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जोधपुर में बैंकिंग क्षेत्र का फ्रॉड का मामला सामने आया है। आरोपियों ने बिजनेस यूनिट, मशीनरी और स्टॉक दिखाकर बैंक के साथ धोखाधड़ी की है। बैंक की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ऋण खाता फ्रॉड घोषित कर दिया गया। जांच में सामने आया कि लाखों रुपए के फ
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शास्त्री नगर थाने में न्यायालय परिवाद के जरिए दी गई रिपोर्ट में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के रीजनल चीफ ऑफिस के अधिकारी विभूति झा ने बताया कि बैंक की शास्त्री नगर शाखा से शाखा ने 2 मार्च 2023 को 31,03,000 टर्म लोन और 16,47,000 कैश क्रेडिट दीपिका जांगिड़ के नाम स्वीकृत किया गया था। दीपिका ने इलेक्ट्रिक ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए अपने परिचित वेंडर राज एंटरप्राइज (प्रोप्राइटर- चंद्राराम) के कोटेशन प्रस्तुत कर मशीनरी खरीदने का दावा किया था।
लोन लेने के बाद बैंक ने जब मशीनरी व यूनिट का निरीक्षण करने के लिए कई बार प्रयास किया ऋणी ने कोई सहयोग नहीं किया। इसके बाद आरोपियों ने बैंक को किस्तें चुकाना भी बंद कर दिया। समय पर किस्त और ब्याज जमा नहीं होने के कारण 19 मई 2024 को खाते को NPA (गैर निष्पादित संपत्ति) घोषित किया गया।
ऐसे खुला धोखाधड़ी का पूरा खेल
आरोपियों द्वारा लोन नहीं चुकाने पर मुख्य प्रबंधक शोभाराम को जांच सौंपी गई। 10 दिसंबर 2024 की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि मशीनें साइट पर मौजूद नहीं थीं और यूनिट में कोई व्यवसायिक गतिविधि नहीं मिली।
जांच में सामने आया कि आरोपी ऋणी और वेंडर ने मिलीभगत कर बोगस मशीनरी कोटेशन तैयार किए। फिर झूठी इनवॉयस के आधार पर बैंक से पूरी ऋण राशि ली। इसके साथ ही कैश क्रेडिट से न तो स्टॉक खरीदा गया, न उसका कोई रिकॉर्ड दिया गया। पूरी राशि का दुरुपयोग (फंड डायवर्जन) किया गया। जांच में पाया गया कि गतिविधि स्थल और यूनिट दोनों पर कोई मशीन, उत्पादन या स्टॉक मौजूद नहीं
शो-कॉज नोटिस का भी नहीं दिया जवाब
बैंक ने दीपिका जांगिड़ को 30 दिसंबर 2024 और चंद्राराम (राज एंटरप्राइज) को 29 मई 2025 को शो-कॉज नोटिस जारी कर 21 दिन में स्पष्टीकरण मांगा। लेकिन किसी ने भी कोई जवाब नहीं दिया।
जांच रिपोर्ट के बाद बैंक ने 19 अगस्त 2025 को खाता फ्रोड No. 2502-100222 के रूप में दर्ज कर दिया। बैंक का आरोप है कि दोनों ने बेईमानी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत कुल 37,50,747.48 रुपए की राशि हड़प ली। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
