पंजाब के अमृतसर में हैलोवीन डे का विरोध शुरू हो गया है। भगवान वाल्मीकि वीर सेना के नेता लक्की वैद ने इसका विरोध जताते हुए इसे विदेशी धरती का त्योहार बताया है। उनका कहना है कि अमृतसर वो भूमि है जहां गुरु अवतारों, संतों और शहीदों ने सच्चाई और त्याग की
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लक्की वैद ने कहा कि कुछ माता-पिता अपने बच्चों को ऐसी विदेशी परंपराओं में शामिल कर रहे हैं, जो हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा — उन्हें सोचना चाहिए कि वे किस धरती पर जन्मे हैं कहा— यह श्री गुरु राम दास जी और शूरवीरों की पवित्र भूमि है।
भगवान वाल्मीकि वीर सेना के नेता लक्की वैद
धार्मिक संस्थानों से करेंगे मुलाकात
वैद ने बताया कि वे दरबार साहिब, वाल्मीकि तीर्थ और दुर्गियाणा मंदिर के प्रबंधकों से मुलाकात कर इस मुद्दे को उठाएंगे और शहर में हैलोवीन जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग करेंगे।उन्होंने संगत से अपील की कि वे बच्चों को गुरु नानक देव जी के आगामी प्रकाश पर्व की महत्ता समझाएं और उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़े रखें।
वैद ने कहा कि कल यानी 31 अक्टूबर जहां जहां हैलोवीन डे मनाया जाएगा वहां- वहां विरोध किया जाएगा ।
अब जानिए क्या हाेता है हैलोवीन डे
हर साल 31 अक्टूबर को हैलोवीन फेस्टिवल (हैलोवीन डे) के रूप में मनाया जाता है। इसे अमेरिका और लंदन में भी एक सेलिब्रेशन की तरह मनाया जाने लगा है। इस उत्सव के दौरान बुराई की झांकियां पेश की जाती हैं और बड़े व बच्चे भूत, प्रेत, पिशाच की वेशभूषा में तैयार होते हैं। इसे त्योहार को मनाने वाले लोग मानते हैं इससे बुराई दूर होती है और सकारात्मकता बढ़ती है। जानिए इस फेस्टिवल से जुड़ी खास बातें
- तैयार करते हैं एक हॉन्टेड हाउस : इस उत्सव को मनाने के लिए किसी खास जगह को चुना जाता है और कद्दू को सुखाकर इसके ढांचे को भूत के सिर का आकार देकर सजाया जाता है। जो कि भूतों का एक प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा सजावट में ऐसे क्राफ्ट का इस्तेमाल किया जाता है जिससे वो जगह एक हॉन्टेड हाउस की तरह लगे।
- यूरोप से हुई शुरुआत : हैलोवीन की शुरुआत यूरोप में सेल्ट ने 16वीं शताब्दी में की। नॉर्थ-यूरोप की सेल्टिक प्रजाति की आबादी के ग्रुप को सेल्ट कहा जाता है। वे साल की फसल कटाई के अंत और सर्दियों की शुरुआत को एक उत्सव के रूप में मनाते थे जिसे हैलोवीन नाम दिया गया। सेल्ट इस उत्सव को मनाने के लिए अलाव जलाते थे जिसमें बलि दिए जा चुके पशुओं की हड्डी फेंकी जाती थी। साथ ही बच्चे, बड़े और बुजुर्ग भूतों जैसी वेशभूषा पहन और मुखौटा लगातार बुरी आत्माओं की नकल करते थे। उनका मानना था कि ऐसा करने से बुरी आत्माएं शांत हो जाती हैं।
- खास तरह के फूड तैयार किए जाते हैं: धीरे-धीरे इसे स्कॉटलैंड, इंग्लैंड और आयरलैंड समेत दूरे देशों में भी मनाया जाने लगा। हैलोवीन के मौके पर लोग सिर्फ सजावट, कपड़ों और एक-दूसरे को डराने तक ही नहीं सीमित है बल्कि इस उत्सव के सेलिब्रेशन में चार चांद लगाने के लिए विशेष फूड भी तैयार किए जाते हैं। खास बात है कि जैसी हैलोवीन की थीम है खाना भी बिल्कुल वैसा होता है। जैसे भूत की शक्ल सी दिखने वाली कद्दू से बनी डिश व कैंडी, जानवरों के आकार वाले केक और पेस्टी।
- भूत और भी हुए डरावने : अब ये उत्सव सिर्फ परंपरा का हिस्सा ही नहीं बल्कि आधुनिकता का एक उदाहरण भी बन गया है। जिसे अब हर प्रजाति के लोग मना रहे हैं। इनमें युवाओं की गिनती अधिक है। इस उत्सव को अब पार्टी का रंग दिया जाने लगा है। जिसमें भूतों के रंगरूप को नया रूप दिया जा रहा है। यानी ये अब और भी डरावने नजर आ रहे हैं।

