अनूपपुर वनमंडल के जैतहरी वनपरिक्षेत्र में तीन हाथियों का समूह पिछले 81 दिनों से ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। शनिवार, 14 मार्च की रात को लगातार तीसरे दिन भी इन हाथियों ने जैतहरी और अनूपपुर थाना क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों में जमकर उत्पात मचाया। वर्तमान में यह दल पगना पंचायत के बरटोला क्षेत्र में लाल सिंह के गेहूं के खेतों को निशाना बना रहा है। हाथियों का यह समूह बुधवार शाम को धनगवां बीट के कुसुमहाई गांव से निकला था। रास्ते में पटौराटोला, टकहुली और लहरपुर में फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही एक ग्रामीण का घर भी तहस-नहस कर दिया। गुरुवार सुबह हाथियों ने जैतहरी नगर के मुख्य मार्ग और बस स्टैंड क्षेत्र में प्रवेश कर दहशत फैलाई। इसके बाद वे बंजारी टोला से रेलवे लाइन पार कर और तिपान नदी लांघते हुए गोबरी बीट के जंगल में दाखिल हुए। जैतहरी रेंजर विवेक मिश्रा के अनुसार, हाथी वर्तमान में अनूपपुर थाना क्षेत्र के दुधमनिया बीट अंतर्गत पगना के बरटोला में सक्रिय हैं। किसान लाल सिंह के खेत में यह हाथियों की लगातार तीसरी दस्तक है, जहां वे रात भर गेहूं, चना और मटर की तैयार फसलों को खा रहे हैं। ग्रामीण हाथियों की मौजूदगी से अधिक प्रशासन की अनदेखी से आहत हैं। लगभग पौने तीन महीने बीत जाने के बाद भी हाथियों को जिले से बाहर खदेड़ने की कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बन पाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि नुकसान का सही तरीके से आकलन (राहत प्रकरण) नहीं किया गया है और फसल व मकान क्षति का मुआवजा भुगतान भी लंबित है। जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हालात यह हैं कि रात-दिन सुरक्षा में तैनात वन विभाग के गश्ती दल को ग्रामीणों के गुस्से और तीखी नोकझोंक का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद वन विभाग का अमला ग्रामीणों और हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हाथी दल की निगरानी में जुटा है। साथ ही, वे ग्रामीणों को सुरक्षित रहने की सलाह भी दे रहे हैं।
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