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गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी बाढ़ पीड़ितों को 50 लाख देगी: टीचर्स और कर्मचारियों ने दिया एक दिन का वेतन, राहत कैंप लगाएगी – Amritsar News

गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी बाढ़ पीड़ितों को 50 लाख देगी:  टीचर्स और कर्मचारियों ने दिया एक दिन का वेतन, राहत कैंप लगाएगी – Amritsar News

पंजाब में बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जीएनडीयू) ने बड़ा कदम उठाया है। यूनिवर्सिटी के टीचर्स और कर्मचारियों ने मिलकर लगभग 50 लाख रुपए की राशि जीएनडीयू राहत कोष में जमा करने का निर्णय लिया है। यह राशि स्टाफ और फैक

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इस पहल का नेतृत्व कुलपति प्रो. करमजीत सिंह के दिशा-निर्देश में किया गया है, जबकि रजिस्ट्रार प्रो. के.एस. चहल को पूरे राहत कार्यों का समन्वय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जानकारी के अनुसार, यह निर्णय गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के नॉन-टीचिंग एम्प्लॉइज एसोसिएशन, ऑफिसर्स एसोसिएशन और टीचर्स एसोसिएशन द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया कि यह राशि राहत कोष खाते में जमा कर दी गई है और इसका इस्तेमाल बाढ़ पीड़ितों को जरूरी सामान और पुनर्वास सहायता प्रदान करने में किया जाएगा।

राहत कैंप लगाकर जरूरतमंदों की मदद करेंगे-यूनिवर्सिटी राहत कार्यों के तहत जीएनडीयू ने नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) और नेशनल कैडेट कॉर्प्स (एनसीसी) की विशेष टीमों का गठन किया है। ये टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत कैंप लगाकर जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाएंगी। साथ ही, यूनिवर्सिटी ने मेडिकल टीमों को भी तैयार रखा है ताकि बाढ़ पीड़ितों को दवाइयां और अन्य आपातकालीन सहायता समय पर उपलब्ध करवाई जा सके।

इस बीच, एनएसएस स्वयंसेवकों और यूनिवर्सिटी के गुरुद्वारा साहिब के सदस्यों की संयुक्त टीम ने डेरा बाबा नानक और रामदास के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान टीम ने स्थानीय निवासियों से मुलाकात कर उनकी जरूरतों का आकलन किया। ग्रामीणों ने टीम को बताया कि उन्हें फिलहाल राशन किट, साफ पीने का पानी, दवाइयां और अस्थायी आश्रय की सख्त जरूरत है।

कुलपति प्रो. करमजीत सिंह ने कहा कि यह समय एकजुट होकर अपने भाई-बहनों का साथ देने का है। जीएनडीयू पंजाब के लोगों की हर संभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है। हमें मिलकर इस मुश्किल घड़ी को पार करना होगा। वहीं रजिस्ट्रार प्रो. के.एस. चहल ने कहा कि राहत कार्य पूरी पारदर्शिता और तत्परता के साथ किए जाएंगे। इसके लिए विशेष समन्वयक नियुक्त किया गया है, जो राहत कैंपों और मेडिकल सेवाओं की निगरानी करेगा।



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