिला खुद ICU में एडमिट है। पुलिस कोई एक्शन नहीं ले रही है। इसलिए वहीं से 112 नंबर पर पुलिस को कॉल किया, ताकि घटना तो रजिस्टर हो सके। इसके बाद हम लोग मां को रेफर कराकर वेंकेटेश्वर अस्पताल ले आए। मेरी मां वेंकेटश्वर स्कूल में ही टीचर हैं।
नवनूर आगे कहते हैं कि आरोपी पक्ष के लोग काफी मजबूत हैं। मुझे नहीं लगता है कि हमें इंसाफ मिल पाएगा। मैं अपनी मां की सेवा में लगा हूं। मैं बस यही कहना चाहूंगा कि अगर मेरे पापा को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराते और तब उन्हें कुछ होता तो हम पुलिस केस ही नहीं करते। ये सब जानबूझकर किया गया, इसलिए इंसाफ के लिए लड़ेंगे। …………………… ये खबर भी पढ़ें…
क्या लॉरेंस और गोल्डी बराड़-रोहित गोदारा के बीच छिड़ेगी गैंगवार

तारीख 12 सितंबर, 2025, वक्त रात के 3:36 बजे, जगह यूपी का बरेली शहर। सफेद बाइक पर सवार दो लड़के ऊंची दीवारों वाले एक घर के सामने से गुजरे। कुछ सेकेंड बाद उसी घर के पास वापस आए। बाइक पर पीछे बैठा लड़का उतरा, पिस्टल निकाली और घर पर 11 राउंड फायरिंग की। ये सब सिर्फ 30 सेकेंड में हुआ। जिस घर पर फायरिंग की गई, वह बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी का है। दावा किया गया कि फायरिंग गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा ने कराई। पढ़िए पूरी खबर…
