मुख्य बातें

ईरान-इजराइल जंग में फंसे हरियाणा के 2 भाई: कतर में समंदर से ऑयल निकालने का काम, मिसाइलें उड़ती देखीं; बोले- सामने ही अमेरिकी बेस, डर लग रहा – Sonipat News

ईरान-इजराइल जंग में फंसे हरियाणा के 2 भाई:  कतर में समंदर से ऑयल निकालने का काम, मिसाइलें उड़ती देखीं; बोले- सामने ही अमेरिकी बेस, डर लग रहा – Sonipat News


राम सिंहमार, सोनीपत52 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

होटल में बाहर खड़े होकर आसमान से गुजरती मिसाइल दिखाते अमित मलिक।

इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच चार दिन से चल रही जंग में हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले दो भाई अमित मलिक और अनिल मलिक भी फंस गए है। दोनों भाई कतर में समंदर के बीच ऑयल रिंग पर काम करते है। ऑयल रिग से समंदर के 18 हजार फीट नीचे से गैस और ऑयल निकाला जाता है।

अमित के मुताबिक, वे 27 फरवरी को इंडिया से कतर पहुंचे थे। उनके पहुंचने के तुरंत बाद ही युद्ध जैसे हालात शुरू हो गए। पहले जहाज पर थे तो ज्यादा डर महसूस नहीं हुआ, लेकिन जैसे ही बमबारी शुरू हुई, उसे हेलीकॉप्टर से कतर की सनईया सिटी में शिफ्ट कर दिया गया, जबकि उनके भाई अनिल को दुबई भेजा गया।

मगर, जिस होटल में वे ठहरे हैं, उसके ऊपर से मिसाइलें गुजरती दिखीं। एक मिसाइल को उनके होटल के ऊपर ही डिफेंस सिस्टम ने हवा में नष्ट किया। उनके सामने की दिशा में ही अमेरिका का बेस कैंप है और वहीं पर मिसाइलें गिराने की कोशिश की जा रही थी। यह आंखों देखा दृश्य उनके लिए बेहद डरावना था।

उधर, जब दोनों भाइयों ने सोनीपत के गोहाना क्षेत्र में अपने गांव बिधल में परिवार को इसकी जानकारी दी तो उनकी चिंता बढ़ गई। परिवार ने दोनों से कहा कि किसी भी तरह देश लौट आओ। परिवार ने सरकार से भी अपील की है कि जंग में फंसे भारतीयों की जल्द से जल्द वतन वापसी के प्रयास करें।

मोबाइल में युद्ध का अलर्ट मैसेज दिखाते अमित मलिक (गले पर टैटू वाले)। उनके साथ रोहतक जिले के गांव मायना के सुरेंद्र भी है (आगे वाले)।

मोबाइल में युद्ध का अलर्ट मैसेज दिखाते अमित मलिक (गले पर टैटू वाले)। उनके साथ रोहतक जिले के गांव मायना के सुरेंद्र भी है (आगे वाले)।

कैसे है जंग के हालात, दोनों भाइयों ने बताई तीन बातें…

  • अनिल ने सुनी वार्निंग सायरन और देखी मिसाइल : अनिल मलिक ने बताया कि वे एक महीना पहले कतर पहुंचे थे। शनिवार को ऑयल रिग पर हेलीकॉप्टर का इंतजार कर रहे थे, तभी मोबाइल पर वार्निंग सायरन बजा। बाहर निकलकर देखा तो आसमान में मिसाइल जाती दिखाई दी। इसके बाद कंपनी ने सभी कर्मचारियों को शहर में शिफ्ट कर दिया। हेलीकॉप्टर उड़ानें रोक दी गईं। रविवार को भी गोलाबारी हुई और सोमवार सुबह फिर स्ट्राइक की खबर मिली। उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।
  • रिग लाइन पर फंसे ढाई सौ से ज्यादा लोग : अनिल ने आगे बताया कि रिग लाइन पर करीब ढाई सौ से ज्यादा लोग मौजूद हैं। यदि तेल और गैस के प्रोडक्शन क्षेत्र पर मिसाइल गिर जाए तो आग पर काबू पाना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि 18 हजार फीट नीचे तक प्रोडक्शन की प्रक्रिया सक्रिय है। जिन्हें शहर में लाया गया है, उन्हें होटल में ही रहने के निर्देश हैं। रिग पर मौजूद कर्मचारियों को वहीं क्वॉरेंटाइन किया गया है। भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। कतर सरकार हर घंटे आधिकारिक अपडेट दे रही है और अफवाहों से बचने की सलाह दी है।
  • हरियाणा के कई युवक साथ कर रहे काम : अनिल ने बताया कि उनके साथ रोहतक के मायना गांव के सुरेंद्र, अंबाला के पारस, समालखा के रवि शर्मा, हांसी के सुनील, हिसार के प्रदीप और कैथल के अमनदीप सहित कई हरियाणवी युवक काम कर रहे हैं। एक बैच में 6 से 7 लोगों को भेजा जाता है और 28 दिन बाद अगली टीम बदलती है।
जंग के बीच समंदर में बने ऑयल रिग से अनिल और अमित के साथ कई लोगों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया।

जंग के बीच समंदर में बने ऑयल रिग से अनिल और अमित के साथ कई लोगों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया।

  • 28 दिन समंदर के बीच रिग लाइन पर काम : अमित बताते है कि रिग लाइन पर काम का एक तय चक्र होता है। दिल्ली एयरपोर्ट से दुबई पहुंचने के बाद कर्मचारियों को होटल में ठहराया जाता है। अगले दिन बेस कैंप से हेलीकॉप्टर के जरिए 8 से 10 लोगों को समुद्र के बीच स्थित जहाज पर उतारा जाता है। एक बार रिग पर पहुंचने के बाद 28 दिन तक वहीं रहना होता है। पहले दिन 8 घंटे की शिफ्ट रहती है, फिर 12-12 घंटे दिन-रात काम चलता है। इसके बाद अगली टीम आती है और पहले वाले वापस लौटते हैं।
  • समुद्र में 18 से 20 हजार फीट तक ड्रिलिंग का काम : अमित के अनुसार, बड़ी-बड़ी 30 फीट लंबी पाइपों को जोड़कर समुद्र के भीतर करीब 18 से 20 हजार फीट तक ड्रिलिंग की जाती है। डायमंड कटर से समुद्र की सतह के नीचे कटिंग होती है। बाद में प्रोडक्शन लाइन डालकर नियंत्रित ब्लास्ट किया जाता है, जिससे गैस और तेल एकत्र होकर पाइपलाइन के जरिए बेस कैंप तक पहुंचते हैं।
दोनों भाइयों के जंग के हालात में फंसने के बाद परिवार के लोग चिंता में है।

दोनों भाइयों के जंग के हालात में फंसने के बाद परिवार के लोग चिंता में है।

दोनों भाइयों के ऑयल रिग तक पहुंचने का सफर…

परिवार खेतीबाड़ी से जुड़ा, नेवी में जाने की चाहत थी

अनिल ने उनका परिवार ढाई एकड़ जमीन का मालिक है, लेकिन खेती-बाड़ी से ज्यादा बचत नहीं हो पाती थी। इसी कारण बेहतर रोजगार की तलाश में मैने और छोटे भाई अमित ने विदेश जाने का फैसला किया। अमित ने 12वीं के बाद मर्चेंट नेवी में जाने का फैसला किया। वर्ष 2014 में उसने हिसार की एक अकादमी से डिप्लोमा किया और ट्रेनिंग मुंबई में हुई।

ठगी हुई तो विदेश जाने का फैसला किया

अनिल बताते है कि मुंबई से ट्रेनिंग लेकर लौटे तो हिसार का संस्थान बंद मिला। पता चला कि नेवी में भेजने के नाम पर उनके साथ 6 से 8 लाख रुपये की ठगी हो गई। इसके बावजूद अमित ने हार नहीं मानी और मेहनत के दम 10 साल पहले विदेश में काम शुरू किया। पहले दुबई में नौकरी की और पिछले 6 साल से कतर में ऑयल रिग पर कार्यरत हैं। बाद में अमित ने मुझे भी इसी क्षेत्र में लगवा दिया।

20 दिन काम के मिलते है 1.60 लाख रुपए

अमित को 20 दिन काम के लगभग 1 लाख 60 हजार रुपये मिलते हैं। बेहतर कमाई के लिए उन्होंने जोखिम भरा काम चुना, लेकिन आज हालात इतने भयावह हैं कि चिंता बढ़ गई है। गांव में पिता और पत्नी हर पल फोन का इंतजार करते हैं। अमित ने बताया कि रविवार रात लगातार गोलाबारी होती रही। जहाज के आसपास भी धमाकों की आवाज सुनाई देती रही। हालांकि अब दोनों भाई सुरक्षित स्थान पर हैं और लगातार परिवार को हालात की जानकारी दे रहे हैं। दोनों भाइयों की हो चुकी शादी, बच्चे भी

बड़े भाई अनिल मलिक लगभग 35 वर्ष के हैं। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है। चार साल पहले उनकी शादी हुई। उनके दो बच्चे है, एक 7 साल की बेटी और 5 साल का बेटा। अनिल का परिवार सोनीपत शहर में रहता है। जबकि, अमित मलिक 28 वर्ष के हैं। दो साल पहले उनकी शादी हुई और उनका दो साल का बेटा है। उनकी पत्नी और पिता गांव में रहते हैं। उनकी मां का करीब तीन साल पहले निधन हो चुका है।

अनिल मलिक की पत्नी किरण ने बताया कि दो दिन पहले ही बात हुई थी।

अनिल मलिक की पत्नी किरण ने बताया कि दो दिन पहले ही बात हुई थी।

अनिल की पत्नी बोलीं- बस सकुशल लौट आए दोनों अनिल की पत्नी किरण ने बताया कि दो दिन पहले ही उनकी पति और देवर से बात हुर्ह थी। दोनों ने वहां के जो हालात बताए थे, उसने हमारी चिंता बढ़ा दी है। बस हमारी हुई कामना है कि वे जहां भी रहे, सुरक्षित रहे। दोनों को जल्दी से जल्दी घर लौट आने को कहा गया है। मगर, अभी सभी फ्लाइट्स बंद है, ऐसे में सरकार को वहां फंसे लोगों को जल्दी ही देश वापस लाने के प्रयास करने चाहिए।

——————- ये खबर भी पढ़ें…

दोहा कतर में देर रात ईरान का मिसाइल अटैक:एयरपोर्ट और गैस प्लांट को बनाया निशाना, 60-70 भारतीयों का समुंद्र से रेस्क्यू

रोहतक जिले के गांव मायना के सुरेंद्र उर्फ काला मायना ने दोहा कतर से मंगलवार सुबह दैनिक भास्कर एप से वीडियो शेयर करते हुए बताया कि ईरान ने देर रात करीब 2 बजे कतर में अमेरिकन एयरबेस पर मिसाइल अटैक किया। हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों के मरने की पुष्टि कतर न्यूज ने भी की है। (पूरी खबर पढ़ें)

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *