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नई दिल्ली2 मिनट पहले
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JNU की कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी ने 8 जनवरी को यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में ये बात कही।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में 5 दिसंबर को हुई नारेबाजी पर कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित ने कहा कि हर यूनिवर्सिटी की तरह JNU में भी कुछ पागल हैं लेकिन ये लोग JNU के कैरेक्टर को डिफाइन नहीं करते।
शांति श्री ने कहा- दो दिन पहले JNU में कुछ नारे लगाए गए थे, लेकिन 24 घंटों के भीतर स्थिति सामान्य हो गई। हमने साबित किया कि ये नरेटिव JNU का नहीं है।
कुलपति का ये बयान गुरुवार को JNU में अवैध प्रवासन के मुद्दे पर हुए एक ईवेंट में सामने आया। कार्यक्रम में बांग्लादेश और म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों और मुंबई पर इसके प्रभाव पर चर्चा हुई।

JNU में आज भी गरीब छात्रों की फीस 15-20 रुपए
शांतिश्री ने कहा कि आप JNU के सकारात्मक पक्ष पर ध्यान दें। हमारे यहां भारत के 15 राज्यों से बच्चे पढ़ने आते हैं, जिनमें से कई गरीब छात्रों से आज भी 15-20 रुपए फीस ली जाती है। हम किसी के साथ भेदभाव नहीं करते।
5 जनवरी - PM मोदी और शाह के खिलाफ हुई थी नारेबाजी
JNU में 5 जनवरी को एक प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी हुई थी। 6 जनवरी को 35 सेकेंड का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें JNU के छात्र ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर’ के नारे लगाते नजर आ रहे थे। दिल्ली पुलिस ने JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (CSO) के शिकायत पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि मौके पर 30-35 छात्र मौजूद थे। शुरुआत में कार्यक्रम शांतिपूर्ण था, लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं मिलने पर भड़काऊ नारे लगाए गए।
मामले पर JNU प्रबंधन के कहा था कि यूनिवर्सिटी को नफरत फैलाने वाली प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे। यूनिवर्सिटी ने कहा कि मामले में पहले ही FIR दर्ज की जा चुकी है। हिंसा, गैर-कानूनी आचरण या राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरोपी छात्र सस्पेंड होंगे। पढ़ें पूरी खबर…

JNU कैंपस में 5 जनवरी को हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने मोदी-शाह के विरोध में नारेबाजी की थी।
JNU की पहली महिला कुलपति हैं शांतिश्री
रूस में जन्मीं शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित 7 फरवरी 2022 को JNU की पहली महिला कुलपति बनीं। शांतिश्री ने एम. फिल और पीएचडी JNU से ही पूरी की। इसके अलावा उन्होंने स्वीडन की उप्साला यूनिवर्सिटी से पोस्ट-डॉक्टोरल डिप्लोमा किया है। वे राजनीति और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की प्रोफेसर रह चुकी हैं और इससे पहले सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी, पुणे में पढ़ा चुकी हैं।
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