करनाल में धान घोटाले व फर्जी गेटपास मामले में आरोपी सुपरवाइजर पंकज तुली की मौत हो गई है। उनको बुधवार शाम ब्रेन हेमरेज हुआ था, जिसके बाद उनको करनाल के अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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पीजीआई और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हालत गंभीर देखते हुए उनको पीजीआई चंडीगढ़ में रेफर कर दिया गया था। जिनकी गुरुवार शाम को डेथ हो गई।
वहीं, इस मामले में सस्पेंड चल रही मार्किट कमेटी सचिव आशा रानी भी कथित तौर पर फरार थी। सूत्रों की माने तो आशा रानी ने अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी, जो खारिज हो गई, लेकिन अब आशा रानी को जमानत मिल गई है।
गौरतलब है कि नई अनाज मंडी करनाल में हुए धान घोटाले में एफआईआर दर्ज होने के 11 दिन बाद शनिवार को मंडी सचिव आशा रानी को विभाग ने सस्पेंड कर दिया है। इन पर 4 नवंबर को केस दर्ज हुआ था। तब से सचिव अपने कार्यालय से नदारद हैं। मंडी सचिव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस संदिग्ध ठिकानों पर भी दबिश दे रही है।
पुलिस ने गिरफ्तार किया था पंकज तुली
डीएमईओ ईश्वर सिंह की शिकायत पर मंडी सचिव आशा रानी, मंडी कर्मचारी राजेंद्र कुमार, अजय कुमार व अमित कुमार के खिलाफ करनाल शहर थाने में केस दर्ज किया गया था। चारों आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामले में मंडी सुपरवाइजर पंकज तुली और दो कंप्यूटर ऑपरेटरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इनसे हुई पूछताछ में फर्जी तरीके से गेट पास काटने और धान घोटाले संबंधित मामले का खुलासा हुआ।
निलंबित मंडी सुपरवाइजर पंकज तुली को जेल लेकर जाती पुलिस।
फर्जी गेटपास घोटाले में भी बड़ा एक्शन
करनाल अनाज मंडी में हुए फर्जी गेटपास घोटाले में नई कार्रवाई की गई है। इस मामले में ऑक्शन रिकॉर्डर यशपाल को मुख्यालय ने निलंबित कर दिया है। भले ही उसका नाम प्रारंभिक एफआईआर में नहीं था, लेकिन पुलिस जांच में यह साफ हुआ कि निलंबित मंडी सुपरवाइजर पंकज तुली, सचिव आशा रानी और यशपाल ने मिलकर फर्जी गेटपास बनवाए थे।
मामले में इससे पहले दो कंप्यूटर ऑपरेटर अंकुश और अंकित को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। निलंबन आदेश के बाद यशपाल को रोहतक में जेडएमईओ कार्यालय में हाजिरी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि बिना मुख्यालय की अनुमति के वह कार्यालय नहीं छोड़ सकता।

कंप्यूटर ऑपरेटर अंकुश और अंकित को लेकर जाती पुलिस।
पुलिस की दबिश, कई कर्मचारी फरार
फर्जी गेटपास घोटाले की जांच सीआईए 2 कर रही है। पुलिस के मुताबिक, एफआईआर में आरोपी मंडी कर्मचारी राजेंद्र, अजय कुमार और अमित कुमार भी अब तक पकड़ में नहीं आए हैं। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और उम्मीद है कि सभी आरोपी जल्द गिरफ्तार होंगे।
दोनों घोटालों ने खड़े किए बड़े सवाल
धान घोटाले और गेटपास फर्जीवाड़े के दो बड़े मामलों ने करनाल के प्रशासनिक ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर मिलों में सरकारी धान का स्टॉक कम मिलना विभागीय निगरानी की खामियों को उजागर कर रहा है, तो दूसरी ओर गेटपास मामले ने मंडी सिस्टम में मौजूद कमियों को सामने ला दिया है। दोनों मामलों में कई कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका है, इसलिए जांच एजेंसियां अब दोनों नेटवर्क के बीच संभावित कनेक्शन भी तलाश रही है।
