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कुरुक्षेत्र में धीरेंद्र शास्त्री की तरह पर्चा निकालेंगे संत रुद्रेश्वर: कथा में नाम-पते, गाड़ी-आधार नंबर से बुलाएंगे; बोले- आरोप लगने पर शुरू किया – Kurukshetra News

कुरुक्षेत्र में धीरेंद्र शास्त्री की तरह पर्चा निकालेंगे संत रुद्रेश्वर:  कथा में नाम-पते, गाड़ी-आधार नंबर से बुलाएंगे; बोले- आरोप लगने पर शुरू किया – Kurukshetra News


संत रुद्रेश्वर धीरेंद्र शास्त्री की तरह दरबार में पर्चा निकालते हैं।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पितरों को समर्पित 7 दिवसीय श्री हनुमंत कथा मंगलवार से शुरू होगी। इसमें रामभक्त हनुमान का दिव्य दरबार भी लगेगा। जिसमें बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री की तर्ज पर कथा व्यास संत रुद्रेश्वर पर्चा भी निकालेंगे। कथा व्य

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पिहोवा के पंचदशनाम जून अखाड़ा के दशनामी डेरा (टोपियों वाला मंदिर) में पहली बार सात दिवसीय हनुमंत कथा का आयोजन हो रहा है। इसमें कानपुर (यूपी) के वीरेश्वर धाम के संत रुद्रेश्वर हनुमानजी का दिव्य दरबार लगाएंगे। वे कथा करने के साथ पर्चे में लोगों के सवालों के जवाब भी देंगे। संत रुद्रेश्वर का दावा है कि वे लोगों के पूछे बगैर ही पर्ची में उनके सवाल लिखेंगे।

पत्रकारों से बातचीत करते महंत दीपेश्वर गिरी (दाएं से दूसरे) और संत रुद्रेश्वर (बाएं से दूसरे)।

संत रुद्रेश्वर की अहम बातें…

  • आरोप लगे तो गुरु के कहने पर पर्चा निकाला: दैनिक भास्कर एप से बातचीत में संत रुद्रेश्वर ने बताया- 2019 से पर्चा निकालना शुरू किया। पहले बगैर पर्चा निकाले ही लोगों के सवाल और समाधान करते थे, लेकिन कई लोगों ने सवाल बदलने के आरोप लगाए। तब मेरे गुरु दिगंबर अजब आनंद गिरी ने पर्चा निकालने की प्रेरणा दी। उन्हें दिगंबर अजब आनंद पुरी (ओम जय बैरन दरबार) से मिलकर हनुमानजी की 3 साधनाएं मिलीं। उन्होंने करीब 2 साल तक उन साधनाओं को किया।
  • कुरुक्षेत्र में दूसरी बार लगा दरबार: उन्होंने बताया कि वीरेश्वर धाम में हर मंगलवार और शनिवार को कथा आयोजित होती है। लोग हनुमानजी के दरबार में अपनी मनोकामना लेकर आते हैं। उनकी अर्जी भी स्वीकार हो जाती है। अगर कोई 40 दिनों तक बताए गए उपाय करते हैं, तो फायदा होता है। संत रुद्रेश्वर बताते हैं कि वे कानपुर, मध्य प्रदेश के छतरपुर, राजस्थान के भीलवाड़ा और जयपुर, महाराष्ट्र में दरबार लगा चुके हैं। कुरुक्षेत्र के बाद पिहोवा में यह दूसरा दरबार है।
  • धीरेंद्र शास्त्री को फॉलो करते हैं: संत रुद्रेश्वर ने आगे कहा कि वे धीरेंद्र शास्त्री को फॉलो करते हैं। उनसे अच्छी चीजें सीखने को मिलती हैं। वे अनुभवी हैं और हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त है। वे उनके बड़े भाई के समान है। हमारे यहां पिता-पुत्र की नहीं बल्कि गुरु-शिष्य की परंपरा है। इसलिए लव-कुश का मंदिर नहीं है और हनुमान जी लाखों मंदिर हैं। वे अपनी कथा में बागेश्वर सरकार के जयकारा भी लगवाते हैं।
  • बचपन में बंदर झपटा तो मिली प्रेरणा: संत रुद्रेश्वर ने बताया कि ब्राह्मण परिवार में उनका जन्म हुआ है। वे माता-पिता के इकलौते बेटे हैं। उनकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। उनके पिता रामकुमार पंडिताई करते हैं और माता सुनीता गृहिणी हैं। बचपन में उनको सपने दिखाई देते थे कि बंदर उन पर झपट रहे हैं। तब कानपुर में ही एक संत ने उनके माता-पिता को उनके जीवन के उद्देश्य के बारे में बता दिया। उन्होंने मध्य प्रदेश के छतरपुर के महर्षि वेद विद्या मंदिर से आचार्य की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने ज्योतिषी और व्याकरण से आचार्य किया है। इसके अलावा यूपी बोर्ड से MA कर रहे हैं।
दरबार में आए श्रद्धालु के सवाल का जबाव देते संत रुद्रेश्वर।

दरबार में आए श्रद्धालु के सवाल का जबाव देते संत रुद्रेश्वर।

पितरों काे समर्पित हनुमंत कथा दशनामी डेरे के महंत दीपेश्वर गिरी ने बताया कि पंचदशनाम जूना अखाड़ा के संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरी और वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेम गिरी के सानिध्य में दशनामी डेरे में पहली बार हनुमंत कथा का आयोजन हो रहा है। यह पितरों के मोक्ष को समर्पित कथा है। अभी पितृ पक्ष चल रहा है। यहां मंदिर में श्राद्ध देव की पूजा करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।

दशनामी डेरे के महंत दीपेश्वर गिरी।

दशनामी डेरे के महंत दीपेश्वर गिरी।

हरियाणा में बागेश्वर बाबा 2 साल में 5 बार आए, पर्चा नहीं पढ़ा मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेंद्र शास्त्री पिछले 2 साल में 5 बार हरियाणा आ चुके हैं। उन्होंने दो बार पानीपत और एक-एक बार कुरुक्षेत्र, पंचकूला और सिरसा में कथा की। हालांकि इस दौरान उन्होंने पर्चा नहीं पढ़ा। इसी साल मई में पानीपत में 3 दिन दरबार लगा, तब पर्चा पढ़ने के प्रचार किया गया, हालांकि हुआ नहीं।

पानीपत में कहा था- पर्चे के चक्कर में आई भीड़, हमने बालाजी की चर्चा पकड़ाई करीब दो साल पहले पंडित धीरेंद्र शास्त्री पानीपत में दरबार सजाने आए। तब मौके पर पहुंची भीड़ को देख कर कहा कि तुम सब यहां पर्चा के चक्कर में आए थे कि गुरु जी पर्चा बनाएंगे और बाप का नाम बताएंगे, लेकिन हम तुमसे ज्यादा बदमाश निकले। तुम पर्चा के चक्कर में आए और हमने बाला जी की चर्चा पकड़ा दी, क्योंकि पर्चा से कुछ लोगों का भला होना है और हनुमान जी से सभी का भला होगा।

2 साल पहले पानीपत में कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों को पानीपत के पागलो कहा था। (फाइल)

2 साल पहले पानीपत में कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों को पानीपत के पागलो कहा था। (फाइल)

पानीपत के पागलो कहने पर विवाद हुआ धीरेंद्र शास्त्री जब पानीपत में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो यहां लोगों की भीड़ बहुत ज्यादा होने की वजह उनकी गाड़ी मंच तक नहीं पहुंच पाई थी। गाड़ी मुड़ नहीं रही थी। इसीलिए धीरेंद्र शास्त्री ने माइक लेकर कहा था कि अरे मेरे पानीपत के पागलो, मुझे ये पता होता कि तुम यहां इतनी देर से इंतजार कर रहे हो, तो मैं और समय से आने की कोशिश करता, लेकिन मैं समय पर ही निकला था। रास्ते भर में पानीपत के पागलो ने इतनी जगह पर ठहराव करवाया कि मुझे यहां तक आने में देरी हुई। धीरेंद्र शास्त्री के पागलो कहने पर विवाद हुआ था और किसान संगठनों ने विरोध जताया था।

लोकसभा चुनाव में जिंदल ने कुरुक्षेत्र, विस चुनाव में कांडा ने सिरसा बुलाया लोकसभा चुनाव के दौरान मई 2024 में सांसद नवीन जिंदल ने कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर पर बागेश्वर धाम सरकार की 3 दिवसीय कथा करवाई थी। इसी दौरान पंचकूला में भी बाबा की कथा हुई। उसके बाद विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर में हरियाणा लोकहित पार्टी के गोपाल कांडा ने सिरसा की तारा बाबा कुटिया में 5 दिवसीय कथा करवाई थी।



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