मुख्य बातें

डिजिटल अरेस्ट के मामले में 4 शातिर गिरफ्तार: रिटायर्ड डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर ट्रान्सफर करवा लिए थे 34 लाख, मास्टरमाइंड CA भी गिरफ्तार – Nagaur News

डिजिटल अरेस्ट के मामले में 4 शातिर गिरफ्तार:  रिटायर्ड डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर ट्रान्सफर करवा लिए थे 34 लाख, मास्टरमाइंड CA भी गिरफ्तार – Nagaur News

नागौर साइबर थाना पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए 34 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले के अनुसार गोटन निवासी रिटायर्ड डॉक्टर जस्साराम के साथ 28 दिसंबर 2025 को ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की वारदात हुई थी। ठगों ने खुद को फर्जी आईपीएस बताकर और जाली दस्तावेज दिखाकर डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाया और उनके खाते से 34 लाख रुपये दो अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।

​साइबर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित अनुसंधान किया और ठगी गई राशि में से 12 लाख रुपये बैंक खातों में होल्ड करवा दिए। पुलिस टीम ने दबिश देकर दिल्ली निवासी मास्टरमाइंड इमरान, विवेक कुमार, सलमान और योगेन्द्र को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया कि आरोपी इमरान और विवेक कुमार ने खुद के नाम से बैंक खाते और फर्में खुलवा रखी थीं, जिनका उपयोग वे साइबर अपराधों के लिए करते थे।
एक महीने तक किसी को नहीं बताया सुसाइड का मन बना चुके थे जानकारी के अनुसार घटना के एक महीने बाद भी डॉ. जस्साराम ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की । लेकिन परिजनों और रिश्तेदारों ने जब उनको गुमसुम और टेंशन में देखा तो उनको पूछा जिसपर उन्होंने अपनी पूरी बात बताई । इससे पहले पीड़ित गंभीर डिप्रेशन के शिकार हो गए थे परिजनों को यह तक कह दिया कि वो सुसाइड करने का मन बना चुके थे। परिजन डॉ जस्साराम को साइबर थाने लेकर पहुंचे और 21 जनवरी को मामला दर्ज करवाया।

फर्जी IPS बनकर जाल में फंसाया पुलिस अनुसंधान में सामने आया कि यह पूरी साजिश 28 दिसंबर को शुरू हुई थी। ठगों ने पीड़ित को फोन कर खुद को बेंगलुरु का IPS संदीप दीवान बताया। आरोपियों ने पीड़ित पर गंभीर आरोप लगाते हुए डराया कि उसके खिलाफ क्राइम ब्रांच में मुकदमा दर्ज है। उन पर महिलाओं को अश्लील मैसेज भेजने और सदाकत खान नामक मानव तस्कर (Human Trafficker) के साथ मिलकर 3 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन का झूठा आरोप मढ़ा गया।
वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगों ने पीड़ित को पूरी तरह मनोवैज्ञानिक दबाव में लेने के लिए वीडियो कॉल का सहारा लिया। कॉल पर एक महिला खुद को IG बोनी बता रही थी, जिसने पीड़ित को तुरंत गिरफ्तार करने का आदेश दिया। इस फर्जी पुलिसिया रौब से घबराकर पीड़ित कई दिनों तक ठगों के ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रहा और डर के मारे किसी को कुछ नहीं बताया।
34 लाख की FD तुड़वाकर की ठगी केस रफा-दफा करने के नाम पर ठगों ने पीड़ित से 30 लाख रुपये की मांग की। ठगों के दबाव में आकर पीड़ित ने बैंक जाकर अपनी 34 लाख रुपये की एफडी (FD) तुड़वाई और बताए गए बैंक खातों में आरटीजीएस (RTGS) के जरिए रकम ट्रांसफर कर दी।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां पीड़ित की शिकायत पर नागौर पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दिल्ली के खातों का पता चला। पुलिस ने इस मामले में निम्नलिखित आरोपियों को गिरफ्तार किया है: सलमान: दिल्ली निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट, जो बैंक खाते उपलब्ध कराता था। योगेंद्र: ठगी गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड। विवेक और इमरान: वे खाताधारक जिनके खातों में ठगी की राशि जमा हुई थी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विभिन्न खातों में जमा 12 लाख रुपये की राशि को समय रहते फ्रीज करवा दिया है। हालांकि, फर्जी IPS और IG बनने वाले मुख्य किरदार अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिनकी तलाश में छापेमारी जारी है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *