11 सितंबर को काठमांडू में आर्मी हेडक्वार्टर पर नेपाली सेना और GenZ प्रदर्शनकारियों के बीच दूसरे दौर की बातचीत होनी थी। इसी में अंतरिम सरकार के मुखिया का नाम तय होना था। एक के बाद एक GenZ ग्रुप्स आर्मी हेडक्वार्टर पहुंचने लगे। तभी इनमें से कुछ गुटों क
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नेपाल में तख्तापलट हुए 3 दिन बीत चुके हैं। अब भी तय नहीं हो सका है कि नेपाल की अंतरिम सरकार का मुखिया कौन होगा और सरकार का स्वरूप क्या होगा। GenZ करीब 10 अलग-अलग गुटों में बंटे हुए हैं। सबकी अपनी दावेदारियां हैं। कुछ गुटों का आरोप है कि सेना ने बातचीत के लिए बुलाया लेकिन हेडक्वार्टर के अंदर नहीं जाने दिया।
कुछ इस बात से नाराज हैं कि सेना ने बातचीत में राजनीतिक पार्टियों को क्यों बुला लिया। वहीं, सेना के लिए ये तय करना मुश्किल हो गया है कि वो प्रदर्शनकारियों के इतने गुटों में से किससे बात करे।
GenZ प्रदर्शनकारियों के सभी गुट सिर्फ काठमांडू के मेयर बालेन शाह के नाम पर एकमत हैं, लेकिन बालेन खुद मुखिया नहीं बनना चाहते। वहीं नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए बढ़ाया गया था लेकिन सहमति नहीं बनी क्योंकि GenZ युवा PM चाहते हैं।
काठमांडू में आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर दोनों गुटों में हाथापाई हो गई। इसमें कई युवक घायल भी हुए।
दैनिक भास्कर ने काठमांडू में GenZ के अलग-अलग गुटों से बात कर समझने की कोशिश की कि आखिर अंतरिम सरकार का मुखिया चुनने में दिक्कत कहां आ रही है। साथ हमने नेपाल में अपने सोर्स से भी पूरा मामला समझने की कोशिश की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सबसे पहले जानिए लीडरशिप को लेकर कन्फ्यूजन क्यों… अंतरिम सरकार बनाने में बढ़ रहा गतिरोध, सहमति नहीं बन रही नेपाल की राजधानी काठमांडू में सेना ने मोर्चा संभाल रखा है। चप्पे-चप्पे पर आर्मी की तैनाती है। दिन भर पूरे शहर पर कर्फ्यू लगा रहा। शाम को सिर्फ 2 घंटे कर्फ्यू में ढील दी गई। सेना कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने में जुटी हुई है। आने-जाने वाले हर शख्स की तलाशी ली जा रही है। वहीं लूटे गए हथियार लोगों से सरेंडर करने की अपील की जा रही है।
नेपाल में GenZ प्रोटेस्ट, तोड़फोड़ और आगजनी के बाद अब अंतरिम सरकार बनाने में भी दिक्कत आ रही है। GenZ प्रदर्शनकारियों के बीच किसी भी नाम को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। 11 सितंबर को आर्मी हेडक्वार्टर में दूसरे दौर की बातचीत के लिए GenZ लीडर्स, सेना और अंतरिम सरकार के संभावित लीडर्स जुटे। हालांकि, हेडक्वार्टर के बाहर ही GenZ युवाओं के बीच लड़ाई-झगड़े शुरू हो गए।
10 सितंबर को नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की का नाम अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर चला था, लेकिन इस पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई। क्योंकि सभी इसे लेकर सहमत नहीं दिखे। दरअसल GenZ युवाओं को लीड करने वाला कोई चेहरा या डेलिगेशन अब तक नहीं बन सका है। इसकी वजह से आर्मी को भी बातचीत आगे बढ़ाने में दिक्कत आ रही है।

प्रदर्शनकारियों के एक गुट ने अंतरिम PM के लिए सुशीला कार्की के नाम को खारिज कर दिया है। गुट का आरोप है कि सुशीला कार्की भारत समर्थक हैं और उन्हें ये स्वीकार नहीं हैं।
अब तक देश का लीडर चुनना तो दूर की बात है, नई सरकार की व्यवस्था क्या होगी इसे लेकर भी सहमति नहीं बन सकी है।
इन 3 पॉइंट्स में समझिए दिक्कत कहां आ रही… 1. आर्मी चीफ का मानना है कि काठमांडू के मेयर बालेन शाह जो बोलेंगे, वही होगा। बालेन शाह ने कहा है कि संसद भंग हो, लेकिन इसे लेकर एकराय नहीं है।
2. GenZ के कुछ ग्रुप्स चाहते हैं कि संविधान और संसद की मौजूदा व्यवस्था में ही सरकार का गठन हो और राष्ट्रपति इसका नेतृत्व करें।
3. नेपाल की सभी प्रमुख पॉलिटिकल पार्टियों ने ऐलान किया कि वो संसद भंग नहीं करना चाहते और मौजूदा सिस्टम में ही नई सरकार का गठन करना चाहते हैं।
हमारे सोर्स के मुताबिक, 10 सितंबर की रात सेना ने GenZ लीडर्स को कहा कि वो अपनी दावेदारी पेश करें। GenZ प्रदर्शनकारियों के 10 से ज्यादा गुट अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में नेपाली आर्मी के सामने भी चुनौती है कि वो किससे बात करें और किसकी अनदेखी करे। जिसे चर्चा में शामिल नहीं किया जा रहा है, वो गुट लड़ाई-झगड़े और हंगामा कर रहे हैं।

GenZ लीडर्स के कई गुटों का ये भी आरोप है कि नेपाल का नया मुखिया चुनने में बाहरी शक्तियां भी एक्टिव हैं, जो उन्हें स्वीकार नहीं है।
GenZ लीडर्स सेना के रोल पर सवाल उठा रहे आर्मी हेडक्वार्टर के बाहर दावेदारी जताने वाले GenZ लीडर्स ने बताया कि आर्मी उन्हें अंदर नहीं जाने दे रही, न ही बातचीत में शामिल कर रही है। इनमें से पहचान जाहिर न करने की शर्त पर एक लीडर ने बताया, ‘आर्मी ने ही हमसे यहां आने के लिए कहा था, लेकिन अब वही हमें अंदर नहीं जाने दे रही है। अगर ऐसा ही होगा तो हमें आर्मी की सरकार बनाने की प्रक्रिया पर भरोसा नहीं रहेगा।’
GenZ की पोस्टर गर्ल तनुजा पांडे और रक्षा बम कहती हैं, ‘आर्मी ने बातचीत करने के लिए पहले हमें बुलाया था। अब इस बातचीत में राजावादी नेता दुर्गा प्रसाई और RSP (राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी) के नेताओं को बुला लिया। इसे लेकर हम नाराज हैं। हम अब आर्मी चीफ से बात नहीं करेंगे। हम सिर्फ राष्ट्रपति से बात करेंगे और ये बातचीत राष्ट्रपति भवन में होनी चाहिए।’
रक्षा आगे कहती हैं, ‘जब हम आर्मी हेडक्वार्टर पहुंचे तो आर्मी चीफ ने बताया कि दुर्गा प्रसाई और RSP से भी इसे लेकर बातचीत करनी चाहिए। हमने इससे इनकार कर दिया है।’

‘संसद भवन जल गया लेकिन संविधान जिंदा है’ वहीं GenZ लीडर तनुजा पांडे कहती हैं, ‘हम संविधान और मौजूदा लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत ही सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। अब अंतरिम सरकार के लिए बातचीत आर्मी चीफ से नहीं बल्कि राष्ट्रपति से होगी। आर्मी का काम सुरक्षा और शांति बहाल करना है, वो वही करें। किसी भी सरकार को बनाने और गिराने में हमें आर्मी की भूमिका मंजूर नहीं।’
सेना को बताना चाहिए कि राष्ट्रपति कहां हैं और इस चर्चा में राष्ट्रपति को शामिल करना चाहिए। हम संसद का विघटन स्वीकार नहीं करेंगे। नई सरकार मौजूदा संविधान के दायरे में ही बनाई जानी चाहिए। हम संविधान की रक्षा करेंगे और यही सर्वोच्च है।

GenZ लीडर की मांग- राजशाही की वापसी हो इधर GenZ लीडर्स में से एक रवि किरण अमाल राजशाही के समर्थक हैं। वे GenZ स्टूडेंट कोऑर्डिनेटर हैं और राजशाही समर्थक पार्टी राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) के केंद्रीय सदस्य भी हैं। रवि को GenZ प्रोटेस्ट के दौरान संसद में घुसपैठ के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 9 सितंबर को तख्तापलट के साथ रिहा कर दिया गया। वे राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।
एक GenZ नेता ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि हमारी मांग है कि बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनना जाए। अगर वो PM नहीं बनते तो हर्क सामपांग को अंतरिम सरकार का प्रधानमंत्री बनना चाहिए।
GenZ लीडर्स के ग्रुप से अलग राजनीतिक पार्टियों की स्टूडेंट्स यूनिट ने भी प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि संसद को भंग नहीं किया जाना चाहिए और संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत ही नई सरकार का गठन होना चाहिए।

अब जानिए PM पद की रेस में कौन-कौन से नाम…
1. बालेन शाह, काठमांडू के मेयर अगर बालेन शाह अंतरिम सरकार का मुखिया बनने का ऐलान कर देते हैं तो GenZ के बीच कोई गतिरोध नहीं रह जाएगा। ज्यादातर गुट उनकी लीडरशिप मंजूर कर लेंगे।
हमारे सोर्स ने बताया कि बालेन शाह खुद अंतरिम सरकार का मुखिया नहीं बनना चाहते बल्कि उन्होंने सुशीला कार्की का नाम आगे बढ़ाया था। बालेन अंतरिम सरकार के बाद चुनाव लड़कर पूर्णरूप से प्रधानमंत्री बनने का विचार कर रहे हैं। उनकी मांग है कि मौजूदा संसद भंग की जाए और नई शासन व्यवस्था बनाई जाए।

बालेन शाह 8 सितंबर को नेपाल में हुए GenZ प्रोटेस्ट को लेकर भी चर्चा में रहे। इस प्रोटेस्ट के पीछे उनकी सोशल मीडिया पोस्ट भी बड़ी वजह बताई जा रही है।
2. सुशीला कार्की, पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की की छवि एक ईमानदार जज की रही है और उनको लेकर काफी सहमति भी है। सबसे बड़ी बात जो उनके पक्ष में जाती है कि खुद बालेन शाह ने उनका समर्थन किया है। हालांकि सुशीला के नाम पर GenZ गुटों में पूरी तरह सहमति नहीं दिख रही। कई मतभेद भी हैं।
GenZ का कहना है कि या तो बालेन खुद PM बनें या फिर कोई युवा GenZ को ही बागडोर संभालनी चाहिए। सुशीला पर असहमति की दूसरी वजह ये है कि उन्हें भारत की तरफ झुकाव रखने वाली शख्सियत के तौर पर देखा जा रहा है। इसके चलते भी उन्हें लेकर सहमति नहीं बन पा रही।

3. हर्क सामपांग, धरान के मेयर हर्क धरान से निर्दलीय मेयर हैं। उन्होंने मेयर बनने के बाद श्रमदान का एक अभिनव प्रयोग किया, जिसकी वजह से उन्हें नेपाल में पहचान मिली और वो युवाओं के बीच मशहूर चेहरा बन गए। हर्क को लेकर भी GenZ के बीच अच्छा समर्थन है, लेकिन उन्हें बालेन शाह का समर्थन हासिल नहीं है और यही बात उनके खिलाफ जाती है।
हर्क धरान से आए अपने समर्थकों के साथ काठमांडू में डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने आर्मी चीफ से भी मुलाकात की है, लेकिन उनके पक्ष में एकमत राय बनती नहीं दिख रही है। हमने आर्मी हेडक्वार्टर्स के बाहर उनसे बातचीत भी की। हालांकि वो ज्यादातर सवालों के जवाब देने से बचते रहे। उन्होंने मुस्कुराकर बस इतना कहा कि बातचीत चल रही है। देखते हैं क्या होता है।

4. कुलमान घिसिंग, इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के पूर्व चीफ पेशे से इंजीनियर रहे कुलमान अपनी साफ सुथरी छवि की वजह से नेपाल में मशहूर हैं। उन्हें नाइट मैन कहा जाता है। नेपाल में लो शेडिंग बड़ी दिक्कत थी, लेकिन कुलमान के इलेक्टिसिटी बोर्ड का जिम्मा संभालने के बाद नेपाल में बिजली समस्या का स्थायी समाधान निकला। इसकी वजह से उनकी लोगों के बीच लोकप्रियता बढ़ी। लेकिन उनके लिए जनता की दीवानगी तब और ज्यादा बढ़ गई जब पूर्व PM केपी ओली ने उन्हें पद से हटा दिया था।

5. सुदन गुरंग, इंजीनियर और सोशल एक्टिविस्ट सुदन गुरंग नॉन रेसिडेंट नेपाली हैं। उनका नाम भी अंतरिम प्रधानमंत्री की रेस में शामिल है। वे हामी नेपाल नाम से संगठन चलाते हैं। इस संगठन के लिए वो विदेश में रहने वाले नेपालियों से मदद लेकर अभियान चलाते हैं। उनके संगठन ने कोविड के दौर में नेपाल में काफी सोशल वर्क किया था।
सुदन ने GenZ प्रोटेस्ट को मोबलाइज करने का काम किया। वो युवाओं के बीच काफी मशहूर हैं, लेकिन लीडरशिप को लेकर उनके नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है।

क्या बालेन के पास सत्ता की चाबी नेपाल में अंतरिम सरकार की सत्ता चाबी सिर्फ काठमांडू के मेयर और युवा लीडर बालेन शाह के पास है। वो अगर खुद अंतरिम सरकार में PM बनने की दावेदारी पेश करते हैं तो उनके नाम पर GenZ के बीच सहमति बन जाएगी। लेकिन वो मौजूदा शासन व्यवस्था और संविधान को खत्म कर संविधान में व्यापक पैमाने पर बदलाव की मांग कर रहे हैं।
उनकी सबसे बड़ी मांग प्रत्यक्ष चुनाव की है। वहीं बाकी सियासी पार्टियां इसके लिए तैयार नहीं है। इसी की वजह से गतिरोध जारी है और वक्त बीतने के साथ ये गतिरोध बढ़ता जा रहा है।

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नेपाल से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़िए…
पूर्व PM-वित्त मंत्री को पीटा, संसद-सुप्रीम कोर्ट जलाए, लोग बोले- हमारी सरकार करप्ट गैंग

नेपाल की संसद, सुप्रीम कोर्ट, पॉलिटिकल पार्टियों के ऑफिस, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री-मंत्रियों के घर और सबसे खास काठमांडू का सिंह दरबार, सब एक दिन में जल गया। पूरे काठमांडू के आसमान में काला धुआं दिख रहा है। पूर्व PM झालानाथ खनाल की पत्नी को जिंदा जला दिया गया। 20 से 25 साल के लड़के-लड़कियां सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं। इनका कहना है कि हमारी सरकार करप्ट है। पढ़िए पूरी खबर…
