नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
- कॉपी लिंक
कांग्रेस में पार्टी हाईकमान से मतभेद के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात की। तीनों के बीच बैठक खड़गे के कार्यालय में चल रही है।
यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब थरूर और पार्टी लीडरशिप के बीच कुछ मतभेद सामने आए हैं। हाल ही में केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर AICC की एक बैठक हुई थी, जिसमें थरूर शामिल नहीं हुए थे।
पार्टी से मतभेद के दावों को लेकर 24 जनवरी को थरूर ने कहा था कि जो भी मुद्दे हैं, उन्हें पार्टी लीडरशिप से डिस्कस करना होगा। वे इस मौके का इंतजार कर रहे हैं और इस मुद्दे को पब्लिक में नहीं ला रहे।
उन्होंने कहा था कि मीटिंग छोड़ने जैसे मामले पब्लिक प्लेटफॉर्म पर डिस्कस नहीं करने चाहिए। चिंताएं पार्टी लीडरशिप को डायरेक्ट बताना बेहतर है।

यह बात उन्होंने 25 जनवरी को केरल लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान कही थी।
मीडिया रिपोर्ट्स का दावा- राहुल से नाराज थरूर
पीटीआई के अनुसार 19 जनवरी को कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद कई वरिष्ठ नेताओं का नाम लिया, लेकिन शशि थरूर को नजरअंदाज कर दिया था।
थरूर के करीबी सूत्रों के मुताबिक यह घटना उनके लिए टिपिंग पॉइंट साबित हुई। इससे पहले भी राज्य के कुछ नेता उन्हें नजरअंदाज करने की कोशिश कर चुके हैं, जिससे वह असहज महसूस कर रहे थे।
इस मामले पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि केरल कांग्रेस के सभी बड़े नेता मीटिंग में आ रहे हैं। जो कांग्रेस के किसी काम के नहीं हैं और बड़े नेता नहीं हैं वे आएं या न आएं कोई फर्क नहीं पड़ता।
थरूर के पिछले 5 बयान जो चर्चा में रहे…
9 जनवरी: नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी, लेकिन हर समस्या के लिए उन्हें गलत ठहराना सही नहीं

केरल विधानसभा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव (KLIBF) के चौथे संस्करण में 9 जनवरी को शशि थरूर ने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन देश की हर समस्या के लिए उन्हें अकेले दोषी ठहराना पूरी तरह गलत और अनुचित है। पूरी खबर पढ़ें…
1 जनवरी: शशि थरूर बोले- मैं कभी पार्टी लाइन से नहीं भटका

केरल के वायनाड स्थित सुल्तान बथेरी में कहा कि मैं कभी पार्टी लाइन से नहीं भटका। मेरा सवाल है, किसने कहा कि मैंने पार्टी लाइन छोड़ दी। जब मैंने विभिन्न विषयों पर अपनी राय व्यक्त की तो पार्टी और मैं एक ही लाइन पर खड़े थे। पूरी खबर पढ़ें…
27 दिसंबर- प्रधानमंत्री का हारना भारत के हारने जैसा
विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस की नहीं, भारत की होती है। अगर राजनीति में कोई प्रधानमंत्री की हार पर खुश होता है, तो वह भारत की हार की खुशी मना रहा होता है। भारत को पाकिस्तान से आने वाले सुरक्षा खतरों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…
25 दिसंबर- अवैध प्रवासियों पर सरकार का एक्शन सही
देश में गैरकानूनी तरीके से रहने वाले लोगों (अवैध प्रवासियों) के खिलाफ सरकार के एक्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था को ठीक से संभालना सरकार की जिम्मेदारी है। पूरी खबर पढ़ें…
4 नवंबर- भारत में पॉलिटिक्स फैमिली बिजनेस
भारत की वंशवादी राजनीति की आलोचना करते हुए एक लेख में कहा था- भारत में राजनीति फैमिली बिजनेस बन गई है। जब तक राजनीति परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी, तब तक लोकतांत्रिक सरकार का असली मतलब पूरा नहीं हो सकेगा। पूरी खबर पढ़ें…
————————–
ये खबर भी पढ़ें…
थरूर ने वीर सावरकर अवॉर्ड लेने से इनकार किया:बोले-आयोजकों ने बिना पूछे नाम घोषित किया; NGO का दावा- कांग्रेस सांसद ने सहमति दी थी

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 10 अक्टूबर को X पर एक पोस्ट में वीर सावरकर अवॉर्ड को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा- मैं ये अवॉर्ड लेने नहीं जा रहा हूं। मुझे इसके बारे में केरल में रहते हुए मीडिया रिपोर्ट्स से ही जानकारी मिली। कांग्रेस सांसद ने कहा कि आयोजकों ने बिना पूछे मेरा नाम घोषित किया है। ऐसे में दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। पूरी खबर पढ़ें…
