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फलों की खेती कर बदली अपनी किस्मत: पलामू के किसान अजय कुमार मेहता ने रचा इतिहास, उगा रहे कटहल, केला और मौसमी – hariharganj News

फलों की खेती कर बदली अपनी किस्मत:  पलामू के किसान अजय कुमार मेहता ने रचा इतिहास, उगा रहे कटहल, केला और मौसमी – hariharganj News


स्नातक (बीए) की पढ़ाई के बाद मुझे सहायक अध्यापक की नौकरी मिली,‎ लेकिन वेतन से परिवार की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही थी। खेती में संभावनाएं तलाशने की ठानी। भागलपुर के‎ सबौर कृषि विश्वविद्यालय से प्रशिक्षण प्राप्त किया। आधुनिक तकनीक से खेती की शुरुआत क

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लुकुवा मौजा में‎ 40 एकड़ में केला, कटहल और मौसमी और 65 एकड़ भूमि में ताइवान किस्म के हाइब्रिड अमरूद लगाए।‎ लगभग 100 एकड़ भूमि में फल उत्पादन कर रहा हूं।

इन बागानों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली, मल्चिंग, जैविक खाद,‎ वर्मी कंपोस्ट जैसी उन्नत तकनीकों का सहयोग बहुत लाभकारी रहा। इससे लागत घटने के साथ-साथ उत्पादन और‎ गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हुई।

मौसमी की खेती कर 10 गुना तक बढ़ाई कमाई

ताइवान अमरूद की बाजार में है मांग

ताइवान अमरूद आकार में बड़े, स्वाद में मीठे और पोषण से भरपूर होते हैं। इनकी‎ बाजार में जबरदस्त मांग है। हरिहरगंज के फलों की अब आपूर्ति रांची, पटना, कोलकाता जैसी बड़ी मंडियों में की‎ जा रही है। कटकोमा गांव भविष्य में राज्य के लिए आदर्श मॉडल गांव बन सकता है।

अगर सरकार किसानों को‎ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं का लाभ दे, तो क्षेत्र में कृषि क्रांति संभव है।‎ अगर इच्छाशक्ति हो तो गांव में ही रोजगार और आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।

15 दिनों के प्रशिक्षण के बाद शुरू किया काम

मैं भागलपुर‎ के सबौर कृषि प्रशिक्षण केंद्र में 15 दिन का प्रशिक्षण लिया था। इस दौरान वहां कृषि विशेषज्ञों से खेती करने के‎ आधुनिक तरीके से परिचित हुआ। इरिगेशन तथा सामूहिक खेती कर अधिक उत्पादन करने का प्रशिक्षण प्राप्त‎ किया।

आपूर्ति रांची, पटना, कोलकाता जैसी बड़ी मंडियों में की‎ जा रही है।

आपूर्ति रांची, पटना, कोलकाता जैसी बड़ी मंडियों में की‎ जा रही है।

साथ ही पउरा खेतों में फलदार पौधे लगाकर अधिक उत्पादन का भी प्रशिक्षण प्राप्त किया । पउरा में बालू‎ और मिट्‌टी के मिले​जुले अंश होते हैं जो फलों की खेती के लिए बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है। इसका प्रयोग‎ हमने अपने खेतों में बहुतायत में किया जिससे कि फलों के उत्पादन में बंपर वृद्धि हुई।‎

10 गुना तक बढ़ाई अपनी आमदनी

आधुनिक पद्धति अपनाने के बाद मेरी आमदनी में 10 गुना तक की वृद्धि हुई है। मेरी सफलता से प्रेरित होकर‎ आसपास के गांवों लोदिया, लुकुवा, कारीलेबुडा, नौडीहा कला के किसान भी फल उत्पादन की ओर अग्रसर हुए।‎ किसान राजकुमार मेहता, अखिलेश मेहता, दिनेश मेहता, बैकुंठ कुमार, रामकुमार मेहता, सत्येंद्र मेहता, राजू मेहता‎ अब फल उत्पादन कर रहे हैं। खेती से सिर्फ आमदनी नहीं बढ़ी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ा योगदान मिल‎ रहा है।‎

जानिए… कौन हैं अजय कुमार मेहता‎

अजय कुमार मेहता ग्रेजुएशन हैं। वे अध्यापक की नौकरी के साथ-साथ खेती को भी समान महत्व देते हैं। पत्नी‎ रेणु देवी मैट्रिक पास हैं। परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है। एक बेटी की शादी हाे चुकी है।

छोटी बेटी‎ बबली कुमारी माइक्रो बायोलॉजी में पढ़ाई कर रही है। पुत्र प्रकाश रंजन बीटेक इंजीनियरिंग कर रहे हैं। भतीजा‎ मनीष कुमार बीटेक और विवेक कुमार ग्रेजुएशन कर रहे हैं और खेती में सहयोग करते हैं। हरिहरगंज प्रखंड अब‎ तेजी से फल उत्पादन का केंद्र (हब) बनता जा रहा है।‎



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