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नारनौल में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब का निर्माण शुरू: परियोजना पर दस साल बाद शुरू हुआ काम, पहले फेज में उठा मुआवजा विवाद – Narnaul News

नारनौल में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब का निर्माण शुरू:  परियोजना पर दस साल बाद शुरू हुआ काम, पहले फेज में उठा मुआवजा विवाद – Narnaul News

हरियाणा के नारनौल में घोषणा के करीब दस साल बाद मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब का काम शुरू हो चुका है। इसकी घोषणा फरवरी 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्‌टर ने की थी। इसके पहले फेज का निर्माण कार्य शुरू होते ही विवाद भी शुरू हो गया है। हालांकि इसको रेल व रोड नेटवर्क से जोड़ने का काफी काम पूरा हो गया है। नारनौल में नांगल चौधरी हलके के गांव बसीरपुर, घाटाशेर एवं तलोट की जमीन पर मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब बनाया जा रहा है। इस हब को बनाने के लिए टेंडर जारी हो चुका है तथा पहले फेज का निर्माण काम भी शुरू हो गया है। इसके बनने से यहां के लोगों को काफी फायदा होगा। प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी यह परियोजना देश की उन महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है, जिसकी सीधी निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय करता है। “प्रगति” योजना के अंतर्गत इसकी प्रगति रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी जाती है। इस परियोजना को लागू करने के लिए मुख्य टेंडर जारी होने के बाद काम शुरू हुआ था। दो चरणों में पूरी होने वाली यह परियोजना कुल 865 एकड़ क्षेत्र में विकसित होगी। इसमें प्रथम चरण में 408 एकड़ भूमि पर निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। आधारभूत ढांचा बनने लगा वहीं, आधारभूत आवश्यकताएं जैसे लॉजिस्टिक हब तक न्यू डाबला रेलवे स्टेशन से रेल की लाइन बिछाने का काम, 220 केवी क्षमता की स्पेशल बिजली लाइन, नारनौल से नहरी पानी की लाइन, नेशनल हाईवे से संपर्क आदि का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त आंतरिक रेल लाइन डालने एवं उस पर रेलवे प्लेटफ़ार्म बनाने का काम चालू है। 20 लाख कंटेनर होंगे हैंडल इस परियोजना के निर्माण और पूर्ण रूप से विकसित करने के लिए अनुमानित 765 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी। इस परियोजना के दोनों चरण पूरे होने उपरांत यहां 20 लाख कंटेनर को हैंडल करने की क्षमता विकसित की जाएगी। इसमें एक लाख कंटेनर को रखने के लिए वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था की जाएगी। हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार की यह एक संयुक्त परियोजना है। होने लगा विरोध वहीं इस हब का काम शुरू होने के बाद तीनों गांवों के ग्रामीणों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है। तीनों गांवों के ग्रामीण यहां पर करीब एक सप्ताह से धरने पर बैठे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनको भूमि अधिग्रहण के समय दिया गया मुआवजा पर्याप्त नहीं था। ग्रामीणों ने इसको लेकर कुछ दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी। इसमें शेर सिंह व कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया था कि ग्रामीणों से एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। उस सहमति पत्र पर यह नहीं लिखा था कि किसानों को प्रति एकड़ कितना पैसा मिलेगा। 65 लाख मुआवजा की कर रहे मांग जब किसानों को 30 लाख रुपए प्रति एकड़ दिया गया तो किसानों को झटका लगा। उन्होंने कहा कि उनको भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत मुआवजा नहीं दिया गया, अगर उनको उस कानून के तहत मुआवजा मिलता तो प्रति एकड़ 65 लाख रुपए मिलते। इसलिए सरकार को चाहिए कि किसानों को 65 लाख रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए।



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