नशा तस्करी के आरोप में आरोपी का घर ध्वस्त करते हुए कर्मचारी।
लुधियाना के जगराओं में शहर के चुंगी नंबर सात के पास पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के एससी विंग के प्रधान अजय गिल के मकान को युद्ध नशा के विरुद्ध के तहत तोड़ा। घर को नगर काउंसिल और पुलिस की संयुक्त टीम ने भारी विवाद के बीच ध्वस्त कर दिया। पुलिस ने जिस घर
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नगर काउंसिल और भारी पुलिस बल काका डॉन और उनके बेटे अजय गिल का घर गिराने पहुंचे। अजय गिल पर नशा तस्करी के कई गंभीर मामले दर्ज हैं। परिवार की महिलाओं ने कार्रवाई का विरोध करते हुए अधिकारियों को अदालत के आदेशों की प्रति सौंपी। नगर काउंसिल के सुपरिंटेंडेंट विष्णु दत्त ने कार्रवाई अगली सुनवाई तक रोक दी और टीम को वापस बुला लिया।
दोबारा डीएसपी और ईओ खुद पहुंचे, मकान गिरवाया
टीम के वापस लौटने के लगभग एक घंटे बाद, नगर काउंसिल के कार्यकारी अधिकारी हरनरेंद्र सिंह शेरगिल और डीएसपी कुलवंत सिंह दोबारा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत घर गिराने का आदेश दिया। रास्ता तंग होने के कारण जेसीबी मशीन अंदर नहीं जा सकी, जिसके बाद मकान को हथौड़ों से तोड़ा गया।
अजय गिल भाजपा एससी विंग का उपप्रधान
जिस अजय गिल का घर गिराया गया है, उसके घर के बाहर जगराओं बीजेपी (एससी विंग) प्रधान की नेम प्लेट लगी है। इलाके में उसके बड़े-बड़े होर्डिंग लगे हैं। होर्डिंग पर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ बीजेपी नेताओं की तस्वीरें हैं। पुलिस का दावा है कि अजय गिल पर नशा तस्करी सहित कुल सात गंभीर मामले दर्ज हैं।
सत्तापक्ष के दबाव में की जा रही हे कार्रवाई
अजय गिल की बहन सुमिता ने आरोप लगाया कि उसके भाई को सत्ता पक्ष के दबाव में झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है क्योंकि वह बीजेपी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि परिवार ने पुलिस के खिलाफ कई अदालती मामले दायर किए हैं, जिनमें पहले सिटी थाना के एसएचओ और एक एएसआई ने उन्हें कथित तौर पर केस वापस लेने के लिए धमकाया भी था।
भाजपा नेता की बहन सुमिता
जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते दिखे दोनों विभाग
कार्रवाई से पहले जब पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों से कारण पूछा, तो पुलिस का कहना था कि घर नगर काउंसिल की भूमि पर अवैध कब्जा कर बनाया गया है और तोड़फोड़ की कार्रवाई नगर काउंसिल कर रही है। वहीं नगर कौंसिल की बिल्डिंग शाखा की इंस्पेक्टर रमनदीप कौर ने उलटा दावा किया कि कार्रवाई पुलिस के आदेश पर हो रही है और यह डिप्टी कमिश्नर द्वारा भेजी गई लिस्ट के आधार पर की जा रही है।
उनका कहना था कि घर अवैध निर्माण की श्रेणी में नहीं आता और यह कार्रवाई सरकार की तरफ से चल रही ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ मुहिम के तहत की जा रही है। दोनों विभाग इस दौरान एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नज़र आए। इसके बावजूद शाम को पुलिस और नगर काउंसिल अधिकारियों ने अदालत के आदेशों की अगली तारीख 26 नवंबर बताकर मकान गिरा दिया।
पुलिस ने सुमिता को मीडिया से बात करने से रोका
जानकारी के मुताबिक जब परिवार की युवती सुमिता मीडिया के सामने अपनी बात रख रही थी, तो एसएचओ उसे बार-बार घर के अंदर बुलाते दिखे। जब पत्रकार कवरेज के लिए घर के भीतर गए, तो पुलिस ने उनसे कैमरे बंद करने को कहा। मौके पर मौजूद कई पत्रकारों ने आरोप लगाया कि कवरेज रोकने के दौरान उन्हें पुलिस की ओर से धक्के भी दिए गए।
जिला देहाती के प्रधान डा. रजिंदर शर्मा ने बताया कि उन्होंने अभी तक एस सी मोर्चा की नई टीम का गठन नहीं किया। अगर उसके घर के बाहर इस तरह का बोर्ड लगा है तो वह इस की जांच करेंगे।
