नवरात्रि के दसवें दिन विजयादशमी पर पाकुड़ के विभिन्न दुर्गा मंदिरों और पंडालों में सुहागिन महिलाओं ने ‘सिंदूर खेला’ की रस्म निभाई। इस दौरान महिलाओं में भारी उत्साह देखा गया। उन्होंने मां दुर्गा की विदाई से पहले पूजा-अर्चना की और एक-दूसरे को सिंदूर लग
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शहर के रेलवे कॉलोनी सहित कई पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्र हुईं। उन्होंने पूरे विधि-विधान से मां भवानी की पूजा की। पूजा के बाद, महिलाओं ने एक-दूसरे के गालों पर सिंदूर लगाया, नृत्य किया और गीत गाए। मान्यता है कि विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की विदाई होती है। विदाई से पूर्व सुहागन महिलाएं मां के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराती हैं और पूजा-अर्चना करती हैं।
इसके बाद वे एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अपने सुहाग की कामना करती हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।महिलाओं ने बताया कि सिंदूर सुहाग का प्रतीक है। इस दिन पति की लंबी उम्र और सदा सुहागन रहने की कामना की जाती है। दुर्गा पूजा का नौ दिवसीय उत्सव विजयादशमी के दिन ही समाप्त होता है। जिले भर में दुर्गा पूजा को लेकर काफी उल्लास रहा। बुधवार को नवमी से मौसम में अचानक बदलाव आया और वर्षा हुई, लेकिन इसके बावजूद लोगों ने पूजा का जमकर आनंद लिया। पूजा पंडालों में भी भारी भीड़ देखी गई।
