बेगूसराय साइबर पुलिस को साइबर अपराध के खिलाफ एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने देशव्यापी वित्तीय धोखाधड़ी के नेटवर्क से जुड़े एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। जिसके बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) से अब तक 15 करोड़ 25 लाख 35 हजार 307 रुपये के फ्रॉड ट्रांजैक्शन की बात सामने आई है। साइबर डीएसपी इमरान अहमद ने बताया कि इस बैंक खाते के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 205 गंभीर शिकायतें दर्ज हैं। गिरफ्तार किया गया संदिग्ध खाताधारक फुलवरिया थाना क्षेत्र के बरौनी फुलवरिया वार्ड नंबर-2 के रहने वाले सुरेश महतो का पुत्र सुनील कुमार है। साइबर सेल और जिला पुलिस की टीमें पिछले कई दिनों से आरोपी की धरपकड़ के लिए उसके संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही थीं। सटीक इनपुट के आधार पर पुलिस ने आज उसे दबोच लिया। इस संबंध में बेगुसराय साइबर थाना में कांड संख्या-34/26 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कैसे हुआ महाठगी का खुलासा यह पूरा मामला तब सामने आया जब भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक संदिग्ध खाते पर देश भर से मिल रही शिकायतों का अलर्ट मिला। बेगूसराय साइबर पुलिस ने SBI खाता संख्या- 445595591771 का गहन अवलोकन और बैंक स्टेटमेंट की स्क्रूटनी (जांच) की तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। क्योंकि आश्चर्यजनक रूप से करोड़ों का लेन-देन हुआ है। सभी शिकायतों को मिलाकर इस खाते में जमा और ट्रांसफर की गई कुल फ्रॉड राशि 15 करोड़ 25 लाख 35 हजार 307 रुपये है। इस अकेले खाते में विभिन्न राज्यों के सैकड़ों मासूम लोगों से ठगी गई रकम ट्रांसफर की जा रही थी। NCRP पोर्टल पर देश के अलग-अलग कोनों से इस खाते के खिलाफ 205 शिकायतें दर्ज पाई गई। कहा- 3.75 लाख रुपये में बेचा बैंक खाता गिरफ्तारी के बाद जब साइबर पुलिस ने सुनील कुमार से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने साइबर अपराधियों के सिंडिकेट को यह बैंक खाता (म्यूल अकाउंट) इस्तेमाल करने के लिए 3,75,000 रुपये में बेचा था। इतना ही नहीं सुनील कुमार ने इस पूरे रैकेट में शामिल 3 और मास्टरमाइंड्स के नामों का भी खुलासा किया है। आरोपी के बयान के आधार पर पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधियों की तलाश में जुट गई है, जो भोले-भाले लोगों या स्थानीय युवकों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं और उनका इस्तेमाल ठगी के लिए करते हैं। साइबर डीएसपी ने लोगों से अपील की कि कभी भी पैसों के लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम या नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स किसी अनजान व्यक्ति को न बेचें और न ही किराए पर दें। ऐसा करना आपको सीधे तौर पर देशव्यापी साइबर अपराध का हिस्सा बना देता है, जिसमें जेल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
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