अजनाला के खेतों में किसानों के साथ रेत निकालते हुए विधायक कुलदीप धालीवाल ट्रैक्टर पर चढ़े दिखाई दिए।
पंजाब सरकार की ‘जिसका खेत उसकी रेत’ पॉलिसी बाढ़ प्रभावित इलाकों में किसानों को आर्थिक मदद देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन अब यह विवादों में घिर गई है।
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कैबिनेट मंत्री और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि कुछ लोग झूठी अफवाह फैला रहे हैं कि सरकार खनन करवा रही है।
उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि “सीएम मान साहब की विनती पर योजना शुरू हुई। अब बाढ़ पीड़ित किसान अपने खेतों से रेत निकालकर बेचकर थोड़ा आर्थिक नुकसान कम कर रहे हैं।”
न कोई सरकारी प्रतिनिधि न राहत सामग्री दी दूसरी ओर, किसानों का आरोप है कि सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में न तो कोई सरकारी प्रतिनिधि आया और न राहत सामग्री दी गई।
उनका कहना है कि “सरकार दरिया से निकली रेत पर अधिकार जता रही है, लेकिन हमें मुआवजा देने में हमेशा नाकाम रही है। इससे हमारी परेशानियां बढ़ गई हैं।”
सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की। कमेटी ने कहा कि किसानों की जमीन बचाने और खेती योग्य बनाने के लिए राहत कार्य शुरू किए जाएं, साथ ही धार्मिक और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे अस्थायी पुल बनाने में मदद करें, ताकि ट्रैक्टर और मशीनों की मदद से रेत हटाकर खेती फिर से शुरू की जा सके।
सरकार इस पॉलिसी को किसान हितैषी बता रही है, जबकि किसान इसे प्रभावी राहत की बजाय केवल बयानबाजी मान रहे हैं। अब यह देखना बाकी है कि यह पॉलिसी किसानों के लिए राहत बनेगी या नया विवाद खड़ा करेगी।
