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नाटक ने दर्शकों को हंसाते-हंसाते सोचने पर किया मजबूर: राजस्थानी हास्य अंदाज में कलाकारों की रोचक प्रस्तुति, कुलदीप शर्मा ने किया निर्देशन – Jaipur News

नाटक ने दर्शकों को हंसाते-हंसाते सोचने पर किया मजबूर:  राजस्थानी हास्य अंदाज में कलाकारों की रोचक प्रस्तुति, कुलदीप शर्मा ने किया निर्देशन – Jaipur News


रस रंग मंच संस्था की ओर से आयोजित तीन दिवसीय पंचम नाट्यधर्मी रंग महोत्सव का समापन रवींद्र मंच पर हुआ।

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से रस रंग मंच संस्था की ओर से आयोजित तीन दिवसीय पंचम नाट्यधर्मी रंग महोत्सव का समापन रवींद्र मंच पर हुआ। अंतिम दिन आशादर्शन कला संस्था ने वरिष्ठ नाटककार शुभकरण जोशी की ओर से लिखित राजस्थानी हास्य नाटक “गौरी सिनगा

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नाटक का परिकल्पना व निर्देशन कुलदीप शर्मा ने किया, जबकि सहायक निर्देशन में प्रभा शर्मा और संयोजन में हिमांशु झांकल सक्रिय रहे। मंच सज्जा वरिष्ठ सज्जाकार गोपाल शर्मा ने संभाली और प्रकाश परिकल्पना व संचालन शहजोर अली ने किया।

शुभकरण जोशी की ओर से लिखित राजस्थानी हास्य नाटक “गौरी सिनगार करे ढोलो पानी भरे” का मंचन कर दर्शकों को हंसी और व्यंग्य से सराबोर कर दिया।

कहानी एक साधारण सरकारी क्लर्क भाटीजी और उनकी पत्नी सरोज के इर्द-गिर्द घूमती है। सरोज को दिखावे की बीमारी है और वह हर हाल में अपनी झूठी शान बघारने से पीछे नहीं हटती। सहेली पुष्पा के घर आने की खबर पर वह घर को सजाने-संवारने के साथ पति की नौकरी और रूप-रंग को भी बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती है। इतना ही नहीं, वह अपने मुंहबोले देवर को पति और पति को नौकर बना देती है। घटनाक्रम हास्य के साथ आगे बढ़ता है और रिटायर्ड फौजी दादाजी के आगमन पर सारा दिखावा उजागर हो जाता है। अंत में नाटक झूठी शान और आडंबर पर करारा व्यंग्य करते हुए सुखद समापन पर पहुंचता है।

अंत में नाटक झूठी शान और आडंबर पर करारा व्यंग्य करते हुए सुखद समापन पर पहुंचता है।

अंत में नाटक झूठी शान और आडंबर पर करारा व्यंग्य करते हुए सुखद समापन पर पहुंचता है।

कलाकारों ने दमदार अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। नेहा बुटोलिया (सरोज), प्रदीप कुमार (चांदमल भाटी), लोकेश वर्मा (चतरु), रुद्र सोनी (किशोर), हर्षिता वर्मा (कांता सेठ), कुलदीप शर्मा (आर.के. वर्मा), कोमल वर्मा (पुष्पा) और गुरु प्रसाद कुमावत (दादाजी) ने अपने-अपने किरदारों को जीवंत कर दिया। रूप सज्जा केशव गुप्ता और ध्वनि प्रभाव हिमांशु वर्मा का रहा। हास्य के साथ कटाक्ष से भरपूर इस नाटक ने समाज की दिखावा संस्कृति पर गहरा प्रहार किया और दर्शकों से भरपूर सराहना बटोरी।



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