प्रयागराज के सरायममरेज थाना क्षेत्र के पिलखिनी गांव में पांच महीने के मासूम बेटे की हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी मां मनोरमा ने खुद परिजनों के सामने कहा कि उसने बेटे को मारकर उसकी लाश फेंक दी है। परिजनों के मुताबिक, वह करीब चार घंटे तक परिवार वालों को छकाती रही और पति से भी कह दिया कि “अब अगला नंबर तुम्हारा है।”
परिजनों के सामने किया हत्या का खुलासा यह खुलासा बच्चे के पिता के बाबा हरिलाल यादव ने पुलिस के सामने किया। उन्होंने बताया कि बुधवार शाम करीब आठ बजे तक बच्चा कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। घर में मौजूद मनोरमा एक कोने में चुपचाप बैठी थी। जब उससे बच्चे के बारे में पूछा गया तो वह काफी देर तक चुप रही। उसका व्यवहार देखकर उन्हें शक हुआ। जानकारी देने पर आसपास की महिलाएं भी वहां आ गईं। बार-बार पूछने पर उसने कहा कि उसने बच्चे को मार दिया है और उसकी लाश बाहर फेंक आई है। यह सुनते ही घर के सभी लोग सन्न रह गए। पति से बोली- ढूंढ सकते हो तो ढूंढ लो इसके बाद तुरंत बच्चे के पिता संतोष यादव को बुलाया गया। जब संतोष घर पहुंचे और पत्नी से बेटे के बारे में पूछा तो उसने कहा कि बच्चे को मारकर फेंक दिया है, ढूंढ सकते हो तो ढूंढ लो। इसके बाद संतोष और परिवार के अन्य लोग घर के टीनशेड वाले कमरे में पहुंचे, जहां खाना बनता है। वहां लकड़ी के ढेर के नीचे बच्चे का शव मिला। शव बुरी तरह क्षत-विक्षत था और पेट फटा हुआ था। यह देखकर संतोष चीखने लगा। चार घंटे तक परिजनों को छकाती रही परिजनों के मुताबिक, मनोरमा करीब चार घंटे तक बच्चे के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रही थी। जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने हत्या की बात कबूल की। परिजनों का कहना है कि उसने पति से यह भी कहा कि “अब अगला नंबर तुम्हारा है।” पत्थर से वार कर की थी हत्या गौरतलब है कि पुलिस पूछताछ में आरोपी महिला ने बताया कि पति से झगड़े के बाद वह गुस्से में थी। उसी दौरान उसने अपने पांच महीने के बेटे ईश्वर पर पत्थर से वार कर दिया। पत्थर जोर से लगने से बच्चे का पेट फट गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद घबराकर उसने शव को घर के टीनशेड वाले कमरे में लकड़ियों के ढेर के नीचे छिपा दिया। आए दिन होता था पति-पत्नी में झगड़ा परिजनों और पड़ोसियों के मुताबिक, संतोष यादव खेती करते हैं। उनकी शादी करीब दो साल पहले मनोरमा से हुई थी। दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता रहता था। बाबा हरिलाल यादव ने बताया कि मामूली बातों पर भी मनोरमा झगड़ा करने लगती थी। कई बार उसे समझाया गया, लेकिन उसके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। उधर पोस्टमार्टम के बाद बच्चे के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
Source link
