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केदारनाथ यात्रा फिर लौटेगी प्राचीन पैदल मार्ग पर: 5.35 km ट्रैक का काम अंतिम चरण में, 2026 से पुराने रास्ते से होगी यात्रा – Rudraprayag News

केदारनाथ यात्रा फिर लौटेगी प्राचीन पैदल मार्ग पर:  5.35 km ट्रैक का काम अंतिम चरण में, 2026 से पुराने रास्ते से होगी यात्रा – Rudraprayag News


उत्तराखंड में केदारनाथ धाम के लिए प्राचीन पैदल मार्ग को फिर से शुरू करने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। सबकुछ ठीक रहा तो 2026 में श्रद्धालु और बाबा केदार की डोली इसी प्राचीन रास्ते से धाम पहुंच सकेगी।

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इसके लिए 5.35 किमी लंबा रामबाड़ा–गरुड़ चट्टी पैदल मार्ग का काम अब अंतिम चरण में है और केवल 150 मीटर का हिस्सा निर्माणाधीन है।

दो चरणों में बन रहा था मार्ग, पहला चरण पूरा

2013 की भीषण आपदा में प्राचीन मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद इस मार्ग का पुनर्निर्माण दो चरणों में शुरू हुआ। पहले चरण में केदारनाथ से गरुड़ चट्टी तक साढ़े तीन किलोमीटर मार्ग तैयार हो चुका है।

इस हिस्से को केदारनाथ से जोड़ने के लिए मंदाकिनी नदी पर 68 मीटर लंबा स्टील गर्डर पुल भी बना दिया गया है।

दूसरे चरण का काम लगभग पूरा, 150 मीटर शेष

दूसरे चरण में रामबाड़ा से गरुड़ चट्टी तक 5.35 किमी मार्ग का पुनर्निर्माण चल रहा है। इसमें ज्यादातर काम पूरा हो चुका है और सिर्फ 150 मीटर हिस्सा बाकी है। इसके पूरा होने के बाद यह मार्ग फिर से यात्रा के लिए खोल दिया जाएगा।

नए मार्ग में रहती दिक्कत, हिमखंड भी बाधा

आपदा के बाद यात्रियों के लिए मंदाकिनी नदी के दाईं ओर नया मार्ग तैयार किया गया था गौरीकुंड-रामबाड़ा-लिनचोली-रुद्रा प्वाइंट। यह लगभग 16 किमी लंबा है। इस रास्ते पर मई तक कई स्थानों पर हिमखंड पड़े रहते हैं, जिससे पैदल यात्रा चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में प्राचीन मार्ग का पुनर्निर्माण पूरा होना यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

अब प्राचीन मार्ग करीब 15.5 किमी लंबा

पुनर्निर्माण के बाद प्राचीन मार्ग की कुल लंबाई लगभग 15.5 किमी होगी। आपदा से पहले यही मार्ग गौरीकुंड-रामबाड़ा-गरुड़ चट्टी-केदारनाथ लगभग 14 किमी का था। 2013 में मंदाकिनी के उफान में रामबाड़ा से गरुड़ चट्टी-केदारनाथ तक करीब 7 किमी रास्ता पूरी तरह बह गया था। अब पुनर्निर्माण के बाद इस मार्ग की दूरी डेढ़ किलोमीटर बढ़ गई है।

प्राचीन मार्ग के चित्र भी तैयार हो रहे

प्राचीन पैदल मार्ग के नए स्वरूप के चित्र भी तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें मार्ग की संरचना, पुल और महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाया गया है।



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