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पंजाब पुलिस के 2 DSP सस्पेंड: अकाली नेताओं पर दर्ज FIR में कमजोर पैरवी की; कल DGP की चुनाव आयोग में पेशी हुई थी – Goindwal Sahib News

पंजाब पुलिस के 2 DSP सस्पेंड:  अकाली नेताओं पर दर्ज FIR में कमजोर पैरवी की; कल DGP की चुनाव आयोग में पेशी हुई थी – Goindwal Sahib News


पंजाब के तरनतारन में SSP के बाद अब 2 DSP को सस्पेंड कर दिया गया है। इनमें DSP (डिटेक्टिव) हरजिंदर सिंह और DSP (PBI) गुलजार सिंह शामिल हैं।

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यह कार्रवाई अकाली उम्मीदवार की बेटी व IT विंग इंचार्ज पर दर्ज केस के मामले में की गई है। जिसमें दोनों अधिकारी हाईकोर्ट को केस दर्ज करने व IT विंग इंचार्ज की गिरफ्तारी पर ठोस जवाब नहीं दे सके।

इसके अलावा दूसरे कई अकालियों को भी इस केस में जमानत मिली थी। जिसके बाद सरकार ने इन्हें केस की कमजोर पैरवी का जिम्मेदार ठहराया है।

कल ही DGP गौरव यादव नई दिल्ली में चुनाव आयोग के आगे पेश हुए थे। जिसके बाद दोनों अधिकारियों के सस्पेंशन के ऑर्डर जारी कर दिए गए।

इससे पहले तरनतारन उपचुनाव में वोटिंग से 3 दिन पहले चुनाव आयोग ने वहां की लेडी SSP रवजोत कौर ग्रेवाल को सस्पेंड कर दिया था।

डॉ. रवजोत ग्रेवाल, जिन्हें वोटिंग से पहले सस्पेंड किया गया था।

क्या है FIR से जुड़ा मामला…

तरनतारन में अकाली दल की उम्मीदवार सुखविंदर कौर रंधावा की बेटी कंचनप्रीत कौर रंधावा, शिअद आइटी विंग के प्रदेश अध्यक्ष नछत्तर सिंह गिल, राष्ट्रीय सचिव गुरसेवक सिंह शेख, पार्षद शाम सिंह मुरादपुरा, सरपंच वरिंदर सिंह सोनू बराड़ (दोदे), अजमेर सिंह काका (छापा), बलविंदर सिंह बिंदा (भुच्चर) समेत 30 लोगों के खिलाफ कुल 3 FIR दर्ज की गई थीं।

इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके अलावा शिअद के IT विंग इंचार्ज नछत्तर सिंह को भी अमृतसर से अरेस्ट किया गया था। करीब 12 लोगों को गिरफ्तारी के बाद जमानत मिल गई। इन सभी की जमानत तरनतारन की कोर्ट से हो गई। इसके बाद गिल की रिहाई के लिए अकाली दल ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्हें भी जमानत मिल गई।

तरनतारन सीट पर अकाली दल ने नंबर टू आकर चौंकाया तरनतारन में इसी नवंबर महीने में वोटिंग और काउंटिंग हुई थी। इस सीट पर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की जीत हुई, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात अकाली दल की परफॉर्मेंस रही। अकाली उम्मीदवार सुखविंदर कौर दूसरे नंबर पर रहीं।

काउंटिंग के वक्त भी पहले 3 राउंड में उनकी बढ़त भी रही। 2007 से 2017 तक लगातार 10 साल सरकार चलाने के बाद अकाली दल पंजाब में हाशिए पर जा चुकी है। इसकी वजह उनकी सरकार के वक्त नशा, श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और उससे जुड़े गोलीकांड के केस हैं। पिछले उपचुनावों में अकाली दल चौथे नंबर पर रहती थी। इस चुनाव में अकाली दल मुकाबले में रहा, जिसे 2027 के लिए अकालियों का कमबैक माना जा रहा है।



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