शास्त्री पर के सामने विरोध प्रदर्शन किया गया।
गुना के शास्त्री पार्क के सामने रविवार को एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) पार्टी ने विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग के उस कदम के खिलाफ था, जिसमें बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर मतदाता सूची से 65 लाख नाम हटा दिए गए हैं। पार्टी नेताओं
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पार्टी जिला सचिव मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यवाही से 7 करोड़ 73 लाख मतदाताओं की सूची में से 65 लाख नाम हटा दिए गए। इसका मतलब है कि इतने लोग अब वोट नहीं दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मतदान का अधिकार छीनना नहीं है, बल्कि नागरिकता से भी वंचित करना है।
जन्म तिथि और माता-पिता के दस्तावेज की अनिवार्यता
श्रीवास्तव ने बताया कि आयोग ने 1 जुलाई 2025 के एक पत्र में नए निर्देश दिए हैं। इसमें 1 जुलाई 1987 से पहले पैदा हुए लोगों को अपनी जन्मतिथि और जन्म स्थान साबित करना होगा। 1987 से 2004 के बीच जन्मे लोगों को अपनी जन्मतिथि के साथ माता-पिता में से किसी एक का जन्म स्थान बताना होगा। वहीं 2 दिसम्बर 2004 के बाद जन्मे लोगों को अपने साथ माता-पिता दोनों की जन्मतिथि और जन्म स्थान का प्रमाण देना होगा।
प्रदर्शन को संबोधित करते वक्ता।
पहचान पत्र भी अस्वीकार किए जा रहे
नेताओं ने आरोप लगाया कि आयोग आधार कार्ड, राशन कार्ड और यहां तक कि वोटर आईडी कार्ड को भी मान्य पहचान पत्र के रूप में स्वीकार नहीं कर रहा है। जबकि यही दस्तावेज आयोग खुद जारी करता है। इसे उन्होंने पूरी तरह असंवैधानिक बताया।
जन आंदोलन की अपील
एसयूसीआई नेताओं ने कहा कि यह फैसला चुनाव को निष्पक्ष बनाने के बजाय नागरिकों को अधिकारों से वंचित करने वाला है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बड़े पैमाने पर जन आंदोलन और जन समितियां बनाकर इस फैसले का विरोध किया जाए। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन मनोज रजक ने किया।
