शिवपुरी के ऐतिहासिक जाधव सागर से जलकुंभी हटाने के बाद राहत की उम्मीद थी, लेकिन सफाई का तरीका सही नहीं होने से समस्या फिर बढ़ गई। तालाब से निकाली गई जलकुंभी को पूरी तरह नष्ट करने की बजाय किनारे छोड़ दिया गया, जिससे वह दोबारा हरी होने लगी है। तालाब की पार से रिसते पानी और पास की खराब पार के गंदे पानी के संपर्क में आने से सूखी जलकुंभी में फिर से जान आ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ ही दिनों में यह जलकुंभी फिर से तालाब में फैल सकती है और सफाई का पूरा काम बेअसर हो जाएगा। सिंधिया ने दिए थे सफाई के निर्देश यह सफाई केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश पर की गई थी। लेकिन जलकुंभी को अधूरा नष्ट करने के कारण अब इस प्रयास की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निवासी कहते हैं कि जलकुंभी को समय पर उठाकर वैज्ञानिक तरीके से नष्ट नहीं किया गया, तो हालात पहले से भी ज्यादा खराब हो सकते हैं। पहले भी हुई थी यही गलती
यह पहली बार नहीं है। पहले भी माधव नेशनल पार्क के तालाबों में मैनुअल सफाई के दौरान जलकुंभी को किनारे छोड़ दिया गया था। नमी मिलने पर वह फिर से पानी में फैल गई थी। नगर पालिका के सीएमओ इशांक धाकड़ ने कहा कि ठेकेदार को जलकुंभी हटाकर सही तरीके से नष्ट करने के निर्देश दिए गए थे। यदि ऐसा नहीं हुआ है, तो वे तुरंत मामले की जांच करेंगे और जलकुंभी हटवाने के नए निर्देश जारी करेंगे।
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