अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर को लेकर बीते 10 दिनों में दो बड़ी घोषणाएं हुई हैं। पहली, मंदिर के निर्माण कार्य की डेडलाइन दिसंबर 2025 से आगे बढ़ाकर मार्च 2026 कर दी गई। दूसरी, रामलला जन्मभूमि मंदिर का ‘ध्वजारोहण उत्सव’ 25 नवंबर को मनाया जाएगा। इस
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विपक्ष इसे BJP की मंदिर पॉलिटिक्स का हिस्सा बता रहा है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि BJP ‘ध्वजारोहण कार्यक्रम’ के जरिए बिहार चुनाव में फुल नंबर लेना चाह रही है। हालांकि उसका ये नैरेटिव लोकसभा चुनाव की तरह बैक फायर कर जाएगा।
क्या वाकई राम मंदिर के इस खास कार्यक्रम के पीछे बिहार चुनाव की तारीख छिपी हुई है? पहले सीतामढ़ी में माता सीता के मंदिर का भूमिपूजन और अब नवंबर में राम मंदिर का ध्वजारोहण कार्यक्रम क्या सिर्फ एक संयोग है या फिर इन कार्यक्रमों का एक सिरा बिहार चुनाव से भी जुड़ता है? ये जानने के लिए हमने राम मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों, पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स और नेताओं से बात की।
सबसे पहले ‘ध्वजारोहण उत्सव’ के बारे में जानते हैं, जिस पर UP में राजनीति गर्म है… ‘समरस समाज’ थीम पर प्रोग्राम, जहां जाति-धर्म का कोई बंधन नहीं अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को नवनिर्मित राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की नई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद से ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट यहां की देखरेख और मंदिर में होने वाले कार्यक्रमों की तारीख तय करता है। इसके लिए हर 4 महीने पर ट्रस्ट बैठक करती है, जिसमें बड़ी घोषणाएं की जाती हैं।
8 सितंबर को अयोध्या के मणिराम छावनी मठ में ट्रस्ट की बैठक हुई। इसमें चंपत राय समेत ट्रस्ट के 9 सदस्य और मन्दिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र शामिल हुए थे।
बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि रामलला के जन्मभूमि मंदिर पर ध्वजारोहण का भव्य उत्सव 25 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा। ये एक तरीके से जन्मभूमि मंदिर का फाइनल उद्घाटन होगा। इसकी थीम ‘समरस समाज’ होगी। समरस समाज यानी ऐसा समाज जिसमें सभी जाति और धर्म के लोगों को बिना किसी भेदभाव बराबर के अवसर मिलें।
ध्वजारोहण उत्सव की तैयारी में जुटे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक सीनियर पदाधिकारी कहते हैं, ‘नवंबर में होने वाला उत्सव प्राण प्रतिष्ठा जितना भव्य नहीं होगा लेकिन इसके अतिथियों में मुख्य रूप से अयोध्या के आसपास के जिलों के जमीनी स्तर के लोग शामिल होंगे। जैसे अवध, गोरखपुर और कानपुर मंडल से बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।‘
गेस्ट लिस्ट में ग्राम प्रधानों के साथ-साथ अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया जाएगा। यानी ऐसे लोगों को बुलाया जाएगा, जो समाज में रहकर अहम योगदान दे रहे हैं।

क्या गेस्ट लिस्ट फाइनल हो चुकी है, क्या बिहार से भी लोग आएंगे? पदाधिकारी जवाब देते हैं, ‘अभी नहीं, राममंदिर ट्रस्ट VHP-RSS की मदद से कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर रहा है। गेस्ट की लिस्ट भी फाइनल हो रही है। बैठक में ये भी तय हुआ है कि बिहार के कुछ श्रद्धालुओं को भी स्पेशल इन्विटेशन दिए जाएंगे।‘

बिहार चुनाव का एलान और मुख्य कार्यक्रम का गणित अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक, 161 फीट ऊंचे जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर पहले से 42 फीट लंबा ध्वज स्तंभ लगाया जा चुका है, जिस पर 25 नवंबर को ध्वज फहराया जाएगा। इसी दिन भगवान राम और माता सीता की विवाह पंचमी भी मनाई जाती है। मुख्य कार्यक्रम से 2 दिन पहले यानी 23 नवंबर को इससे जुड़ी रस्में शुरू हो जाएंगी।
मंदिर समिति के सोर्सेज ने हमें बताया है कि ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को न्योता भेजा जा सकता है। इस पर अयोध्या और अवध की राजनीति के बारे में 35 साल का अनुभव रखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद गोस्वामी कहते हैं,
जब ध्वजारोहण भारत की सर्वोच्च नागरिक पद बैठी एक आदिवासी महिला के हाथों होगा तो मैसेज दूर-दूर तक जाएगा।

’दरअसल बिहार भी उत्तर भारत का हिस्सा है और यूपी-बिहार के लोग धर्मावलंबी भी ज्यादा होते हैं। साथ ही इसे माता सीता की जन्मस्थली भी माना गया है। ऐसे में ‘समरस समाज’ की थीम को लेकर हो रहे इस उत्सव का असर बिहार चुनाव पर भी होगा।’
’बिहार की पॉलिटिक्स जातिगत समीकरणों पर आधारित रही है। चुनावों में विशेषकर SC, ST और OBC वोटर अहम भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि इलेक्शन को देखते हुए अयोध्या में नवंबर के महीने में एक बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। शायद इसी के गिर्द-गिर्द बिहार चुनाव भी हो सकते हैं।’

प्रमोद गोस्वामी आगे कहते हैं, ’जब लोकसभा चुनाव होने थे, तो उसके 3-4 महीने पहले से ही BJP राम मंदिर को लेकर हवा बनाने लगी थी। जनवरी 2024 में तो अधूरे राम मंदिर का ही उद्घाटन करवा दिया गया। लेकिन इसका नतीजा क्या हुआ, वो सब जानते हैं। न तो BJP 400 पार जा पाई न ही यूपी में 80 का आंकड़ा छू सकी। पार्टी प्रदेश में भी सिर्फ 35 सीटों पर ही सिमट गई।’
इससे एक बात तो साफ है कि अब मंदिर के मुद्दे को उठाकर बिहार या किसी अन्य राज्य का वोटिंग पैटर्न नहीं बदला जा सकता है।’
प्रमोद ये भी कहते हैं कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोग VHP और RSS जैसे संगठनों के हैं, जिनकी नजदीकियां लंबे वक्त से BJP नेताओं से रही हैं। ऐसे में कार्यक्रम की तारीख में दखल होना तय बात है।

चुनाव आते ही मंदिर पर सियासी गोलबंदी शुरू पॉलिटिकल एनालिस्ट कुमार भवेश चंद्र भी प्रवेश की बातों से सहमत दिखते हैं। वे कहते हैं कि इस वक्त BJP की राजनीति के 3 अहम तत्व हैं।
1. मोदी का चेहरा 2. विकास 3. धार्मिक आधार पर चुनाव लड़ना
’राम मंदिर हमेशा से BJP का बड़ा मुद्दा रहा है। ये बात और है कि बीते 10 साल में ये तीनों तत्वों का असर कम हुआ। अब भी इन्हें लेकर गोलबंदी खत्म नहीं हुई है। उत्तर भारत में लोगों का एक बड़ा तबका अब भी मानता है कि राम मंदिर BJP की बड़ी उपलब्धि है। इसलिए चाहे जिस राज्य का चुनाव हो BJP इस मुद्दे को हमेशा जीवित रखती है।’
’अब चुनाव पहले जैसे नहीं रहे। ऐसा जरूरी नहीं है कि जिस राज्य में चुनाव हों पार्टियां वहीं के मुद्दों को उठाकर मैदान में उतरें। सोशल मीडिया के दौर में पॉलिटिकल पार्टियां अपने बड़े कामों को हर बार गिनाती हैं, वो चाहे उन्होंने दूसरे राज्यों में ही क्यों न किया हो।’
’ऑपरेशन सिंदूर को ही देख लीजिए। हर एक चुनावी सभा में BJP नेता इसका जिक्र करना नहीं भूलते। आप देखिएगा अभी बिहार चुनाव में इसके बाद बंगाल में और फिर यूपी चुनाव में ऑपरेशन सिंदूर और राम मंदिर का मुद्दा 100% उठाया जाता रहेगा। लोकसभा चुनाव में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और अब बिहार चुनाव से पहले सीतामढ़ी में मंदिर के बहाने BJP अपने कोर वोटर्स को साध रही है।’

कभी राम मंदिर ही बना था बिहार में BJP के पैर जमाने की वजह पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स से बात करके हमें राम मंदिर और बिहार चुनाव से जुड़े एक रोचक किस्से के बारे में पता चला। 1990 की बात है, बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया था। इस इलेक्शन में ‘मंडल बनाम कमंडल’ की लड़ाई साफ देखी गई।
एक तरफ लालू प्रसाद यादव मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कर सामाजिक न्याय की बात कर रहे थे। दूसरी तरफ, BJP का फोकस राम मंदिर निर्माण के मुद्दे को उठाकर हिंदुत्व की राजनीति पर था। चुनाव के नतीजों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।
लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली जनता दल सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे समर्थन की जरूरत थी। तभी BJP ने जनता दल को बाहर से समर्थन दिया। इस सहयोग के बलबूते लालू प्रसाद यादव विधायक दल के नेता चुने गए और पहली बार बिहार के सीएम बने।
इस चुनाव ने ये साबित कर दिया कि राम मंदिर आंदोलन ने UP के साथ-साथ बिहार में भी BJP के लिए एक मजबूत राजनीतिक आधार तैयार कर दिया है। 1985 के विधानसभा चुनाव में महज 16 सीटें जीतने वाली BJP ने 1990 में 39 सीटों पर जीत हासिल की। ये बिहार में उसकी सबसे बड़ी चुनावी छलांग थी। यही वजह है कि बिहार चुनाव से पहले इस बार भी राम मंदिर चर्चा में है।

पिछले साल राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित न करने पर विपक्ष ने BJP पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने X पर लिखा था कि एक आदिवासी महिला को अपमानित करना BJP की मानसिकता दर्शाता है।
वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे जातिवादी मानसिकता का प्रतीक बताया था। ऐसे में ध्वज फहराने का कार्यक्रम में अगर राष्ट्रपति शामिल होती हैं, तो इसे BJP का अपने विरोधियों को जवाब देना माना जा सकता है।
ट्रस्ट के मुताबिक, ध्वजारोहण कार्यक्रम में अयोध्या के आसपास के 20 जिलों से सभी समुदायों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने का फैसला लिया गया है। इसमें शामिल होने वाले करीब 5 हजार अतिथियों में लोकल और वंचित समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी।

पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं… BJP: विपक्ष ‘मंदिर-मेनिया’ से ग्रसित, भद्दी राजनीति कर रहा यूपी BJP के स्टेट स्पोक्सपर्सन अवनीश त्यागी अयोध्या के कार्यक्रम पर हो रही सियासत को विपक्ष की ‘वोट आधारित राजनीति’ मानते हैं। अवनीश कहते हैं, ‘विपक्ष को मंदिर मेनिया हो चुका है और वो इससे बुरी तरह ग्रस्त हैं। राम मंदिर के काम को सरकार या राजनीति से जोड़ना बिल्कुल गलत है। मंदिर को संभालने के लिए ट्रस्ट है, जो उसकी अच्छे से देखभाल कर रही है। अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर बन रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर है।’
‘मंदिर के निर्माण का एक प्रोसेस है। पहले भूमिभूजन फिर शिलापूजन हुआ, रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई और अब मुख्य मंदिर में ध्वज लगाया जाएगा। ये सब एक प्रोसेस की तरह हो रहा है। इसलिए इसके बीच में राजनीति को लाना विपक्ष की भद्दी मानसिकता को दर्शाता है। एक वर्ग विशेष के वोट पाने के लिए विपक्ष खामखां ऐसे मुद्दे उठाता है।‘

सपा: अयोध्या में कार्यक्रम के जरिए बिहार में फुल नंबर चाहती है BJP समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव कहते हैं, ‘BJP जब भी कोई धार्मिक कार्यक्रम करती है, खासकर भगवान राम से जुड़ा तो उसमें कहीं-न-कहीं राजनीति छिपी होती है। इसी तरह मंदिर बना तो पार्टी उसका लाभ लेने पहुंच गई लेकिन यूपी की जनता ने हमारे नेता अवधेश पासी को अयोध्या से सांसद बनाकर BJP का ये नैरेटिव ही खत्म कर दिया। इसके बाद से ही BJP हर चुनाव में भगवान राम के नाम को भुनाने की कोशिश करती रही हैं।‘
‘BJP जैसी पार्टियों ने जनता के हित में कोई काम नहीं किया, इसलिए बार-बार उन्हें राजनीति के बीच ‘राम’ को लाना पड़ता है। ये लोग धर्म के सहारे लोगों के दिमाग को भ्रमित कर अपने नकारेपन को छिपाने का काम करते हैं। चाहे बिहार चुनाव हो या फिर 2027 में यूपी चुनाव। सपा और इंडिया गठबंधन दोनों राज्यों के चुनाव बुनियादी मुद्दों पर लड़ेंगी।‘

कांग्रेस: BJP ने राम मंदिर से जुड़ा हर काम बिना अस्था के किया कांग्रेस पार्टी के नेशनल स्पोक्सपर्सन अखिलेश प्रताप सिंह इस मामले पर चुटकी लेते हुए कहते हैं, ‘जब जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर का उद्घाटन कर चुके हैं, तो क्या मंदिर अभी तक पूरा नहीं हुआ? बार-बार ऐसे कार्यक्रम करवाने से ये सवाल उठता कि जो उद्घाटन पिछले साल हुआ, वो क्या था।‘
‘राम मंदिर को लेकर BJP ने कोई भी काम आस्था से नहीं किया। इसलिए भगवान भी उनसे नाराज हैं। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव के समय यूपी में BJP का सूपड़ा साफ हो गया। उनका यही हाल इस बार बिहार चुनाव में भी होने वाला है।‘
‘CAG की रिपोर्ट में राम मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या में जमीनों के घोटाला का पर्दाफाश हुआ था। लोगों ने देखा कि वहां गरीब जनता के साथ कितना छल हुआ। ऐसे में अयोध्या और मंदिर से जुड़ा कोई भी मुद्दा अब BJP के काम नहीं आने वाला है।‘ …………………
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‘डियर दाऊ, इस खत को पढ़ने से पहले अपने आप से पूछना कि क्या आप उस प्यार और सम्मान के हकदार हैं, जो आप मुझसे चाहते हैं। आपने मुझे इतना रुलाया है कि पलकें झपकाने पर मेरी आंखें दुखती हैं। आप अब भी उस महिला से बात करेंगे, जिसने मुझे स्लट कहा। आपने मेरे भरोसे के साथ मेरा दिल भी तोड़ दिया। आपने मुझे शर्मिंदा किया है।’ ये उस लेटर का हिस्सा है, जिसे UP के बाहुबली नेता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की बेटी राघवी ने लिखा था। पढ़िए पूरी खबर…
