जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी लड़की के परिवार के लोगों से बातचीत करती हुई।
पानीपत में बाल विवाह को लेकर एक बार फिर प्रशासन की सख्ती देखने को मिली। अर्जुन नगर क्षेत्र में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग लड़की की शादी सोमवार तय की गई थी लेकिन, जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से यह विवाह संपन्न होने से पहले ही रुक गया। अदाल
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अर्जुन नगर निवासी मजदूरी करने वाले व्यक्ति ने अपनी बेटी की शादी कुरुक्षेत्र से आने वाली बारात के साथ तय की थी। शादी की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। किसी ने इसकी सूचना जिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता को दी। सूचना मिलते ही अधिकारी ने अपनी टीम के साथ जांच शुरू की और मौके पर पहुंचकर परिवार से बातचीत की।
रजनी गुप्ता ने बताया कि जब दस्तावेजों की जांच की गई तो लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम पाई गई। परिवार को समझाया गया कि नाबालिग लड़की का विवाह करवाना दंडनीय अपराध है। अधिकारियों ने परिवार को कानूनी प्रक्रिया और इसके परिणामों के बारे में भी बताया।
विवाह को रूकवाया, जिला प्रशासन करेगा निगरानी
जिला प्रशासन की टीम को परिवान के लोगों से बातचीत के बावजूद विवाह होने की आशंका बनी रही। जिसके चलते प्रशासन ने तत्काल मामले को न्यायिक अधिकारी सरु गोयल की अदालत में प्रस्तुत किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विवाह पर तुरंत रोक लगा दी और पुलिस व प्रशासन को स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान लड़की के पिता ने अदालत में स्वीकार किया कि उन्हें बेटी की उम्र का सही अंदाजा नहीं था। उन्होंने यह सोचकर विवाह तय किया था कि वह बालिग हो चुकी है। अदालत के हस्तक्षेप के बाद परिवार ने लिखित रूप से आश्वासन दिया कि अब शादी नहीं करेंगे और लड़की की शिक्षा जारी रखेंगे।
बाल विवाह बचपन के अधिकारो पर सबसे बड़ा प्रहार
जिला संरक्षण अधिकारी रजनी गुप्ता ने कहा कि “बाल विवाह किसी भी बच्चे के बचपन और अधिकारों पर सबसे बड़ा प्रहार है। ऐसी घटनाएं समाज में जागरूकता की कमी दर्शाती हैं, लेकिन प्रशासन हर स्तर पर इन्हें रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कार्रवाई के बाद जिले में प्रशासनिक सतर्कता की चर्चा रही। अधिकारियों का कहना है कि बाल विवाह रोकने के लिए समाज की भागीदारी जरूरी है ताकि हर बच्चा सुरक्षित और शिक्षित भविष्य की ओर बढ़ सके।
