सेंटर सील करने की कार्रवाई करती टीम।
इंदौर में गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की टीम ने पलासिया स्थित एक कैंसर हीलर सेंटर पर छापा मारा। निरीक्षण में पता चला कि हीलिंग सेंटर कई सालों से इंदौर के अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित हो रहा था लेकिन इनके पास किसी तरह का रजिस्ट्रेशन या
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खास बात यह कि निरीक्षण के दौरान यहां किसी तरह का रजिस्ट्रेशन या दस्तावेज नहीं मिले। मामले में ग्वालियर के एक व्यक्ति ने शिकायत की थी की उनकी पत्नी को कैंसर के इलाज के लिए सेंटर लाया गया था लेकिन करीब 21 लाख रुपए खर्च करने के बाद भी उनकी पत्नी की जान नहीं बची। इसके बाद उन्होंने कलेक्टर शिवम वर्मा को शिकायत की। गुरुवार को अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो शिकायत सही पाई गई। सेंटर में कैंसर के इलाज के नाम पर तगड़ी राशि वसूली जा रही थी जबकि इलाज के लिए पर्याप्त सुविधा ही नहीं थी।
सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि इस सेंटर की एक अन्य जांच जिला आयुष अधिकारी द्वारा भी की जा रही है। इसमें एक उज्जैन के व्यक्ति ने शिकायत की है। इसे लेकर एक भी जांच टीम भेजी गई थी। सेंटर मरीजों, परिजन को कहा जाता था कि 10 से 15 दिनों में इलाज का पैकेज पूरा करेंगे।
यह सेंटर 2014 से अलग-अलग स्थानों से संचालित किया जा रहा था। फिर पलासिया में 2016 से संचालित किया जा रहा है। सेंटर द्वारा किसी भी तरह की मान्यता नहीं ली गई थी। यहां जो फार्मासिस्ट हैं वे एलोपैथिक के हैं जबकि जो दवाइयां दी जा रही है वे हर्बल के नाम से दी जा रही है।
मप्र में इलाज की पद्धति एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथिक की मान्य हैं। यहां पर इनमें से किसी भी पद्धति से इलाज नहीं किया जा रहा था। सेंटर द्वारा कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर नोटिस जारी किया जा रहा है।
