नितिन कुमार अवस्थी | मिर्जापुर4 मिनट पहले
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मिर्जापुर में सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के प्रकाशोत्सव के अवसर पर रविवार को नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस दौरान खालसा पंथ के वीर दस्ते ने अपने हैरतअंगेज करतबों से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खालसा वीरों ने परंपरागत वेशभूषा में अपनी वीरता और शौर्य का परिचय देते हुए शानदार प्रदर्शन किए।

इनमें आंखों पर पट्टी बांधकर तलवार से मुंह में रखा केला काटना, सिर पर रखे सेब को एक ही वार में दो भागों में विभाजित करना। तीन सरदारों के शरीर पर कीलों वाले पटरे रखकर उस पर पत्थर तोड़ना शामिल था। इन करतबों को देखकर श्रद्धालु “वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह” के जयघोष करने लगे।

शोभायात्रा रतनगंज गुरुद्वारा से प्रारंभ होकर डंकीनगंज, गिरधर का चौराहा, खजांची चौराहा, घंटाघर, त्रिमुहानी, नारघाट, नवीन टॉकीज, लालडिग्गी, गणेशगंज और इमरती रोड होते हुए वापस रतनगंज गुरुद्वारा पर संपन्न हुई। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर शोभायात्रा का स्वागत किया।

राहगीरों के लिए शर्बत और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई थी, जबकि कई स्थानों पर लंगर सेवा भी आयोजित की गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान गुरुबाणी की मधुर धुनों से वातावरण आध्यात्मिक भावनाओं से सराबोर रहा।
गुरुद्वारा परिसर में विशेष कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें रागी जत्थों ने गुरुवाणी का गुणगान किया और गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक घटनाओं का स्मरण कराया।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं, महिलाओं और बच्चों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह जी ने मानवता, समानता और सत्य के लिए जो योगदान दिया, वह आज भी समाज को दिशा देता है।
पूरे नगर में “सत श्री अकाल” और “जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे शहर आस्था, भक्ति और एकता के रंग में रंग गया।
