लखीसराय जिले के चानन, बिछवे, किउल और लखीसराय में भगवान धन्वंतरि जयंती के अवसर पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पर्यावरण प्रहरी के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व कृष्ण बल्लभ प्रसाद ने किया।
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इस दौरान पर्यावरण भारती ने देव वृक्ष आँवला, फलदार अमरूद और औषधीय अशोक के कुल पांच पौधे लगाए। पर्यावरण भारती के संस्थापक राम बिलास शाण्डिल्य ने बताया कि भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक माना जाता है। उन्होंने मानव कल्याण के लिए जड़ी-बूटियों और औषधीय वृक्षों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
प्राचीन ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और वे आयुर्वेद तथा चिकित्सा शास्त्र के देवता हैं। यही कारण है कि आज सभी चिकित्सक उनकी पूजा करते हैं, जिससे अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। भगवान धन्वंतरि के पुत्र दिवोदास थे, जिनके पुत्र सुश्रुत थे। सुश्रुत ने ही संसार में पहली बार सर्जरी का शुभारंभ किया, इसलिए उन्हें सर्जरी का जनक कहा जाता है।
धन्वंतरि जयंती को धनतेरस के रूप में भी मनाया जाता है, जब आयुर्वेद के देवता की पूजा के साथ-साथ चांदी और सोने जैसी नई वस्तुओं की खरीदारी भी होती है। ऐसे शुभ अवसर पर पौधारोपण को एक महत्वपूर्ण कार्य माना गया है।इस पौधारोपण कार्यक्रम में कृष्ण बल्लभ प्रसाद, जीवेश रंजन गुप्ता, अनीश सिन्हा, अश्विन सिन्हा, मानव कुमार, रौनक चन्द्रवंशी, अक्षत राज और दीपक कुमार सहित कई लोगों ने भाग लिया।
