‘जोश, जुनून और जिद है, तो कामयाबी को हासिल किया जा सकता है।’ दैनिक भास्कर समूह के विस्तार और आधुनिक पत्रकारिता के प्रणेता स्वर्गीय रमेशचंद्र जी अग्रवाल के इसी ध्येय वाक्य को सम्मान देने के लिए भोपाल नगर निगम ने एक बड़ी पहल की है। महापौर मालती राय ने घोषणा की है कि नगर निगम अब हर साल रमेशचंद्र अग्रवाल जी की स्मृति में पत्रकारिता पुरस्कार प्रदान करेगा। पत्रकारिता मूल्यों को जीवंत रखने वालों को मिलेगा सम्मान महापौर मालती राय के अनुसार, यह पुरस्कार उन पत्रकारों को दिया जाएगा, जो रमेशचंद्र जी के पत्रकारिता मूल्यों और आदर्शों को अपने कार्य में जीवंत रखते हैं। रमेशचंद्र अग्रवाल का जन्म 30 नवंबर 1944 को यूपी के झांसी जिले में हुआ था। हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई उन्होंने झांसी में ही की थी। वहां उनके पिता सेठ द्वारका प्रसाद अग्रवाल का किताबों का व्यवसाय था। 1956 में रमेशचंद्र अग्रवाल जी अपने पिता के साथ भोपाल आ गए। 1958 में भोपाल से ही दैनिक भास्कर अखबार की शुरुआत की। इसके बाद 1983 में इंदौर संस्करण की नींव डाली। देश के 50 ताकतवर लोगों की लिस्ट में शाामिल रहे भास्कर के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल ने भोपाल यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस की डिग्री ली। उन्हें पत्रकारिता में राजीव गांधी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। 2003, 2006 और 2007 में इंडिया टुडे ने उन्हें भारत के 50 सबसे ताकतवर लोगों की लिस्ट में भी शामिल किया था। उन्हें 2012 में फोर्ब्स ने भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में 95 नंबर पर रखा था। रमेशचंद्र अग्रवाल: जिन्होंने भास्कर को बनाया ‘वटवृक्ष’ भास्कर समूह के संस्थापक स्वर्गीय श्री द्वारका प्रसाद अग्रवाल जी द्वारा रोपे गए ‘भास्कर’ रूपी पौधे को रमेशचंद्र जी ने अपने व्यावसायिक कौशल और निपुणता से एक विशाल वटवृक्ष बनाया। तकनीकी क्रांति के जनक ऑफसेट प्रिंटिंग: 1970 के दशक में रमेशचंद्र जी ने ही अखबार को हैंड कंपोजिंग से बाहर निकालकर ‘ऑफसेट’ टेक्नोलॉजी का आइडिया दिया, जिसे 1978 में लागू किया गया। कंप्यूटर कंपोजिंग: साल 1980 में भोपाल भास्कर में कम्प्यूटर कंपोजिंग की शुरुआत कर उन्होंने अखबार का कलेवर ही बदल दिया। वैश्विक पहचान: आज भास्कर 3 भाषाओं (हिंदी, गुजराती, मराठी) में 12 राज्यों के 61 संस्करणों के साथ करोड़ों पाठकों तक पहुंचता है। प्रतिबद्धता: गैस कांड से लेकर कोरोना काल तक भास्कर की यात्रा शोधार्थियों के लिए एक विषय है। अखबार ने हमेशा निष्पक्ष और निर्भीक रहकर अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता निभाई है। ऐतिहासिक कवरेज: इंदिरा गांधी की हत्या, भोपाल दंगा और गैस त्रासदी के दौरान भास्कर के कवरेज की देश भर में सराहना हुई। कोरोना काल: संकट के समय में भी पाठकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए भास्कर ने बेबाकी से रिपोर्टिंग की।
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