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सिद्धार्थनगर में युवक फांसी के फंदे से लटका मिला शव: गरीबी और कर्ज को लेकर था परेशान, बच्चों की जिम्मेदारियों की थी चिंता – Siddharthnagar News

सिद्धार्थनगर में युवक फांसी के फंदे से लटका मिला शव:  गरीबी और कर्ज को लेकर था परेशान, बच्चों की जिम्मेदारियों की थी चिंता – Siddharthnagar News


रोहित सिंह | सिद्धार्थनगर4 मिनट पहले

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सिद्धार्थनगर के थाना कठेला समय माता क्षेत्र के ग्राम पंचायत धोबहा पठानडीह निवासी रामसेवक गुप्ता (35) ने गरीबी और कर्ज से परेशान होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया। युवक ई-रिक्शा चला करके परिवार का पालन-पोषण करता था।

रामसेवक पर पत्नी रीता, पांच बेटियां और एक छोटे बेटे की जिम्मेदारी पूरी तरह उसके कंधों पर थी। परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करना उसके लिए हमेशा चुनौती बनी रहती थी।

पत्नी रीता ने बताया- बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे मेरे पति रोज की तरह रिक्शा लेकर घर से निकले। मैं खेत में काम करने गई थी। लगभग 11:30 बजे मेरी बड़ी बेटी भागती हुई खेत में आई और बताया कि पापा फांसी के फंदे से लटक रहे हैं। यह सुनकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

बेटियों की जिम्मेदारी ने तोड़ा मनोबल

रामसेवक की पांच बेटियाँ और एक बेटा है। बड़ी बेटी 12 साल, दूसरी 10 साल, तीसरी 8 साल, चौथी 6 साल और पांचवीं मात्र 4 साल की है। सबसे छोटा बेटा केवल 2 वर्ष का है। पत्नी रीता बताती हैं कि उनके पति हमेशा बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते थे। हमारे बीच कभी विवाद नहीं हुआ। वे हमेशा कहते थे कि इतनी गरीबी में मैं बेटियों का भविष्य कैसे बनाऊंगा। यही सोच उन्हें तोड़ रही थी।

रामसेवक की बहन लक्ष्मी ने कहा- सुबह करीब 11 बजे भाई मेरे घर आया था। सामान्य बातचीत की और चला गया। मुझे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा। दोपहर लगभग 12 बजे मेरे पति का मुंबई से फोन आया और बताया कि तुम्हारे भाई ने फांसी लगा ली है। यह सुनते ही मेरे होश उड़ गए।

गांव में चर्चा है कि रामसेवक पर काफी कर्ज था। जिसे वह चुका पाने में असमर्थ था। बच्चों की परवरिश और घर खर्च का बोझ उसके लिए असहनीय हो गया था। ग्रामीणों का कहना है कि गरीबी और जिम्मेदारियों का बोझ ही उसकी मौत का असली कारण बना।

एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा- रामसेवक मेहनती और सीधा-सादा आदमी था। दिन-रात रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च उठाता था। लेकिन कर्ज और गरीबी ने उसका हौसला तोड़ दिया। बेटियों की जिम्मेदारी उठाना उसके लिए असंभव हो गया था।

रामसेवक की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी रीता के सिर से पति का और बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। अब पांच बेटियां और एक छोटा बेटा किस सहारे अपना भविष्य संवारेंगे, यह बड़ा सवाल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार अब पूरी तरह बेसहारा हो गया है।

पुलिस और प्रशासन की कार्यवाही

सूचना मिलते ही थाना कठेला समय माता पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।क्षेत्राधिकारी शोहरतगढ़ पवीन प्रकाश ने बताया- “शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का है। आत्महत्या का कारण गरीबी भी हो सकता है, लेकिन स्पष्टता रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।”

उपजिलाधिकारी विवेकानंद मिश्र ने कहा- हमें इस घटना की जानकारी मिली है। गरीबी के कारण आत्महत्या की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। थाने से रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।



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