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विष्णुगढ़ में कई नर्सिंग होम संचालित हैं, लेकिन इन दिनों विष्णुगढ़ के लक्ष्मी नर्सिंग होम काफी चर्चा में है। चर्चा बेहतर चिकित्सीय सेवा की वजह से नहीं है बल्कि मौत बांटने के कारण है। यहां का हॉस्पिटल चौक बड़ा मेडिकल हब है। विष्णुगढ़ के अलावा बगोदर के आसपास के मरीज यहां इलाज कराने पहुंचते हैं। सीमावर्ती गोमिया प्रखंड क्षेत्र से भी लोग इलाज के लिए आते हैं। विष्णुगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित कई अच्छे डॉक्टर्स निजी प्रैक्टिस करते हैं। जिसके कारण यहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। इसीलिए निजी अस्पताल का व्यवसाय यहां फलने फूलने लगा और हॉस्पिटल चौक के इर्द गिर्द कई नर्सिंग होम खुल गए।
जहां नीम हकीम रोगियों का इलाज करते हैं। अस्पताल के आगे लगे बड़े-बड़े बोर्डों में डॉक्टरों के नाम के साथ एमबीबीएस की उनकी फर्जी डिग्रियां लिखी होती हैं। इन्ही में से एक लक्ष्मी नर्सिंग होम भी है। इस नर्सिंग होम में लगभग छह महीने के अंदर इलाज के दौरान तीन जानें जा चुकी हैं। मौत के बाद हर बार हंगामा हुआ और बात आई गई हो गई। लेकिन 29 अक्टूबर को प्रखंड के गोविंदपुर कला गांव के 32 वर्षीय पवन सिंह पिता करुण सिंह की मौत के बाद काफी हंगामा हुआ। इस बीच सीओ नित्यानंद दास, सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अरुण कुमार सिंह और विष्णुगढ़ थाना के इंस्पेक्टर सपन महथा मौके पर पहुंचे। नर्सिंग होम को सील करने व नर्सिंग होम के संचालक की गिरफ्तारी के बाद मामला शांत हुआ। बताया जाता है कि पवन दस्त के इलाज के लिए आया था। इसके पहले विष्णुगढ़ की उमा देवी (35) पति भीम सोनी तथा कमला देवी (65) पति नारायण स्वर्णकार की जान यह नर्सिंग होम ले चुका है। उमा को मामूली बुखार था। वहीं कमला देवी की बच्चेदानी की सर्जरी के बाद उसकी मौत हो गई। अब जाकर सरकारी महकमा जागा है। निजी अस्पतालों की जांच के लिए सीओ की अगुवाई में जांच टीम गठित की गई है। जांच टीम में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अरुण कुमार सिंह, थाना प्रभारी सपन महथा समेत अन्य शामिल हैं। जांच टीम ने गुरुवार को गोमिया रोड स्थित करोड़ों के भवन में संचालित मल्टी स्पेशीलिटी वरदान हॉस्पिटल की जांच की गई। जांच में क्या मिला इसका खुलासा नहीं हुआ है, पर कहा गया है कि जांच में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसका भी खुलासा किया जएगा।
