बैतूल जिले के सारनी क्षेत्र स्थित वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (WCL) की पाथाखेड़ा खदानों में ठेका मजदूरों का अनिश्चितकालीन आंदोलन रविवार को 10वें दिन भी जारी रहा। होली जैसे बड़े त्योहार पर भी दो महीने से अधिक का वेतन न मिलने के कारण सैकड़ों मजदूर भारी आर्थिक संकट और आक्रोश में हैं। ठेकेदारों पर वेतन के नाम पर मजदूरों को धमकाने और प्रबंधन को गुमराह करने के गंभीर आरोप लगे हैं। आंदोलन कर रही महिला मजदूरों ने ठेकेदारों पर चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ठेकेदार मजदूरों के बैंक खातों में वेतन की आंशिक राशि (केवल 10 से 15 दिन की हाजिरी का पैसा) जमा कर रहे हैं और फिर उस पैसे को वापस निकालने का दबाव बना रहे हैं। आरोप है कि WCL प्रबंधन को कागजों में ‘फुल पेमेंट’ दिखाने और मजदूरों के बीच फूट डालने के लिए यह गंभीर साजिश रची जा रही है। पैसे वापस न करने पर महिला को काम से निकाला
ठेकेदारों की मनमानी का आलम यह है कि एक महिला मजदूर द्वारा कथित तौर पर पैसे वापस न करने पर उसे काम पर आने से ही रोक दिया गया। इस तानाशाही का समाजसेवियों ने कड़ा विरोध किया। इसके बाद एटक (AITUC) यूनियन के अध्यक्ष श्रीकांत चौधरी ने WCL प्रबंधन के एपीएम (APM) से संपर्क कर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, जिसके दबाव में अधिकारी ने महिला को अगले दिन से काम पर वापस लेने की सहमति दी। ‘जब तक 100% भुगतान नहीं, तब तक हड़ताल’
समाजसेवी प्रदीप नागले, संतोष देशमुख और मनोज पवार सहित मजदूरों का स्पष्ट कहना है कि ठेकेदार प्रबंधन को झूठी जानकारी दे रहे हैं कि सभी श्रमिकों का भुगतान हो गया है, जबकि सैकड़ों मजदूर आज भी खाली हाथ हैं। नगर पालिका अध्यक्ष किशोर बर्दे ने भी धरना स्थल पहुंचकर जल्द समाधान का आश्वासन दिया है। लेकिन मजदूरों ने साफ चेतावनी दी है कि ठेकेदार काम पर लौटने का दबाव बनाना बंद करें; जब तक पाथाखेड़ा क्षेत्र के सभी ठेका श्रमिकों को उनका पूरा बकाया वेतन नहीं मिल जाता, यह हड़ताल समाप्त नहीं होगी।
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