हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी (RDP) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026’ के विरोध में प्रदेश भाजपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ लोग गले में रस्सी का फंदा और हाथों में हथकड़ी डालकर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने UGC के इन नियमों को शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक समरसता के खिलाफ बताया। RDP प्रमुख रुमित सिंह ठाकुर ने कहा कि, केंद्र की भाजपा सरकार ने सवर्ण समाज के साथ कुठाराघात किया है। यूजीसी के ये नए विनियम न केवल शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करेंगे, बल्कि सामाजिक ताना-बाना पर भी नकारात्मक असर डालेंगे। उन्होंने कहा कि, ये नियम विशेष वर्गों को निशाना बनाते हैं और इससे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कंगना-नड्डा को निशाने पर लिया रुमित ठाकुर ने हिमाचल के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर समेत केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, सांसद अनुराग ठाकुर, कंगना रनोट और राजीव भारद्वाज को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि, बंटेंगे तो कटेंगे नारे लगाने वाले भाजपा नेता सवर्ण समाज के हितों पर कुठाराघात के बाद इस मसले पर कुछ नहीं बोल रहे। उन्होंने पीएम मोदी से सवाल किया क्या वह एक वर्ग के प्रधानमंत्री है या फिर 140 करोड़ जनता के। सवर्ण समाज को कुचलने के लिए नए से नए कानून लाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज को कभी जातिगत आरक्षण से लड़ना पड़ रहा है तो कभी एट्रोसिटी एक्ट की खिलाफ लड़ाई करनी पड़ रही है। अब UGC के नए नियम लाकर उनके बच्चों को जेल में डालने की तैयारी कर दी गई है। शिक्षा को सामाजिक विभाजन का औजार बनाया जा रहा: रुमित रुमित ठाकुर ने कहा कि, सरकारें इस मुद्दे पर खुलकर सच बोलने से बच रही हैं। शिक्षा को सामाजिक विभाजन का औजार बनाया जा रहा है। इसी के विरोध में शिमला स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय का घेराव किया गया। चेतावनी दी कि, यदि UGC नियमों को वापस नहीं लिया गया तो पूरा हिमाचल बंद किया जाएगा। UGC के नए नियमों का क्यों हो रहा विरोध RDP का कहना है कि ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026’ के तहत प्रस्तावित प्रावधान शिक्षा संस्थानों में सामाजिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। ये नियम कुछ वर्गों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं और मेरिट आधारित शिक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं। पार्टी का दावा है कि यदि इन नियमों को लागू किया गया तो इसका सीधा असर छात्रों और युवाओं के भविष्य पर पड़ेगा।
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