इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अदालत या लोअर कोर्ट लिखने पर फिर आपत्ति जताई है और अपने रजिस्ट्री विभाग को आधिकारिक रिकॉर्ड और कार्यवाही में लोअर कोर्ट या कोर्ट बिलो जैसे शब्दों के उपयोग से बचने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इनके स्थान पर ट्रायल कोर्ट या संबंधित विशिष्ट अदालत के नाम का उपयोग किया जाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने एससीएसटी एक्ट की एक आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि लोअर कोर्ट जैसे शब्द सही कानूनी शब्दावली का प्रतिनिधित्व नहीं करते। हाईकोर्ट ने सखावत व अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संदर्भ देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने किसी भी अदालत को निचली अदालत कहना संवैधानिक लोकाचार के खिलाफ बताया है। साथ ही लोअर कोर्ट रिकॉर्ड की बजाय ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड शब्द का प्रयोग करने तथा अदालतों को उनके पदनाम जैसे विशेष एससी/एसटी कोर्ट) या ट्रायल कोर्ट के नाम से संबोधित करने को कहा गया है।
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