अहमदाबाद35 मिनट पहले
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एअर इंडिया की फ्लाइट AI 171 ने 12 जून को दोपहर 1.38 बजे उड़ान भरी थी और 1.40 बजे हादसा हो गया।
अहमदाबाद में 12 जून को हुए एयर इंडिया प्लेन क्रेश के छह महीने बाद भी कई सवालों का जवाब नहीं मिला है। हादसे में मारे गए 130 से ज्यादा परिवारों के वकील और अमेरिका के एविएशन अटॉर्नी माइक एंड्रूज ने भारत सरकार से प्लेन का फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) का डेटा सार्वजनिक करने की मांग दोहराई है। एंड्रूज का कहना है कि डेटा जारी होने से जांच में पारदर्शिता आएगी और प्रभावित परिवार यह तय कर सकेंगे कि कानूनी तौर पर अगला कदम क्या होना चाहिए।
अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद लंदन-गैटविक जा रहा बोइंग 787-8 मेडिकल हॉस्टल कॉम्प्लेक्स पर गिरकर आग की चपेट में आ गया था। दुर्घटना में 242 में से 241 यात्री और चालक दल के सदस्य व जमीन पर 19 लोग मारे गए थे। केवल विश्वास कुमार रमेश जीवित बचे थे।
इलेक्ट्रिकल फॉल्ट की तरफ इशारा माइक एंड्रूज ने इकलौते जीवित यात्री विश्वास कुमार रमेश के इंटरव्यू का हवाला देते हुए कहा कि क्रैश से ठीक पहले विमान के अंदर की लाइटें झपकी थीं और हरी हो गई थीं, जो यह संकेत देती हैं कि विमान ने मुख्य बिजली व्यवस्था से बैकअप सिस्टम में स्विच किया था। उनके मुताबिक यह गंभीर इलेक्ट्रिकल फॉल्ट की तरफ इशारा करता है।
हम पारदर्शिता चाहते हैं- माइक एंड्रूज गुजरात में पीड़ित परिवारों से दोबारा मुलाकात करते हुए एंड्रूज ने कहा भारत सरकार FDR डेटा जारी करे। तभी हमारे विशेषज्ञ स्वतंत्र जांच कर पाएंगे। पीड़ित परिवारों का सबसे बड़ा अधिकार है पारदर्शिता। उन्होंने बताया कि कई बार बोइंग 787 में वॉटर लीकेज के कारण इलेक्ट्रिकल सिस्टम प्रभावित होने की घटनाएं सामने आई हैं। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कहीं इसी वजह से तो यह हादसा नहीं हुआ।

अमेरिका में भी सूचना के अधिकार की अर्जी एंड्रूज ने बताया कि उन्होंने संघीय उड्डयन प्रशासन (एफएए) से जानकारी पाने के लिए फ्रीडम ऑफ इनफार्मेशन एक्ट के तहत अपील की है, क्योंकि माना जा रहा है कि AAIB ने अपनी जांच का कुछ हिस्सा अमेरिका के अधिकारियों के साथ साझा किया है। अमेरिकी वकील अब आणंद, वडोदरा और मुंबई में उन परिवारों से मिलेंगे जिन्होंने कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने की सहमति दी है।
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अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे के इकलौते जीवित बचे विश्वास कुमार रमेश ने कहा, ‘मैं खुद को सबसे भाग्यशाली मानता हूं, लेकिन हर दिन शारीरिक और मानसिक पीड़ा से गुजर रहा हूं।” 39 साल के विश्वास अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट के मलबे से सुरक्षित निकले थे।
उन्होंने बताया, “मैं पत्नी-बेटे से बात नहीं कर पाता। रात में कई बार डरकर उठ जाता हूं।” विश्वास अभी यूके के लेस्टर में अपने परिवार पत्नी और 4 साल के बेटे के साथ रह रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
