वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट (प्रथम) के न्यायाधीश सुनील कुमार तृतीय की अदालत ने गुरुवार को 6 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने नवविवाहिता की मौत में नामजद पति समेत ससुरालीजनों को राहत दे दी। पुलिस की चार्जशीट के हत्यारोपियों को गवाहों के बयानों पर संदेह का लाभ दिया। कोर्ट में अभियोजन और वादी के वकील भी थाना जंसा में दर्ज दहेज हत्या केस में मजबूत साक्ष्य पेश नहीं कर सके। जिसके बाद कोर्ट ने आरोपी अतुल जायसवाल, मुकुल जायसवाल (पति), श्यामसुंदर जायसवाल (ससुर) और शिवकुमारी देवी (सास) को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। अभियोजन ने दलील दी कि गोसाईंपुर (बेसहूपुर) गांव में विवाहिता का शव पंखे की कुंडी के सहारे लटका मिला। मायके वालों ने दहेज हत्या का आरोप लगाया है। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता विधान चंद्र सिंह यादव एवं अमन राज गुप्ता ने प्रदलीलें पेश की।
पहले जानिए पूरा घटनाक्रम मंडुवाडीह थाना क्षेत्र की तुलसीपुर निवासी नंदलाल जायसवाल की बेटी वंदना जायसवाल की शादी दिसंबर 2019 में गोसाईंपुर(बसहूपुर) गांव निवासी मुकुल जायसवाल के साथ हुई थी। ससुराल के लोगों के अनुसार शुक्रवार की रात वंदना अपना कमरा बंद कर फांसी लगा कर जान दे दी। कमरा बंद देख कर परिवार के लोग वंदना को आवाज दी। जब कमरा नहीं खुला तो परिवार के लोगों ने शोर मचाया। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने दरवाजा तोड़कर वंदना को बाहर निकाला और लोहता स्थित एक अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी पाकर वंदना के मायके वाले उसके ससुराल पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। पिता नंदलाल जायसवाल ने आरोप लगाया कि ससुराल के लोग बुलेट मोटरसाइकिल और दो लाख रुपये की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर ससुराल के लोगों की प्रताड़ना के कारण उनकी बेटी की जान गई। पति-सास समेत 6 के खिलाफ दर्ज कराया केस वंदना के पोस्टमार्टम के बाद उसके पिता नंदलाल जायसवाल की तहरीर पर पति मुकुल जायसवाल, ससुर श्याम सुंदर, सास शिवकुमारी, ननद पूजा व किरन और देवर अतुल जायसवाल के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया जाता है कि वंदना के शरीर पर चोट के निशान भी मिले हैं। सूचना पाकर सीओ सदर अभिषेक पांडेय भी गांव घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे, लेकिन ससुराल के लोग मकान में ताला बंद कर भाग निकले थे। पुलिस ने वंदना के ससुर को हिरासत में ले लिया है, इसके अलावा विवेचना के दौरान अन्य लोगों को भी जेल भेजा। पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की और रिपोर्ट समेत अन्य साक्ष्य भी दिए। अभियोजन ने जिरह के दौरान कोर्ट में बताया कि शादी के समय हैसियत के अनुसार 10 लाख रुपये खर्च किए गए थे। शादी के बाद पता चला कि पति सरकारी कर्मचारी नहीं बल्कि सेल्समैन है। ससुराल पक्ष ने बुलेट मोटरसाइकिल और 2 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग को लेकर विवाहिता को प्रताड़ित किया जाता था। कोर्ट में साक्ष्य और दलीलें मजबूत नहीं थी इसलिए सभी आरोपी बरी हो गए।
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