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छत्तीसगढ़ में मौसम की विदाई होगी 15 अक्टूबर के बाद: मानसून की द्रोणिका जैसलमेर-पेंड्रा होकर बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय, प्रदेश में अब तक 86 प्रतिशत बारिश; आज छाए रहेंगे बादल – Raipur News

छत्तीसगढ़ में मौसम की विदाई होगी 15 अक्टूबर के बाद:  मानसून की द्रोणिका जैसलमेर-पेंड्रा होकर बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय, प्रदेश में अब तक 86 प्रतिशत बारिश; आज छाए रहेंगे बादल – Raipur News


छत्तीसगढ़ में इस साल मानसून सामान्य से बेहतर सक्रिय रहा है। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि प्रदेश से मानसून की विदाई 15 अक्टूबर के बाद ही शुरू होगी। यानी सितंबर के अंत और अक्टूबर की शुरुआत तक बारिश का दौर जारी रह सकता है।

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छत्तीसगढ़ में इस बार औसतन से अधिक बारिश होने के आसार जताए गए हैं।

इस बार औसतन से अधिक बारिश होने के आसार जताए गए हैं। 6 सितंबर तक प्रदेश में मानसून का 86 प्रतिशत कोटा पूरा हो चुका है। सामान्य औसत 1143.3 मिमी बारिश होती है, जबकि अब तक 977.9 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की द्रोणिका (ट्रफ लाइन) इस समय जैसलमेर से होते हुए पेंड्रा रोड, दमोह, गुना, संबलपुर और गोपालपुर होकर बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय है। इससे प्रदेश में बारिश की गतिविधियां जारी हैं। हालांकि पिछले 24 घंटों में वर्षा की तीव्रता थोड़ी कम हुई है और कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दिक्कत अभी बरकरार

पिछले हफ्ते उत्तरी और दक्षिणी छत्तीसगढ़ में भारी से अतिभारी वर्षा हुई। कोरबा जिले में बांध टूटने से कई गांव डूब गए। नदियां-नाले उफान पर आ गए और बाढ़ जैसे हालात बन गए। प्रशासन को राहत और बचाव कार्य चलाना पड़ा। फिलहाल स्थिति सामान्य की ओर बढ़ रही है, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दिक्कतें अब भी बरकरार हैं।

राजधानी रायपुर में भी हल्की वर्षा हुई और आसमान सामान्यतः बादलों से घिरा रहा।

राजधानी रायपुर में भी हल्की वर्षा हुई और आसमान सामान्यतः बादलों से घिरा रहा।

दंतेवाड़ा-तखतपुर में 20-20 मिली बारिश

पिछले 24 घंटों में दंतेवाड़ा, बास्तानार, बेलरगांव, मैनपुर, भानपुरी और तखतपुर में 20-20 मिमी बारशि हुई। इसके अलावा बीजापुर और दुर्गकोंदल में एक-एक सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। राजधानी रायपुर में भी हल्की वर्षा हुई और आसमान सामान्यतः बादलों से घिरा रहा।

सबसे ज्यादा रहेगा रायपुर का तापमान

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। वहीं रायपुर शहर का तापमान 35 डिग्री अधिकतम और 25 डिग्री न्यूनतम रहने का अनुमान है।

शहर

अधिकतम तापमान

न्यूनतम तापमान

रायपुर

33.9

25.1

बिलासपुर

32.6

25.6

पेंड्रा रोड़

32.2

21.8

अंबिकापुर

32.0

23.0

जगदलपुर

29.6

23.6

दुर्ग

34.4

21.0

बस्तर में 200 से अधिक मकान ढहे, 5 की मौत

बस्तर संभाग में पिछले दिनों हुई तेज बारिश और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर जिलों में अब तक 200 से ज्यादा घर ढह चुके हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। करीब 2196 लोगों को स्कूलों, इंडोर स्टेडियम और आश्रमों में बनाए गए राहत शिविरों में ठहराया गया है।

बारिश और बाढ़ से अब तक 5 लोगों की जान जा चुकी है। हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन बाढ़ के बाद की तस्वीरें भयावह स्थिति दिखा रही हैं। बारसूर में स्टेट हाईवे-5 पर बना पुल बाढ़ में बह गया। पुल टूटने से आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है।

लो प्रेशर एरिया क्या होता है?

जब किसी जगह का वायुदाब आसपास की जगहों की तुलना में कम हो जाता है, तो उसे लो प्रेशर एरिया कहा जाता है। आमतौर पर यह तब बनता है जब जमीन या समुद्र की सतह बहुत गर्म हो जाती है। ज्यादा तापमान से हवा हल्की होकर ऊपर उठने लगती है। ऊपर जाने के बाद नीचे सतह पर दबाव कम हो जाता है और वह इलाका लो प्रेशर जोन में बदल जाता है।

ऐसे समय पर आसपास की ठंडी हवा उस जगह की ओर खिंचती है। ऊपर पहुंचने पर हवा ठंडी होकर संघनित होती है और बादलों व बारिश का कारण बनती है। यही कारण है कि समुद्र पर बने लो प्रेशर एरिया कई बार गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) या चक्रवात (Cyclone) में भी बदल जाते हैं।

भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश ज्यादातर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने लो प्रेशर सिस्टम से होती है। उदाहरण के लिए, यदि बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर बनता है तो वह मानसून द्रोणिका से जुड़कर ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और यूपी तक अच्छी बारिश करवा देता है। अगर यह और मजबूत हो जाए तो यह डीप डिप्रेशन और फिर साइक्लोन का रूप ले सकता है।

फिलहाल ग्रामीण टूटे पुल पर सीढ़ियां बांधकर आने-जाने को मजबूर हैं। गौरतलब है कि नारायणपुर, बस्तर और बीजापुर के 55 से 60 गांवों के लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बारसूर के साप्ताहिक बाजार पर निर्भर रहते हैं। पुल टूटने से अब इन ग्रामीणों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं।



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