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पुलिस बोली-2020 के दिल्ली दंगों में टेरर फंडिंग की गई: मीटिंग्स में दंगा भड़काने की योजना बनाई, आरोपियों ने असम को भारत से अलग करने की बात की

पुलिस बोली-2020 के दिल्ली दंगों में टेरर फंडिंग की गई:  मीटिंग्स में दंगा भड़काने की योजना बनाई, आरोपियों ने असम को भारत से अलग करने की बात की


नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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दिल्ली में 23 फरवरी 2020 को शुरू हुआ दंगा 25 फरवरी को जाकर थमा था।

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 2020 के दिल्ली दंगे अचानक नहीं हुए थे, बल्कि पहले से पूरी योजना बनाकर कराए गए थे। पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने बताया कि दंगों के लिए टेरर फंडिंग की गई।

पुलिस के मुताबिक ताहिर हुसैन, शिफा-उर-रहमान, मीरन हैदर, इशरत जहां और खालिद सैफी ने दंगों के लिए पैसे जुटाए। दंगों से पहले आरोपियों ने कई मीटिंग्स भी की। इसमें हिंसा बढ़ाने और चक्का जाम की योजना बनाई गई थी। प्रोटेक्टेड गवाहों के बयान में यह भी सामने आया कि कुछ लोग “असम को भारत से अलग करने” जैसी बातें कर रहे थे।

दरअसल जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच उमर खालिद, शिफा-उर-रहमान और अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट में एक वीडियो भी दिखाया गया जिसमें भीड़ डंडे लेकर दिखाई दे रही है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार को तय की है।

दिल्ली पुलिस की 3 बड़ी बातें-

1- चक्का जाम का मकसद सिर्फ सड़क रोकना नहीं था, बल्कि जरूरी सेवाएं रोककर दिल्ली को ठप करना था। 13 और 15 दिसंबर 2019 की घटनाओं में 45 पुलिसकर्मी, 100 से ज्यादा नागरिक घायल हुए और कई बसें व सरकारी संपत्तियां जलाई गईं।

2- ताहिर हुसैन, शिफा-उर-रहमान, इशरत जहां, खालिद सैफी और मीरन हैदर ने दंगों के लिए कुल करोड़ों की फंडिंग की। ताहिर हुसैन ने 1.30 करोड़ रुपए, शिफा-उर-रहमान ने 8.90 लाख रुपए और मीरन हैदर ने 2.86 लाख रुपए खर्च किए, साथ ही 4.82 लाख जुटाए।

3- कई प्रदर्शनकारी शुरू से ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते थे, लेकिन पुलिस के अनुसार मुख्य समूह के लोग हिंसा पर अड़े हुए थे। यह बात व्हाट्सऐप चैट्स में भी साफ दिखाई देती है, जहां कुछ लोग शांति की बात कर रहे थे, लेकिन नेतृत्व करने वाले लोग लगातार हिंसक विरोध की मांग करते रहे।

कोर्ट बोला- दिल्ली पुलिस दस्तावेज और रिकॉर्ड पेश करे

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब मामले की सुनवाई सोमवार दोपहर बाद होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में सबसे पहले प्रोटेक्टेड गवाहों की गवाही सुनी जाएगी। जजों ने कहा-

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पुलिस जिन दस्तावेजों और चैट्स का हवाला दे रही है, उन्हें पहले रिकॉर्ड पर रखा जाए, ताकि कोर्ट उन्हें देखकर आगे सुनवाई आगे बढ़ा सके।

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बेंच ने कहा कि जमानत पर कोई फैसला लेने से पहले सभी आरोपियों की भूमिका, पुलिस की दलीलें और पेश किए गए दस्तावेजों को विस्तार से देखा जाएगा। कोर्ट ने 20,000 पेज की चार्जशीट और नए दाखिल दस्तावेजों पर भी स्पष्टता मांगी है।

दिल्ली पुलिस ने 2020 दिल्ली दंगे में शामिल एक्टिविस्ट उमर खालिद, शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का विरोध किया।

दिल्ली पुलिस ने 2020 दिल्ली दंगे में शामिल एक्टिविस्ट उमर खालिद, शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं का विरोध किया।

20 नवंबरः पुलिस बोली- पढ़े लिखे आतंकी ज्यादा खतरनाक

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (20 नवंबर) को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जब पढ़े-लिखे आतंकवादी बन जाते हैं तो वे ओवरग्राउंड वर्कर्स से ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। पुलिस ने कहा कि डॉक्टरों और इंजीनियरों के लिए देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होना अब एक ट्रेंड बन गया है। ये लोग सरकारी पैसों का इस्तेमाल करके पढ़ाई करते हैं फिर एंटी नेशनल एक्टिविटी में शामिल हो जाते हैं।

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में शरजील इमाम के भड़काऊ भाषणों के वीडियो पेश किए। वीडियो में शरजील इमाम नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देते हुए दिख रहा है।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि इन भाषणों से माहौल बिगड़ा और लोगों को उकसाने का काम हुआ। शरजील इमाम ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान ऐसे भाषण दिए, जिसने हिंसा भड़काने का काम किया। शरजील इमाम इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है।

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को क्या-क्या बताया…

  • दिल्ली दंगे को पूरे भारत में फैलाने की कोशिश की गई थी और इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचना था। आरोपियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत दौरे के समय ही हिंसा भड़काने की योजना बनाई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा जा सके। यह एक साजिश थी।
  • यह एक गहरी, सुनियोजित और सोची-समझी साजिश थी। दंगों में 53 लोगों की मौत हुई, और सैकड़ों करोड़ों रुपयों की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा। इस हिंसा से जुड़े 753 एफआईआर दिल्ली में दर्ज की गईं।
  • पुलिस ने ये भी दावा किया कि जांच के दौरान मिले चैट मैसेज और अन्य डिजिटल सबूतों से पता चला है कि दंगों की योजना केवल दिल्ली तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसे देशभर में फैलाने की कोशिश की गई थी।

जानिए 2020 दिल्ली दंगा केस में कब क्या हुआ…

  • फरवरी 2020: CAA यानी नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के उत्तर-पूर्वी हिस्से में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी, जिसमें 54 लोग मारे गए और 700 से ज्यादा घायल हुए। उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर दंगों का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगा। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और IPC की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
  • अगस्त 2020: शरजील इमाम को गिरफ्तार किया गया।
  • सितंबर 2020: उमर खालिद अरेस्ट हुआ। अन्य आरोपी भी गिरफ्तार हुए।
  • 2022: निचली अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
  • 2022-24: कई आरोपियों ने निचली अदालतों के जमानत खारिज करने के आदेशों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया।
  • 9 जुलाई 2025: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा।
  • 2 सितंबर 2025ः दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम समेत 9 की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
  • 13 अक्टूबर 2025ः शरजील इमाम ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में अंतरिम जमानत की याचिका दायर की।

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