मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर सहायक आबकारी आयुक्त और एसपी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए पूछा है कि किस कानून के तहत एक दुकान को सील किया है। हाईकोर्ट ने दोनों ही अधिकारियों को हलफनामान पर जवाब पेश करने के निर्देश दिए है। सुनवाई को दौरान कोर्ट ने यह भी कहा हा कि जिस दुकान को सील किया गया था, उसे तत्काल खोला जाए। हाईकोर्ट के आदेश पर बुधवार की शाम को आबकारी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे यह कहकर वापस आ गए कि दुकान की चाबी कहां है, इसकी जानकारी नहीं है। मामले पर अगली सुनवाई 11 मई को होगी। जबलपुर निवासी विवेक त्रिपाठी ने हाईकोर्ट मे याचिका दायर करते हुए बताया कि उनकी स्नेह नगर के पास एक दुकान है। 31 मार्च 2026 की रात को आबकारी विभाग की टीम स्थानीय पुलिस के साथ आई, और बिना किसी सूचना और तत्थ के एक तरफा कार्रवाई करते हुए सील कर दिया। दुकान के मालिक विवेक त्रिपाठी ने उनसे पूछा,तो आबकारी उप-निरीक्षक रवि शंकर मरावी, जो अदालत में उपस्थित हुए उन्होंने बताया कि, यह सीलिंग की कार्रवाई आबकारी सहायक आयुक्त संजीव कुमार दुबे के मौखिक आदेशों के तहत की गई थी। कोर्ट ने एफिडेविट दाखिल यह स्पष्ट किया जाए कि ऐसी कार्रवाई किस कानूनी प्रावधान के तहत आदेशित किया गया है, यह बताया जाए। मामले पर जस्टिस दीपक खोत की कोर्ट में जब सुनवाई हुई तो याचिकाकर्ता की और से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने बताया कि दुकान को स्थानीय पुलिस की मदद से आबकारी अधिकारियों के द्वारा सील कर दिया गया है। याचिकाकर्ता का कहना था कि आबकारी अधिकारी और पुलिस ने बिना किसी अधिकार या शो-कॉज नोटिस के, रात में 31.3.2026 को उनकी दुकान को सील कर दिया। बात को प्रमाणित करने के लिए, याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष पेन ड्राइव में CCTV वीडियो फुटेज भी दिए। याचिकाकर्ता की दलील पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से पूछा कि अधिकारियों के द्वारा सीलिंग की कार्रवाई किस कानूनी प्रावधान के तहत की गई थी, तो राज्य के वकील ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि आबकारी अधिनियम या BNSS के अंतर्गत परिसर को सील करने का कोई प्रावधान नहीं है। यह कहा गया कि आबकारी अधिकारियों को सूचना मिली थी कि दुकान एक शराब लाइसेंसी को उनकी दुकान खोलने के लिए दी जा रही है। इसलिए, शिकायतों और कानून-व्यवस्था भंग होने की आशंका के कारण दुकान को सील कर दिया गया। राज्य सरकार की और से यह भी स्वीकार किया गया है, कि सीलिंग संबंधी किसी कानूनी प्रावधान को प्रस्तुत नहीं किया जा सका, इसलिए प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि यदि दुकान अभी तक अनसील (खोली) नहीं गई है तो उसे तुरंत अनसील कर दिया जाए। अनसीलिंग याचिकाकर्ता की उपस्थिति में की जाए। पंचनामा तैयार किया जाए और अनुपालन दिखाने के लिए उसी के साथ एक एफिडेविट इस अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। हाईकोर्ट के आदेश पर बुधवार की शाम को आबकारी विभाग के अधिकारी दुकान को खोलने के लिए पुहंचे तो जरूर पर तीन घंटे तक इसलिए खड़े रहे कि, उनके पास चाबी नहीं थी, जिस पर दुकान मालिक और याचिकाकर्ता ने अपत्ति जाहिर की। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना था कि 1 अप्रैल को मीडिया से जानकारी लगी कि मदनमहल स्थित उनकी दुकान को आबकारी विभाग और पुलिस ने देर रात को बिना किसी सूचना के सील कर दिया है। जानकारी लेने के लिए आबकारी विभाग गए तो वहां पर कुछ नहीं बताया गया। बाद में पता चला कि दुकान के ऊपर एक कोचिंग संचालित होती है, जिसके रसूख में आकर यह कार्रवाई करवाई है। उनका लग रहा था कि यहां पर शराब की दुकान खुलने वाली है, जबकि इस तरह का ठेका नहीं हुआ था। याचिकाकर्ता का कहना है कि किस कानून में लिखा है कि बिना सूचना के किसी के दूकान में ताला लगया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने आबकारी और प्रशासनिक अधिकारियों से इस विषय में चर्चा की, पर जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट की शरण में गए, जहां पर कोर्ट ने कहा कि तत्काल दुकान को खोला जाए। विवके त्रिपाठी ने कहा कि डेढ़ माह से दुकान बंद पड़ी है, अंदर लाइट जल रही है, लाखों रुपए के सामान का नुकसान भी हुआ है, जिसके लिए अलग से कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश पर बुधवार की शाम को आबकारी विभाग में पदस्थ आरएस मरावी और अंकित कुमार जैन दुकान हैंडओवर के लिए पहुंचे, पर तीन घंटे के बाद भी मालिक को कब्जा नहीं दिया गया। आबकारी अधिकारियों ने दलील दी कि अभी उनके पास चाबी नहीं है। मीडिया ने जब आबकारी अधिकारी से बात को तो वह सिर्फ एक ही बात कहते रहे कि दो मिनट,पांच मिनट बात करेगें। विवेक त्रिपाठी ने बताया कि देर रात तक आखिरकार उन्हें चाबी नहीं मिली। कहा गया कि अब गुरुवार को मिल जाएगी। इस पूरी घटना को लेकर याचिकाकर्ता ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए, इस मामले पर अगली सुनवाई के दौरान घनटाक्रम का जिक्र करने की बात भी कही है।
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