चंडीगढ़ जिला अदालत में स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) के ड्राइवर बलविंदर सिंह को रिश्वत मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि पुलिस की तरफ से जो साक्ष्य और गवाह पेश किए गए थे, उनसे आरोप साबित नहीं हो सकते हैं। ऐसे में किसी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए सजा देना उचित नहीं है। BS-IV वाहन का करना था रजिस्ट्रेशन जनवरी 2020 में मलकीत सिंह ने एक कार खरीदी थी। उस समय कोरोना बीमारी होने के कारण उस कार का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया था। बाद में सरकार की तरफ से BS-IV वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर पाबंदी लगा दी गई थी। जब मलकीत सिंह ऑफिस गया तो रजिस्ट्रेशन से मना कर दिया गया। ऑफिस के बाहर हुई बलविंदर सिंह से मुलाकात मलकीत सिंह की मुलाकात ऑफिस के बाहर अथॉरिटी के ड्राइवर बलविंदर से हुई थी। उसने इस काम के लिए एक लाख रुपए की मांग की थी। बाद में ₹40 हजार में तय हो गया था। मलकीत सिंह ने 40 हजार रुपए दे दिए थे, लेकिन काम नहीं हो पाया था। इसके बाद उसने 30 हजार रुपए की और मांग की। रंगे हाथों पकड़ा गया था बलविंदर इसके बाद मलकीत सिंह ने इसकी शिकायत विजिलेंस ब्यूरो में की। मलकीत ने टीम के निर्देशानुसार 10 हजार देने के लिए ड्राइवर से बात की। विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने ट्रैप लगाकर 20 मई 2023 को ऑफिस सेक्टर 18 में बलविंदर सिंह को ₹10 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। उसके पास से रिश्वत की रकम भी बरामद हुई थी। इसका ऑडियो वीडियो और हाथ, पॉकेट व शर्ट के सैंपल सीएफएल भेजे गए थे।
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