प्रथम कुमार | गाजियाबाद8 मिनट पहले
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गाजियाबाद में रंजीत भुसरी की 106 साल पुरानी विंटेज कार का पंजीकरण हुआ है। जब वे इसे आरटीओ दफ्तर लेकर पहुंचे, तो इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। यह कार 1919 में बनी थी, जो इसे एक सदी से भी अधिक पुराना बनाती है।
यह विंटेज कार 1919 में निर्मित हुई थी। उस दौर में गाड़ियां हाथ से बनाई जाती थीं, और इसके हर हिस्से में बारीकी से कारीगरी दिखाई देती है। इसका डिज़ाइन, हेडलाइट्स और बॉडी इसे एक दुर्लभ और ऐतिहासिक वाहन बनाती है।
रंजीत भुसरी को बचपन से ही पुरानी वस्तुओं का शौक रहा है। अमेरिका में विंटेज कार रैलियां देखकर उनका यह जुनून बढ़ा। उन्होंने यह कार अमेरिका में एक गैराज में 25 साल से बंद पड़ी देखी थी।
उन्होंने इसे लगभग 5 लाख रुपये में खरीदा, लेकिन टैक्स और मरम्मत पर कुल खर्च 25 से 30 लाख रुपये तक पहुंच गया। डेढ़ साल की मेहनत से उन्होंने इसके पुर्जे ढूंढकर इसे ठीक करवाया। रंजीत भुसरी ने बताया कि यह कार उनके सपनों की पहचान है और इसे दोबारा चलते देख उन्हें लगा जैसे इतिहास फिर से जीवंत हो उठा हो।
गाजियाबाद RTO दफ्तर ने इस पंजीकरण में पूरा सहयोग दिया। एआरटीओ प्रशासन मनोज कुमार सिंह ने बताया कि यह उत्तर प्रदेश में पंजीकृत होने वाली पहली विदेशी विंटेज कार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी कारों को नियमित रूप से सड़कों पर नहीं चलाया जा सकता; इनका उपयोग केवल प्रदर्शनियों या रैलियों के लिए ही किया जा सकता है।
