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संडे जज्बात-बहू के प्रेमी ने मेरे बेटे को गोली मारी: वो हत्या करके अस्पताल, अंतिम संस्कार में साथ-साथ रहा; अब से दिवाली, छठ नहीं मनाऊंगी

संडे जज्बात-बहू के प्रेमी ने मेरे बेटे को गोली मारी:  वो हत्या करके अस्पताल, अंतिम संस्कार में साथ-साथ रहा; अब से दिवाली, छठ नहीं मनाऊंगी


मेरे सात बच्चों में सुमित सबसे छोटा बेटा था। वो ‌BSc और MBA करने के बाद पटना के एक प्राइवेट अस्पताल में असिस्टेंट मैनेजर था। एक गरीब लड़की का रिश्ता आया। हम उससे शादी नहीं चाहते थे, लेकिन सुमित ने कहा- मां गरीब लड़की से शादी करने पर भगवान खुश होंगे।

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मुझे नहीं पता था कि वो लड़की मेरे घर का चिराग बुझा देगी। उस लड़के ने मेरे बेटे को 5 गोलियां मारीं। सबूत मिटा दिए और बेटे के शव के साथ-साथ अस्पताल और अंतिम संस्कार में रहा। पुलिस ने CCTV के जरिए उसे पकड़ा। अब तो भगवान से भरोसा उठ गया है। अब न तो छठ, न दिवाली मनाऊंगी।

पटना की रहने वाली ममता देवी। इनके बेटे को बहू के प्रेमी ने हत्या कर दी। अब बेटे को याद करके वो बहुत रोती हैं। वह घर में सबसे छोटा था और पूरे घर को संभाल रहा था।

मेरा नाम ममता देवी है। बिहार के पटना शहर की रहने वाली हूं। एक जान-पहचान के रिश्तेदार के जरिए मेरे सबसे छोटे बेटे सुमित की शादी का रिश्ता आया। लड़की गरीब परिवार से थी। हमें रिश्ता कम जच रहा था। हमने सुमित से कहा था कि कुछ दिन रुक जाओ, पहले रिश्ते के बारे में पता कर लेते हैं, फिर शादी की बात करते हैं। लेकिन सुमित नहीं माना। कहा कि नहीं मां, गरीब घर की लड़की है, हम मना करेंगे तो पाप लगेगा। उसे घर लाएंगे तो भगवान खुश होंगे। हम क्या पता था कि वो गरीब की लड़की मेरे घर का चिराग बुझा देगी।

खैर, बीते 7 मार्च को शादी हुई थी। जब शादी नजदीक आई तो हमने अपना घर सजाना शुरू किया। सुमित को सजावट का बहुत शौक था। दीवार पर ये जो डिजाइन हैं, सब उसी ने करवाया था। अपनी शादी से पहले तो वो घर सजाने के लिए कई रात जागा था। घर की आखिरी शादी होने की वजह से हमने भी इसे धूमधाम से किया।

शादी के बाद सब कुछ अच्छा चल रहा था। नई नवेली दुल्हन रागिनी अक्सर देर से उठती थी, लेकिन हम उसे नई समझकर कभी कुछ नहीं कहते। दरअसल, उसे रोज रात को अक्सर किसी का फोन आता था। फोन आने पर वह फौरन छत पर भागती। कहती कि मां का फोन है और घंटों फोन पर बात करती थी। हम भी सोचते थे मां-बेटी की बातें हैं, एक-दूसरे की याद आती होगी। रोकना ठीक नहीं है।

कई बार पूछा भी कि नीचे क्यों नहीं बात करती, तो कहती थी कि नीचे मोबाइल का नेटवर्क ठीक से नहीं आता। बेटे को भी अंदाजा नहीं था कि आखिर चल क्या रहा है। सुमित उसके साथ कहीं हनीमून पर भी नहीं गया। दरअसल, उस वक्त मेरी बड़ी बहू प्रेग्नेंट थी, तो वो कहने लगा कि घर में एक नन्हा- मुन्ना आ जाए तो सभी साथ चलेंगे घूमने।

फिर वो 2 मई का वो मनहूस दिन आया। हर दिन की तरह हम सब सुबह उठे। सुमित ने नाश्ता किया और लगभग 12.30 बजे बाइक से दफ्तर के लिए निकल रहा था। उस वक्त उसकी भाभी नेहा ने उससे कुछ मजाक किया था। उस पर उसने कहा था कि रात को आकर जवाब दूंगा। वो कंधे पर बैग टांगा और घर से निकल गया।

दोपहर करीब 1.30 बजे उसके ऑफिस के दोस्त शशि ने मेरी बहू नेहा को फोन किया किया और पूछा कि सुमित कहां है, अभी तक दफ्तर नहीं पहुंचा? फिर बहू ने सुमित के फोन लगाया, तो किसी राह चलते राजमिस्त्री ने फोन उठाया और बताया कि किसी ने इन्हें गोली मार दी है। यह जमीन पर पड़े हुए हैं। बहू ने घबराकर हमें बताया। मैं तो बेहोश हो गई। बहू ने राजमिस्त्री से सुमित को अस्पताल पहुंचाने की मिन्नतें कीं।

उसके बाद हम सभी एक टैम्पो से तुरंत उस अस्पताल पहुंचे। सुमित की मौत हो चुकी थी। उसके सीने पर पांच गोलियां मारी गई थीं। अस्पताल में मेरा तो रो-रो कर बुरा हाल था। साथ में नई बहू रागिनी भी थी। उसने तुरंत अपने मामा और फुफेरे भाई को फोन करके अस्पताल बुला लिया। हम सुमित का शव घर लेकर आए। उस दौरान अंतिम संस्कार तक वो बेशर्म फुफेरा भाई साथ-साथ रहा, जिसने सुमित को गोली मारी थी।

ममता देवी बातचीत के दौरान बेटे को याद करके रोती हुई। बेटे सुमित की हत्या की बात सुनकर यह बेहोश हो गई थीं। अब इन्हें न नींद आती है और न ठीक से खाना खाती हैं।

ममता देवी बातचीत के दौरान बेटे को याद करके रोती हुई। बेटे सुमित की हत्या की बात सुनकर यह बेहोश हो गई थीं। अब इन्हें न नींद आती है और न ठीक से खाना खाती हैं।

घटना के बाद दो दिन तक रागिनी हमारे घर पर ही रही। उस वक्त हर दिन उसका फुफेरा भाई हमारे घर आ रहा था। तीसरे दिन रागिनी के मायके के लोग उसे साथ लेकर चले गए।

उधर, पुलिस जांच में पता चला कि रागिनी के फुफेरे भाई ने ही गोली मारकर हत्या की है। उसने सुमित के सीने में पांच गोलियां मारी थीं। वो सबूत मिटाने के लिए अपने कपड़े उतारकर जला दिए थे और बेटे की बाइक गंडक नदी में गिरा दी थी। पुलिस ने CCTV कैमरे के जरिए उसे पकड़ा था।

दरअसल, रागिनी का फुफेरा भाई उससे प्रेम करता था, जिसके चक्कर में उसने सुमित को रास्ते से हटा दिया। अगर वो एक बार भी मुझसे कहता कि रागिनी को पसंद करता हो तो मैं खुद उसकी रागिनी से शादी करा देती। हमें तो जरा भी शक नहीं हुआ था।

सोचती हूं कि आखिर फुफेरा भाई कितना ढीठ और बेशर्म था। मेरे बेटे की हत्या करके वो हमारे साथ अस्पताल में रहा और अंतिम संस्कार में भी शामिल हुआ। अगले दो दिन तक घर पर रागिनी से मिलने भी आता रहा। हम तो यही सोचते रहे कि दोनों भाई-बहन हैं, इसलिए मिल रहे होंगे।

मेरा बेटा चला गया। अब न तो मुझे नींद आती है और न ठीक से खाना खाती हूं। मेरा बेटा बहुत शरीफ था। उसकी कभी किसी से लड़ाई नहीं हुई। वह किसी से ऊंची आवाज में बात नहीं करता था। यकीन ही नहीं होता कि कोई उसे गोली मार देगा। वह अपना अस्पताल खोलना चाहता था।

सुमित को खाने में मीठा बहुत पसंद था। अक्सर हम उसकी पसंद का पेठा, खाजा, हलवा, सेंवई बनाते थे। अब घर पर कभी मीठा नहीं बनेगा। दीवाली आने वाली है। सब तरफ रोशनी होगी, लेकिन उसके बिना मेरे घर और जिंदगी में अंधेरा हो चुका है। मोहल्ले में सबसे अच्छी रोशनी मेरे घर में होती थी।

यह घर उसी ने बनवाया था। इसकी दीवारों का रंग, सारा सामान सब उसी ने तय किया था। त्यौहारों पर घर सजाने को लेकर तो उसकी नींद उड़ जाती थी। बेशक, वो मेरे घर में सबसे छोटा था, लेकिन समझ में सबसे बड़ा था। पूरा घर वही मैनेज करता था।

मैं यहां दरवाजे पर बैठी रहती हूं। लगता है वो अभी कंधे पर बैग टांगे आएगा। यहां बैग रखेगा, सुबह वहां ब्रश करेगा, यहां बैठकर खाना खाएगा। हम इतना दुखी हैं कि अब से कोई पर्व नहीं मनाएंगे। न जीतिया, न नवरात्र, न दिवाली, न छठ। इस बार ही नहीं, कभी नहीं। अब तो भगवान से भी भरोसा उठ गया है। उसकी कोई गलती होती तो सब्र भी कर लेते, लेकिन उसने कुछ गलत नहीं किया था।

मेरे पति रेलवे से रिटायर हुए हैं। हमारा छोटे से खुशियों भरे परिवार को पता नहीं किसकी नजर लग गई। इस घर में अब कभी उजाला नहीं होगा। बेटे ने गरीब समझकर लड़की से शादी की, लेकिन उसने मेरा चिराग बुझा दिया!

ममता कहती हैं मुझे नहीं पता था कि एक गरीब की बेटी मेरे घर का चिराग बुझा देगी। कहती हैं पता नहीं मेरे परिवार को किसकी नजर लग गई।

ममता कहती हैं मुझे नहीं पता था कि एक गरीब की बेटी मेरे घर का चिराग बुझा देगी। कहती हैं पता नहीं मेरे परिवार को किसकी नजर लग गई।

(ममता देवी ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए हैं।)

सभी किरदारों के नाम बदले हुए हैं।

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