बगहा जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्र की अदालत में बुधवार को चौतरवा थाने में तैनात रह चुके सेवानिवृत्त डीएसपी विजय झा ने पेश होकर गवाही दर्ज कराई। यह गवाही 23 साल पुराने चर्चित अपहरण मामले से जुड़ी है।
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विजय झा लंबे समय से अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे थे। इस पर कोर्ट ने कठोर रुख अपनाते हुए पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया था कि संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर हर हाल में न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।
अभियोजन पक्ष की दलील
अभियोजन ने अदालत को बताया कि आधा दर्जन से अधिक हत्या और अपहरण के मामलों में जेल में बंद कुख्यात दस्यु सरगना राधा यादव यदि साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त हो जाता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी जिला अभियोजन की होगी।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया और कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
2002 का मामला
यह कांड 3 अगस्त 2002 का है। चौतरवा थाने के चन्द्रपुर बकवा निवासी सुधीर कुमार शुक्ल, पिता जनार्दन शुक्ल का अपहरण राधा यादव और उसके लगभग एक दर्जन साथियों ने कर लिया था। इस संबंध में चौतरवा थाना कांड संख्या 74/02 दर्ज किया गया था।
स्पीडी ट्रायल के तहत इस मामले में सुनवाई जारी है। अब तक कुल 9 गवाहों में से 7 की गवाही पूरी हो चुकी है।
दो दारोगाओं पर वारंट
कांड के अनुसंधानक दारोगा बीके झा और दारोगा आरके झा की गवाही अब तक लंबित है। इन दोनों गवाहों को गवाही के लिए 11 साल पहले वारंट निर्गत हो चुका था, लेकिन अदालत में पेश नहीं किया गया। हाल ही में अदालत ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर उन्हें 2 सितंबर को हर हाल में पेश करने का आदेश दिया।
राधा यादव पर 20 से अधिक मामले
कुख्यात राधा यादव पर जिले के विभिन्न थानों में अपहरण, हत्या और लूट के 20 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि इस मुकदमे की सुनवाई में अब किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं होगी।
