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हरियाणा कांग्रेस बड़बोले नेताओं पर लगाएगी लगाम: प्रदेश प्रभारी बोले- जल्द अनुशासन कमेटी बनेगी, संपत-कैप्टन पर कार्रवाई हो सकती है – Hisar News

हरियाणा कांग्रेस बड़बोले नेताओं पर लगाएगी लगाम:  प्रदेश प्रभारी बोले- जल्द अनुशासन कमेटी बनेगी, संपत-कैप्टन पर कार्रवाई हो सकती है – Hisar News


पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव और प्रो. संपत सिंह।

हरियाणा में कांग्रेस बड़बोले नेताओं की जुबान पर लगाम कसने की तैयार कर रही है। प्रदेश में एक के बाद एक नेताओं के बयानों से पार्टी को असहज होना पड़ा रहा है। वहीं, पार्टी की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ रही है।

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इससे कांग्रेस संगठन के नेता परेशान हैं। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी बीके हरि प्रसाद का कहना है कि जल्द ही कांग्रेस हरियाणा में अनुशासन समिति बनाने जा रही है। यह समिति कभी भी बनकर तैयार हो सकती है। बीके हरि प्रसाद ने कहा कि इस समिति में कांग्रेस के सीनियर नेताओं को शामिल किया जाएगा।

यह समिति ऐसे नेताओं पर कार्रवाई के लिए अनुशंसा करेगी जो पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं और पार्टी के ही नेताओं पर बयानबाजी कर गुटबाजी को हवा देते हैं।

इससे पहले कांग्रेस ने 2 साल पहले डिसीप्लीनरी (अनुशासन) एक्शन कमेटी बनाई थी इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस के दक्षिण हरियाणा के नेता महेंद्र प्रताप को दी गई थी। इसके अलावा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना, जगबीर मलिक और चक्रवर्ती शर्मा को मेंबर बनाया गया था, मगर कमेटी कुछ खास नहीं कर पाई थी। अब कांग्रेस नए सिरे से अनुशासन कमेटी बना सकती है।

2 साल पहले कांग्रेस ने अनुशासन कमेटी बनाई थी। अब नए सिरे से दोबारा कमेटी बनाई जाएगी।

जानिए इन नेताओं क्यों हो सकती है कार्रवाई…

  • संपत सिंह इनेलो की रैली में गए थे: कांग्रेस के सीनियर नेताओं में से एक संपत सिंह ताऊ देवीलाल के जन्मदिवस पर 25 सितंबर को हुई इनेलो रैली में गए थे। इसके अलावा भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा को सीएलपी लीडर बनाए जाने पर भी संपत सिंह ने सवाल उठाए थे। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट शेयर की थी, जिसमें उन्होंने हुड्डा का नाम न लेते हुए लिखा था- स्वर्गीय चौधरी भजनलाल के नेतृत्व में 2005 में 67 सीटें आने के बाद लगातार पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाले को फिर से पार्टी सौंप दी गई है।
  • कैप्टन ने प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति पर उठाए सवाल: हरियाणा कांग्रेस में नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति पर कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव ने सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा था-यह निर्णय राहुल गांधी की इच्छा के विपरीत लिया गया है। कांग्रेस को अपने घटते प्रभाव को देखते हुए आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है। राव नरेंद्र ऐसे व्यक्ति हैं, जो 2014 के बाद से प्रदेश स्तर पर सक्रिय नहीं रहे थे, इसलिए उनकी नियुक्ति पर शंका है।
राहुल गांधी और खड़गे ने हरियाणा चुनाव में हार के बाद समीक्षा करवाई थी।

राहुल गांधी और खड़गे ने हरियाणा चुनाव में हार के बाद समीक्षा करवाई थी।

पढ़िए…अपने ही नेताओं से असहज क्यों हो रही कांग्रेस

  • कुलदीप ने बृजेंद्र की यात्रा में हुड्डा पर निशाना साधा: कुलदीप शर्मा लगातार पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्‌डा का नाम लिए बगैर लगातार अप्रत्यक्ष रूप से हमला कर रहे हैं। हाल ही में कुलदीप शर्मा बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा में शामिल हुए थे। कुलदीप शर्मा ने कहा कि मैं नाम नहीं ले रहा मगर उस नेता को राजनीति में चौधरी बीरेंद्र सिंह ही लाए थे। उन्होंने हुड्‌डा का नाम लिए बिना ही कहा कि जो अपने उसूलों पर खड़ा रहेगा मैं उसके साथ खड़ा रहूंगा और जो अपने उसूलों पर नहीं खड़ा होगा मैं उसके साथ नहीं रहूंगा।
  • दान सिंह प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति पर कार्यालय नहीं गए: राव दान सिंह नए प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के शपथ ग्रहण समारोह में चंडीगढ़ प्रदेश कार्यालय नहीं गए थे। जब मीडिया ने उनसे सवाल किया था तो उन्होंने कहा था कि शपथ ग्रहण समारोह की उनको कोई जानकारी नहीं थी। नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति पर उन्होंने कहा कि था मेरा चयन नहीं होने से समर्थकों में नाराजगी व मायूसी छाई हुई है।
चंडीगढ़ कांग्रेस भवन में नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह को बधाई देते पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा। कार्यक्रम से राव दान सिंह ने दूरी बना ली थी।

चंडीगढ़ कांग्रेस भवन में नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह को बधाई देते पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा। कार्यक्रम से राव दान सिंह ने दूरी बना ली थी।

पहले SRK गुट बना था, किरण की जगह बीरेंद्र सिंह आ गए इससे पहले हुड्डा विरोधी कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी एकजुट हुए थे। तब इसे SRK का नाम मिला। कई मौकों पर बीरेंद्र सिंह भी इनके साथ खड़े नजर आते थे। हालांकि बाद में किरण चौधरी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चलीं गई।

किरण की जगह अब चौधरी बीरेंद्र सिंह ने ले ली है। चुनाव के समय भी दोनों गुट अलग-अलग नजर आए। राहुल गांधी ने दोनों सीनियर नेताओं के हाथ मिलवाने की कोशिश की मगर चुनाव में गुटबाजी के कारण कांग्रेस चुनाव हार गई। राहुल गांधी ने भी हरियाणा में चुनाव हारने के बाद कहा था कि हरियाणा में कांग्रेस के सीनियर नेताओं के इंटरेस्ट पार्टी से ऊपर हो गए हैं।

हार के कारण जानने को कांग्रेस ने कमेटी बनाई थी विधानसभा चुनाव में अच्छे माहौल के बावजूद हारी कांग्रेस ने इसके कारण तलाशे थे। शुरुआत में कांग्रेस हाईकमान ने इसके लिए 2 मेंबरी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई। जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल और राजस्थान के कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी शामिल रहे। प्रदेश के 90 में से चुनाव हारे 53 नेताओं से उनकी बातचीत हुई थी। कमेटी ने चुनाव हारे उम्मीदवारों से 4 तरह के सवाल पूछे थे। जिसके बाद कमेटी ने इसकी लिखित रिपोर्ट तैयार की थी। जिसमें EVM से ज्यादा चुनाव के बीच तालमेल की कमी और गुटबाजी की वजह सामने आई थी।



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