लुधियाना में सरस मेले में डयूटियों पर तैनात शिक्षक।
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए थे कि शिक्षकों को चुनाव या आपदाओं से जुड़े कार्यों को छोड़कर सभी गैर-शिक्षण कार्यों से मुक्त रखा जाए लेकिन कई सरकारी स्कूल व अन्य निजी शिक्षकों की ड्यूटियां पंजाब कृषि विश्ववि
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4 अक्तूबर से 13 अक्तूबर तक चलेगा सरस मेला
4 अक्टूबर से शुरू होकर 13 अक्टूबर तक चलने वाले इस 10 दिवसीय मेले में कई सरकारी और निजी स्कूल के शिक्षकों को विभिन्न समितियों और संगठनात्मक भूमिकाओं में तैनात किया गया है। सूत्रों मुताबिक जिला शिक्षा विभाग (माध्यमिक) के कार्यालय द्वारा जारी एक पत्र के अनुसार, शिक्षकों को स्वागत, सांस्कृतिक, मंच प्रबंधन और शिविर कार्यालय समितियों सहित विभिन्न समितियों में रखा गया है।
अकेले स्वागत समिति में सरकारी स्कूलों के 21 शिक्षक शामिल हैं, जिनमें हेडमास्टर और प्रिंसिपल भी शामिल हैं, जबकि शेष समितियों में कम से कम तीन-तीन शिक्षकों को तैनात किया गया है। प्रशासनिक भूमिकाओं के अलावा, शिक्षकों को मेले के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए न्यायाधीशों और आयोजन सदस्यों के रूप में भी नियुक्त किया गया है।
कुछ को पंजीकरण, रिकॉर्ड रखरखाव, पहचान पत्र जांच, गिद्दा और भांगड़ा के लिए पारंपरिक नृत्य कार्यशालाओं के प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियां भी दी गई हैं।
शिक्षकों का कहना है कि इस तरह के कार्य अनुचित हैं और कक्षा शिक्षण में हस्तक्षेप करते हैं। एक सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के प्रधानाचार्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि प्रमुख विषयों के शिक्षकों को मेले में ड्यूटी पर लगाया गया है, जबकि स्कूल पहले से ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। ये गैर-शिक्षण कार्य अनावश्यक दबाव डालते हैं और शैक्षणिक कार्यक्रम को प्रभावित करते हैं।
मेलों में शिक्षकों की डयूटियां लगाना गलत-धर्मजीत सिंह ढिल्लों
लेक्चरर कैडर यूनियन के जिला अध्यक्ष धर्मजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि शिक्षकों को गैर-संबंधित कार्यों में शामिल करना अनुचित है, खासकर त्योहारों के दिनों में। करवाचौथ के अवसर पर प्रतिबंधित अवकाश है, फिर भी मेला ड्यूटी पर तैनात शिक्षक छुट्टी नहीं ले सकते। यह समझ में आता है कि यदि शिक्षक स्कूल से संबंधित कार्यक्रमों में शामिल हैं, लेकिन इस मेले का शिक्षा से कोई संबंध नहीं है।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस।
शिक्षक का स्थान क्लासरूम में है, दफ्तरों में नहीं
6 दिन पहले स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश जारी करते हुए कहा था कि सरकारी स्कूलों के अध्यापकों से किसी भी प्रकार का गैर-शैक्षणिक या प्रशासनिक कार्य न कराया जाए। उन्होंने साफ कहा कि शिक्षक का स्थान क्लासरूम में है, दफ्तरों में नहीं।
बैंस ने कई जिलों से आई शिकायतों पर गंभीर संज्ञान लिया है कि शिक्षकों को पढ़ाई से हटाकर दफ्तरी या प्रशासनिक कामों में लगाया जा रहा है। इसे उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के साथ अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि अध्यापक केवल सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि समाज के भविष्य को गढ़ने वाले ज्ञान के दीपक हैं।
शिक्षा मंत्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार (आरटीइ) अधिनियम, 2009 की धारा 27 के तहत शिक्षकों को केवल जनगणना, आपदा राहत या चुनाव जैसे कार्यों में ही लगाया जा सकता है। इसके अलावा किसी अन्य कार्य के लिए उनकी नियुक्ति कानून के खिलाफ है।
हरजोत बैंस ने स्पष्ट कहा था कि शिक्षकों की कक्षा में उपस्थिति अपरिवर्तनीय है और किसी भी जरूरी सरकारी कार्य के लिए उन्हें डिफाल्ट विकल्प नहीं माना जा सकता। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि सभी विभागों व जिलों को सख्त आदेश जारी करें कि बिना शिक्षा विभाग की लिखित अनुमति के किसी भी शिक्षक को गैर-शैक्षणिक कार्य में न लगाया जाए।
इस मामले संबधी उप जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) अमनदीप सिंह से विभागीय पक्ष लेना चाहा तो उन्होंने फोन नहीं रिसीव किया।
