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गुरु नानक देव अस्पताल के ऑर्थो वार्ड में भर्ती एक आयुष्मान कार्ड धारक मरीज के इलाज को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। मरीज चरण सिंह के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही, टालमटोल करने और बाहर से दवाएं, टेस्ट किट खरीदने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है।
गगड़भाणा गांव निवासी चरण सिंह के दामाद जसपाल सिंह ने बताया कि उनके ससुर को 6 अक्तूबर से अस्पताल में भर्ती किया गया है, लेकिन कूल्हे और हाथ के फ्रैक्चर का ऑपरेशन अब तक नहीं किया गया। जसपाल सिंह का कहना है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उन्हें दवाएं, ब्लड टेस्ट किट और अन्य सामग्री बाहर से खरीदनी पड़ रही है।
अस्पताल प्रशासन लगातार ऑपरेशन को टाल रहा है और मुफ्त उपचार की सुविधा केवल कागजों तक सीमित है। जसपाल सिंह ने बताया कि वह एक गरीब परिवार से हैं और 6 अक्तूबर से अस्पताल में होने के कारण अपने काम पर भी नहीं जा पा रहे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब जस सेवा सोसायटी की ओर से शिकायत की गई, उसके बाद से जूनियर डॉक्टर उनके साथ सही तरीके से बात नहीं कर रहे हैं। समाजसेवी संस्था जस सेवा सोसायटी ने डीसी साक्षी से हस्तक्षेप करने की मांग की है। संस्था का कहना है कि जब आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज मुफ्त है, तब भी मरीजों को बाहर से दवाएं मंगवाना अस्वीकार्य है।
अस्पताल के डीएमएस डॉ. ग्रोवर ने कहा कि मरीज को कूल्हे और हाथ में फ्रैक्चर था। टीम ने तत्काल इलाज शुरू किया । मरीज का हीमोग्लोबिन स्तर काफी कम था, जिससे ऑपरेशन संभव नहीं था। परिजनों से बार-बार रक्तदान के लिए कहा गया पर कोई डोनर नहीं मिला।
अस्पताल ने ब्लड बैंक से खून की व्यवस्था कर जान बचाई। केवल एचआईवी टेस्ट किट और ईडीटीए शीशियां बाहर से मंगवाने को कहा गया था, क्योंकि मरीज हेपेटाइटिस-बी पॉजिटिव है और ये वस्तुएं सामान्य अस्पताल पैकेज में शामिल नहीं होतीं।
