हत्या के बाद स्वीप्ट गाड़ी का सीसीटीवी जिसमें आरोपी शव को बडवासनी नहर लेकर गया था। इनसेट में आदित्य (बाएं) और आरोपी विश्वामित्र (दाएं) की फाइल फाेटो।
हरियाणा के सोनीपत के सांदल कलां में 21 साल के आदित्य के मर्डर के बाद लाश ठिकाने लगाने ले जा रही कार का वीडियो सामने आया है। यह CCTV फुटेज 10-11 दिसंबर आधी रात के बाद का है। 10 दिसंबर की दोपहर को ही आदित्य लापता हुआ था। सीसीटीवी में कैद हुई सफेद रंग क
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इससे साफ है कि दोपहर में हत्या करने के बाद आरोपी विश्वामित्र ने कई घंटे तक लाश घर में ही रखी। रात को जब सब सो गए तो उधार की मांगी कार में लाश को बड़वासनी नहर में फेंकने गया। गुरुवार को परिवार ने अपने जवान बेटे की 13वीं की रस्म निभाई।
इस दौरान पिता सोमपाल ने कहा कि पुलिस इस केस को महज 10-20 हजार के लेन-देन में हुई हत्या बता रही है। जबकि यह हत्या 14 लाख रुपए के लालच में की गई। जमीन बेचकर एडवांस के तौर पर आए 25 लाख में से 14 लाख रुपए बेटे आदित्य के खाते में डलवाए थे। हत्या आरोपी विश्वामित्र को यह बात पता थी।
परिवार का यह भी कहना है कि इस हत्या को सिर्फ विश्वामित्र ने ही अंजाम तक नहीं पहुंचाया, बल्कि इसमें कई लोग शामिल रहे होंगे। क्योंकि 10 दिसंबर दोपहर को आदित्य को फोन किया तो पीछे से कई आवाजें आ रहीं थी। पुलिस जानबूझकर फिरौती वाले एंगल पर जांच नहीं कर रही, जबकि 25 लाख की फिरौती मांगने की पोस्ट सामने आई।
आदित्य की दस दिसंबर को उसके दोस्त विश्वामित्र ने हत्या कर दी थी।

गांव में गुरुवार को सतगामा की पंचायत हुई।
बेटे की हत्या को लेकर पहली बार पिता ने किए कई खुलासे…
- दोपहर में ड्यूटी से घर लौटा आदित्य: दैनिक भास्कर एप से बातचीत में आदित्य के पिता सोमपाल ने बताया कि 10 दिसंबर को आदित्य दोपहर 1ः35 बजे ड्यूटी से घर लौटा। वो एफसीआई गोदाम में इलेक्ट्रिशियन था। कुछ देर वहां रुका, जहां उनका नया घर बन रहा था। फिर पुराने घर चला गया। इसके थोड़ी देर बाद में लापता हो गया।
- विश्वामित्र दुकान पर सामान लेने आता था: सोमपाल ने बताया कि वे बिजली के सामान के साथ परचून की दुकान भी चलाते हैं। विश्वामित्र उनकी दुकान से सामान खरीदता था। उधार लिए सामान के पैसे एक-दो दिन में ऑनलाइन डाल देता था। इससे ज्यादा विश्वामित्र या उससे परिवार से ज्यादा कोई लेन-देन या आना-जाना नहीं था।
- आदित्य के खाते में पैसे होने की बात सुन ली थी: पिता ने कहा कि उन्होंने जमीन बेची है, जिसके एडवांस के तौर पर 25 लाख मिले। उनके पास चेक बुक नहीं थी, इसलिए 25 लाख में से 14 लाख रुपए आदित्य के अकाउंट में जमा करवाए। जब वे आदित्य के खाते में पैसे की बात कर रहे थे, तब विश्वामित्र दुकान पर मौजूद था और सारी बातें सुन रहा था। हालांकि आदित्य की हत्या से पहले ही 14 लाख रुपए चेक से निकाल चुके थे और उसके खाते में केवल 10 से 20 हजार रुपए ही बचे थे। पिता का आरोप है कि पैसों के लालच में विश्वामित्र ने साजिश रची।

आदित्य की ममेरे भाई हरविंद्र से बातचीत का आखरी रिकॉर्ड। इस बातचीत के दौरान पीछे से कई लोगों के होने का दावा किया जा रहा है।
30 हजार की उधारी और फोन कॉल पिता ने बताया कि दीपावली के आसपास विश्वामित्र ने 20 दिन के लिए 20 हजार रुपए उधार लिए थे। बीच में कुछ पैसे लौटा दिए थे। 8 दिसंबर को जब बाकी पैसे मांगे तो उसने एक-दो दिन में देने की बात कही। तीन बार फोन करने पर भी वह यही कहता रहा कि जल्दी पैसे लौटा देगा, बाद में फोन उठाना बंद कर दिया। पिता का कहना है कि उन्होंने कभी विश्वामित्र पर दबाव नहीं बनाया। विश्वामित्र ने उनका तो फोन नहीं उठाया, लेकिन उसने आदित्य को फोन कर कहा कि 9 तारीख को कैश दे देगा।
पिता का दावा-अकेला विश्वामित्र नहीं, और भी शामिल सोमपाल को शक है कि उनके बेटे की हत्या अकेले विश्वामित्र ने नहीं की, बल्कि और भी लोग इसमें शामिल थे। इसके पीछे उनके अपने तर्क हैं। कहते हैं-अकेला व्यक्ति न तो किसी को कट्टे में पैक कर सकता है, न ही गाड़ी में अकेला लाद सकता है। अकेले ने ही नहर में डेड बॉडी फेंकी होगी, ऐसा नहीं लगता है। इसी वजह से परिवार पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है।
ममेरे भाई ने कॉल की तो कई लोगों की आवाज आ रही थी पिता सोमपाल ने अपने रिश्तेदार हरविंद्र (आदित्य का ममेरा भाई) के मोबाइल की कॉल डिटेल दिखाई। इसमें 10 दिसंबर को हरविंद्र ने आदित्य के मोबाइल पर कई बार कॉल किया था। दोपहर में डेढ़ बजे के आसपास कॉल की तो आदित्य ने कहा था कि अभी वह घर नहीं पहुंचा है। कुछ देर में पहुंच जाएगा। हरविंद्र ने बताया कि 2:20 बजे दोबारा कॉल किया तो फोन नहीं उठा। 2:21 पर कॉल उठी और करीब 8 सेकेंड बात हुई। इसमें आदित्य ने कहा कि वह कहीं बैठा है और बाद में कॉल करेगा। हरविंद्र का कहना है कि 8 सेकेंड की बातचीत के दौरान पीछे से कई लोगों की आवाज सुनाई दी थी। इससे उसे लगा कि आदित्य वहां अकेला नहीं था। इसी आधार पर परिवार को शक है कि विश्वामित्र के साथ और लोग भी वारदात में शामिल हैं।

आदित्य के पिता सोमपाल और उसके ममेरे भाई हरविंद्र ने बातचीत में कई बड़े खुलासे किए।
परिवार का आरोप-अंतिम संस्कार तक ही पुलिस एक्टिव दिखी पिता सोमपाल ने कहा कि उनके बेटे की हत्या मामले में कोई भी बेगुनाह नहीं फंसना चाहिए और गुनहगार बचना नहीं चाहिए। अभी तक पुलिस की कार्रवाई से वह संतुष्ट नहीं हैं। अंतिम संस्कार तक पुलिस एक्टिव रही, बाद में ठंडी पड़ गई। सोमपाल ने कहा कि अब उन्हें सतगामा की पंचायत पर भरोसा है। पंचायत जो भी निर्णय लेगी, आगे उसी के अनुसार काम किया जाएगा।
सतगामा पंचायत का पुलिस को 3 दिन का अल्टीमेटम परिवार और सतगामा पंचायत ने कहा कि पुलिस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करें। परिवार और पंचायत को पुलिस संतुष्ट करे कि आदित्य की हत्या में एक ही आरोपी था। पंचायत में भी खुले मंच से कहा गया कि पुलिस के पास तीन दिन का समय है और अगर मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आगामी फैसला सतगामा पंचायत लेगी और उसके बाद सर्वजातीय खाप पंचायत बुलाई जाएगी। 21 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है।

गुरुवार को आदित्य की 13वीं की रस्म प्रक्रिया पूरी हुई।
अब जानिए, इस केस में पुलिस थ्योरी के बड़े दावे क्या…
10 दिसंबर को उधारी की रकम को लेकर गाली-गलौज हुई पुलिस का दावा है कि 10 दिसंबर को ड्यूटी से लौटने के बाद आदित्य अपनी बाकी की उधारी की रकम लेने पड़ोसी विश्वामित्र के घर गया। इस दौरान गाली-गलौज की नौबत आ गई। तैश में आकर विश्वामित्र ने धारदार दाव से सिर पर हमला किया। उसके बाद रेती से सिर पर 4 वार किए। पुलिस का दावा है कि दाव और रेती बरामद कर ली हैं।
20 हजार रुपए के लेन-देन का मामला, फिरौती का नहीं पुलिस का यह भी दावा है कि यह सिर्फ 20 हजार रुपए के लेन-देन में हुए विवाद का है। फिरौती की पोस्ट तो परिवार और पुलिस को गुमराह करने के लिए बनाई गई होगी। उस दिन आरोपी ने आदित्य को पहले जोर से धक्का दिया। तो उसका सिर ग्रिल से लगा।
शव ठिकाने लगाने को 1100 रुपए किराये पर ली कार पुलिस का तीसरा दावा है कि विश्वामित्र ने कई घंटे लाश घर पर रखी। फिर उसे ठिकाने लगाने को गांव के ही सोनू की कार 1100 रुपए में किराये पर ली। आरोपी ने कहा कि उसे रिश्तेदारी में जाना है। लाश के कट्टे में पैक कर इसी कार से नहर में फेंका।
परिवार को गुमराह करने को आदित्य का मोबाइल इस्तेमाल किया पुलिस का चौथा दावा है कि विश्वामित्र ने आदित्य के परिवार को गुमराह करने को उसके मोबाइल से मैसेज भेजे। 10 दिसंबर को शाम तक आदित्य घर नहीं लौटा तो परिवार पुलिस के पास जाने लगा। इसी बीच आदित्य के नंबर से मैसेज आया-“मेरे फोन की बैटरी कम है, सुबह आ जाऊंगा।” ये मैसेज देखकर परिवार वापस घर लौट आया। 11 दिसंबर को दोबारा पोस्ट व वीडियो डाली। इसमें आदित्य को लहूलुहान दिखाया और 25 लाख तैयार रखने को कहा। 12 दिसंबर को आदित्य की लाश नहर में मिली।
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सोनीपत में आदित्य मर्डर केस में सतगामा पंचायत:पुलिस को 3 दिन का अल्टीमेटम; बोले- हत्या में अन्य आरोपी भी शामिल

सोनीपत जिले के गांव सांदल कलां में आदित्य की हत्या के बाद आज उसकी 13वीं रस्म पूरी हुई। इसके उपरांत ग्राम पंचायत निवादा की चौपाल में सतगामा पंचायत आयोजित हुई। जिसमें सात गांवों के प्रतिनिधि, पंचायत सदस्य और ग्रामीण एकत्रित हुए। पंचायत में हत्या मामले की निष्पक्ष जांच, अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका और न्याय की मांग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। (पूरी खबर पढ़ें)
