झज्जर। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालातों का असर अब हरियाणा के औद्योगिक शहर बहादुरगढ़ के उद्योगों पर भी दिखने लगा है। कच्चे माल की सप्लाई घटने और कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण यहां की फुटवियर इंडस्ट्री संकट में आ गई है। उद्योगपतियों के अनुसार कई इकाइयों में उत्पादन करीब 40 प्रतिशत तक घट गया है, जबकि बढ़ती लागत के कारण जूते-चप्पलों के दाम भी 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाने पड़े हैं। बहादुरगढ़ फुटवियर एसोसिएशन की बैठक में उद्योगपतियों ने जूते-चप्पलों के दाम बढ़ाने पर सहमति जताई है। एसोसिएशन के महासचिव सुभाष जग्गा ने बताया कि जूता उद्योग में इस्तेमाल होने वाला पीयू, ईवीए और रेग्जिन जैसे कच्चे माल का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगवाया जाता है। युद्ध जैसे हालातों के कारण इनकी सप्लाई कम हो गई है और स्टॉकिस्टों ने कच्चे माल के दाम करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं। कच्चा माल महंगा होने से घटाना पड़ा उत्पादन उन्होंने बताया कि कच्चे माल की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण उद्योगों को मजबूरी में उत्पादन घटाना पड़ रहा है। साथ ही जूते-चप्पलों की कीमतों में भी 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी है। सुभाष जग्गा के अनुसार जूता उद्योग पहले ही एमएसएमई सेक्टर में 45 दिन में भुगतान की बाध्यता के कारण दबाव में था और अब अंतरराष्ट्रीय हालातों ने उद्योग की स्थिति और कमजोर कर दी है। 1500 से ज्यादा इकाइयों में 30 हजार करोड़ का उत्पादन बहादुरगढ़ देश के प्रमुख फुटवियर हब में से एक माना जाता है। यहां 1500 से अधिक जूता निर्माण और उससे जुड़ी इकाइयां काम कर रही हैं। इन इकाइयों में सालाना करीब 30 हजार करोड़ रुपये का उत्पादन होता है, जबकि लगभग 700 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट किया जाता है। जूते-चप्पल बनाने के लिए करीब 5 हजार करोड़ रुपये का कच्चा माल विदेशों से मंगवाया जाता है, जिस पर मौजूदा हालातों का सीधा असर पड़ा है। कैमिकल इंडस्ट्री पर भी पड़ा असर युद्ध जैसे हालातों का असर केवल फुटवियर इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है। बहादुरगढ़ की कैमिकल इंडस्ट्री भी इससे प्रभावित हो रही है। सार ग्लोबल के डायरेक्टर राजेश कुमार ने बताया कि रिफाइनरी से मिलने वाला पेट्रो-केमिकल आधारित कच्चा माल और सॉल्वेंट की सप्लाई लगभग बंद हो गई है। इसके अलावा फैक्ट्रियों में गैस की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। सिर्फ 60% रह गया उत्पादन, शटडाउन का खतरा राजेश कुमार के अनुसार इन हालातों के कारण कई फैक्ट्रियों में उत्पादन करीब 60 प्रतिशत तक सिमट गया है। अगर जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो कई उद्योगों के सामने फैक्ट्री बंद करने की स्थिति भी पैदा हो सकती है। महंगाई बढ़ने की भी आशंका उद्योगपतियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण गैस और कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसके चलते उपभोक्ता वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ने लगे हैं और आने वाले समय में महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
Source link
